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मक्का मस्जिद ब्लास्ट केसः असीमानंद को मिली जमानत

Thu, 23 Mar 2017 05:18 PM IST
amarujala.com, Presented By : अनंत पालीवाल
amarujala.com, Presented By : अनंत पालीवाल Updated Thu, 23 Mar 2017 05:18 PM IST
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Aseemanand gets bail in Hyderabad mecca nosque blast case
2007 में हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट केस में आरोपी बनाए गए असीमानंद को कोर्ट ने जमानत दे दी है। इससे पहले असीमानंद का नाम देश के तीन प्रमुख ब्लास्ट केस में भी सामने आया था। वहीं अजमेर ब्लास्ट केस में भी असीमानंद को जमानत मिल चुकी है। 18 मई, 2007 को हैदराबाद के पुराने इलाके में स्थित मक्का मस्जिद के पास जुमे की नमाज के दौरान हुए जोरदार विस्फोट में 16 लोगों की मौत हो गई थी। धमाका दोपहर डेढ़ बजे करीब हुआ था।
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अजमेर ब्लास्ट केस में हाईकोर्ट जाएंगे परिवादी

अजमेर दरगाह में हुए बम ब्लास्ट मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले को लेकर परिवादी खादिम सैयद सरवर चिश्ती नाखुश हैं। वे इस मामले में बनाए गए मुख्य आरोपी स्वामी असीमानन्द के बरी होने के फैसले को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। एनआईए की विशेष अदालत ने 8 मार्च, 2017 को असीमानन्द को बरी कर दिया था।
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अंजुमन सैयद जादगान के पूर्व सचिव व खादिम सैयद सरवर चिश्ती ने फैसले के बाद बड़ी देग में पत्रकारों से कहा कि उन्होंने वर्ष 2007 में दरगाह में हुए बम ब्लास्ट मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उन्होंने कहा कि फैसले से सभी खादिम समुदाय और मुस्लिम वर्ग व्यथित है। इस मामले में स्वामी असीमानन्द सहित मुख्य आरोपियों को बरी कर दिया है, जबकि वर्ष 2011 तक उनके खिलाफ सभी सबूत सामने आए थे। चिश्ती ने कहा कि सत्ता बदलते ही एनआईए की जांच की दिशा भी बदल गई।
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उन्होंने कहा कि असीमानन्द का नाम अजमेर ब्लास्ट, मालेगांव ब्लास्ट व समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में भी आ चुका है। उन्होंने कहा कि जब याकूब मेनन को आतंकवादी होने के कारण फांसी की सजा दी जा सकती है, तो फिर जिन दो आरोपियों को दोषी करार दिया गया उन्हें आजीवन कारावास की सजा से ही क्यों दंडित किया गया।

कौन हैं असीमानंद

Aseemanand gets bail in Hyderabad mecca nosque blast case
aseemannd
अजमेर दरगाह में 2007 में हुए ​विस्फोट मामले में जांच एजेंसियों ने स्वामी असीमानंद को मुख्य आरोपी बनाया था। जिन्हें बुधवार को एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने बरी कर दिया। जांच एजेंसियों ने  आरोप पत्र में इस ब्लास्ट में उनकी साजिशकर्त्ता के रूप में भूमिका गढ़ी थी, जिसे अदालत में साबित करने में ये एजेंसियां विफल रहीं। जांच एजेंसियों के आरोप पत्र में उनके बारे में ये तथ्य दिए गए थें —

असीमानंद का असली नाम नभकुमार सरकार है और वे मूलत: पश्चिमी बंगाल में हुगली के रहने वाले हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार वे 1995 में ​कट्टरपंथी नेता के तौर पर पहली बार सक्रिय हुए। इस दौरान उन्होंने हिंदू संगठनों के साथ मिलकर गुजरात में हिंदू धर्म जागरण और शुद्धिकरण अभियान चलाया। उन्होंने अपनी गतिविधियां संचालित करने के लिए शबरी माता का मंदिर बनाया। इससे पहले वे पुरुलिया में सक्रिय थे। बाद में मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र आदि में सक्रिय हो गए।
वर्ष 1990 से 2007 के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ी संस्था वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत प्रचारक प्रमुख भी रहे है।
शबरी धाम में असीमानंद ने 2006 में 10 दिन रहकर अजमेर समेत कई स्थानों पर बम ब्लास्ट की साजिश रची।
असीमानंद को अजमेर बम ब्लास्ट समेत विभिन्न मामलों में 19 नवंबर 2010 को हरिद्वार में  गिरफ़्तार किया गया था।
जांच एजेंसियों का दावा था कि वर्ष 2011 में उन्होंने मजिस्ट्रेट को दिए इक़बालिया बयान में अजमेर दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और अन्य कई स्थानों पर हुए बम विस्फोटों में उनका तथा अन्य कट्टरवादियों का हाथ होना स्वीकार किया था।
असीमानन्द इन बयानों से पलट गए और उन्होंने सफाई दी कि एनआईए के दबाव बनाकर उनसे इस तरह के बयान लिए।
पुलिस का कहना है कि वे श्रीकांत पुरोहित के अभिनव भारत और साध्वी प्रज्ञा तथा सुनील जोशी के संगठन वंदे मातरम से भी संबंध रखते है। श्रीकांत मालेगांव में हुए धमाकों के मामले में गिरफ्तार ​हुए थे।

स्वामी असीमानंद पर अजमेर दरगाह समेत विभिन्न स्थानों पर हुए विस्फोटों की योजना बनाने और इस योजना को धरातल पर लाने वालों को पनाह देने का भी आरोप था। कहा तो यह भी गया था कि उन्होंने मालेगांव की घटना के बाद अभिनव भारत और वंदे मातरम दोनों संगठन की एकजुटता के भी प्रयास किए थे।
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