बड़े भाई का फर्ज निभा रहा है भारत, कर रहा पाकिस्तान की गीदड़ भभकियों को नजरअंदाज
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 बेअसर होने और राज्य के पुनर्गठन विधेयक के पारित होने के बाद बौखलाहट में आया पाकिस्तान भारत का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान की इस कार्रवाई को एकतरफा बताया और कहा कि उसे अपनी जमीन पर चल रहे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई का खौफ सता रहा है। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। भारत ने जम्मू-कश्मीर के अपने हिस्से वाले क्षेत्र में यह बदलाव किया है और यह भारत का अंदरूनी मामला है।
पाकिस्तान की एकतरफा कार्रवाई
पाकिस्तान ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए पहले समझौता एक्सप्रेस और अब मुनाबाव-खोखरापार और थार एक्सप्रेस को बंद कर दिया। थार एक्सप्रेस राजस्थान के जोधपुर से पाकिस्तान जाती है। हालांकि अभी केवल दोनों देशों के बीच सदा-ए-सरहद बस सेवा जारी है, लेकिन जल्द ही पाक इसे बंद करने के लिए कदम उठा सकता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है कि पाकिस्तान ने बिना भारत से चर्चा किए यह कदम एकतरफा उठाया है। साथ ही, राजनयिक संबंधों को तोड़ते हुए पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त को देश छोडऩे के लिए कहा है। इतना ही पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने देश के हवाई मार्ग में भी बदलाव किया है। वहीं भारत ने पाकिस्तान से अपने फैसले पर एक बार फिर से पुनर्विचार करने को कहा है।
ये है पाकिस्तान की रणनीति
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इन कार्रवाइयों से पाकिस्तान के दो मकसद जाहिर हो रहे हैं। पहला, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने देश की जनता को दिखाना चाहते हैं कि वे इस तरह के कदम उठाकर भारत के साथ सख्त नाराजगी का संदेश दे रहे हैं। क्योंकि पाकिस्तान में अधिकांश लोग कश्मीर से ताल्लुक रखते हैं। वहीं दूसरी कोशिश कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की है।
पाकिस्तान इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने की धमकी भी दे चुका है। साथ ही कश्मीर को विवादित क्षेत्र के तौर पर पेश करके अंतरराष्ट्रीय अदालत में भी मामले को चुनौती देने की तैयारी में जुटा है। इसके अलावा पाकिस्तान के योजनाकार अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग समेत अन्य फोरम पर भी कश्मीर मुद्दे को उठाना चाहते हैं।
शांत है जम्मू-कश्मीर
वहीं भारत की पहली प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर में अमन-चैन की बहाली है। केन्द्र सरकार ने शुक्रवार को थोड़ी राहत की सांस ली है। राज्य में शुक्रवार को नागरिकों ने घरों से बाहर निकल कर जुमे की नमाज अता की और इस दौरान किसी तरह की कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। इतना ही नहीं पूरे राज्य में कर्फ्यू तोड़ने, हिंसा फैसाने या पत्थरबाजी जैसी कोई घटना नहीं हुई है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, उपराज्यपाल सत्यपाल मलिक, जम्मू-कश्मीर में वार्ताकार के तौर पर तैनात दिनेश्वर शर्मा, उपराज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार समेत अन्य की निगाह शांति बहाली पर टिकी है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि कश्मीर की जनता का रुख पर ही सबकुछ तय करेगा। वहीं राज्य के अलगाववादी नेता और अराजकतत्व हालात न बिगाड़ें इसके लिए लगातार राज्य के लोगों से संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।
भारत ने जवाबी कार्रवाई से किया परहेज
कूटनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि पाकिस्तान भारत की अपील पर ध्यान दे सकता है। क्योंकि भारत ने बदले में किसी भी तरह की कोई जवाबी कार्रवाई से परहेज करते हुए न तो पाकिस्तान से अपने उच्चायुक्त को बुलाया है और न ही पाकिस्तान की तरह ठोस कोई कदम उठा रहा है। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और भारत के पास राज्य की स्थिति, पुनर्गठन और स्टेटस में बदलाव का अधिकार है।