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तीनों सेनाओं में महिलाओं की ‘एक समान पदों’ पर नियुक्ति मोदी सरकार का लक्ष्य: रक्षा मंत्री

Tue, 08 May 2018 05:56 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Tue, 08 May 2018 05:56 AM IST
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Army considering making special cadre to give permanent commission to women
nirmala sitaraman

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार सेना, नौसेना और वायुसेना में महिलाओं को ‘एक समान पदों’ पर नियुक्ति देने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि अभी तक इस मामले में किसी साझा बिंदु पर नहीं पहुंचा जा सका है। 

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यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा, सरकार शार्ट सर्विस कमीशन के तहत सशस्त्र बलों में आई महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के लिए तैयार थी। लेकिन सशस्त्र बलों में महिलाओं की भर्ती से जुड़े नियमों को लेकर समानता नहीं है। जहां, वायुसेना में महिलाओं को फाइटर पायलट के तौर पर शामिल किया जा चुका है। इसे वायुसेना में शीर्ष पायदान माना जाता है। वहीं सेना में अभी महिलाओं की महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति नहीं हुई है। नौसेना में भी महिलाएं समुद्र में नहीं जा सकतीं। यह तीनों सेनाओं के बीच समानता की कमी को दर्शाता है। सभी अपने तरीके से महिलाओं को सीमित विकल्प दे रहे हैं।
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रक्षा मंत्री ने कहा कि इस मामले में अलग रुख अपनाया जा रहा है। मैंने तीनों सेनाओं के साथ काफी समय लगाया है ताकि हम महिलाओं के लिए एक जैसी स्थितियां सुनिश्चित कर सकें। हमने उन मामलों को भी देख रहे हैं, जिनमें शार्ट सर्विस कमीशन वाली महिला अधिकारियों ने स्थायी कमीशन के लिए अदालत का रुख किया है। सीतारमण ने कहा कि हम महिलाओं के सेनाओं में आने को लेकर हमारा रुख काफी खुला है। हालांकि अदालत में चल रहे मामलों में फैसले का भी इंतजार किया जा रहा है। यह कार्यक्रम सीतारमण के पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री तक की यात्रा पर आयोजित किया गया था।
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रेप के हर दस मामलों में से सात में लिप्त होते हैं परिचित
नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए सीमारमण ने कहा कि परिवारों को बेटों की परवरिश के तरीकों में बदलाव लाना होगा। प्रत्येक 10 मामलों से 7 में आरोपी कोई परिचित ही होता है। रेप को लेकर मानसिकता बदलने की जरूरत है। कानूनी एजेंसियों को मिलकर अधिक सक्रियता से काम करना होगा लेकिन कोई अकेले रेप की घटना को नहीं रोक सकता। 

सेना का राजनीतिकरण कर रहे हैं पीएम

Army considering making special cadre to give permanent commission to women

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि कर्नाटक चुनाव के भाषणों में सेना और सेना प्रमुखों का नाम लेकर पीएम सेना के राजनीतिकरण का प्रयास कर रहे हैं। पीएम ने चुनाव प्रचार में सेना को खींचकर गलती की है। पीएम सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं जबकि सेना से जुड़े मुद्दों पर पूरा देश हमेशा साथ खड़ा रहा है। कांग्रेस को सेना पर गर्व है और कुर्बानियों को सलामी है। पीएम ने गलत शब्द का इस्तेमाल किया है जिसकी निंदा होनी चाहिए उन्हें पता है कि ये झूठ है इसलिए अपनी बात वापस लें।  

शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा और प्रधानमंत्री गुमराह करने के लिए दुष्प्रचार कर रहे हैं। पीएम वोट के लिए लोगों को भड़काकर, हिंसा, घृणा के साथ गलत तथ्यों और इतिहास को गलत रूप में पेश करने में भी संकोच नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस देश के प्रधानमंत्री को ये न मालूम हो कि 1947 में हमला हुआ था पाकिस्तान का या 1948  में, जिनको ये न मालूम हो कि उस हमले के समय सेना के मुखिया कौन थे। 

प्रधानमंत्री को ये नहीं मालूम कि 1948 में कौन जनरल थे। 1962 में चीन के साथ लड़ाई में भारत की सेना के मुखिया कौन थे। उन्होंने बताया कि करिअप्पा जी 1949 में सेना के मुखिया बने थे और 1953 में रिटायर हुए। रिटायर होने के बाद पंडित नेहरु ने उनको ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भारत का उच्चायुक्त बनाकर भेजा था।  

इसी प्रकार जनरल थिमैया 1957 में बने थे। 1962 में जब भारत का चीन के साथ युद्ध हुआ तो जनरल थापर भारत की सेना के मुखिया थे। जनरल थिमैया के सेना का मुखिया बनने से पहले जवाहरलाल नेहरु ने उन्हें कोरिया का युद्ध खत्म करने में वहां भेजा था जो इंटरनेशनल न्यूट्रल फोर्स थी। उसके बाद उनको पद्मभूषण से सम्मानित किया। जनरल करिअप्पा को फील्ड मार्शल बनाने का निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में हुआ। वो भी उनके सेवानिवृत होने के तीन दशक के बाद। चूंकि फील्ड मार्शल करिअप्पा और जनरल थिमैया कर्नाटक के मूल निवासी थे इसलिए भावनाओं से खेलने का काम देश के प्रधानमंत्री स्वयं कर रहे है इससे निंदाजनक बात कोई नहीं हो सकती।  

कांग्रेस ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पूरी केंद्र सरकार शासन-प्रशासन छोड़कर चुनाव में व्यस्त है। पीएम और मंत्री चुनाव में कथकंडा अपनाना उचित समझते हैं। पीएम ने चुनाव में संवाद को निम्र स्तर पर गिरा चुके हैं जो पद की गरिमा के लिए उचित नहीं है। देश में धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण का माहौल अचानक नहीं है यूपी, हरियाणा आदि जगहों पर भावनाओं को भड़का जा रहा है।  

सोनिया और राहुल गांधी के कोर्ट से बेल मामले पर कांग्रेस नेता ने कहा भाजपा ने मर्यादा और शालीनता की परिधि लांघ ली है। सरकारी तंत्र और उसके दुर्पयोग से झूठे मुकदमे दर्ज कराने के साथ बदनाम करना अनुचित है। भ्रष्टाचार की बात पर शर्मा ने कहा प्रधानमंत्री को नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि जिस व्यक्ति को सीएम का चेहरा बनाया है और बल्लारी में जिन माफियाओं को टिकट दिया है वे पहले अपने गिरेबां में झांक लेते। कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया पर बजट का दस प्रतिशत खाने का आरेप लगाते हैं खुद जवाब दें कि उनके बजट का दस फीसदी कहां गया हजारों करोड़ विदेशी मुद्रा पीएम के दौरों पर खर्च होती है।  

क्या भाजपा राष्ट्रपति के बयान से सहमत नहीं
कर्नाटक चुनाव में टीपू सुल्ताल को लेकर कांग्रेस को विवादों में घसीटे जाने पर कांग्रेस ने भाजपा और प्रधानमंत्री को दलित विरोधी ठहराया है। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा का कहना है कि प्रधानमंत्री चुनावी भाषणों में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का नाम दलित राष्ट्रपति के तौर पर लेते हैं लेकिन टीपू सुल्तान को लेकर राष्ट्रपति ने जो बयान दिए हैं उससे सहमत नहीं हैं तो स्पष्ट करें। शर्मा ने आरोप लगाया कि लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े को इसीलिए विपक्ष के नेता का दर्जा और लाभ नहीं दिए जा रहे हैं क्योंकि वे दलित हैं। 

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