Kerala: 'महिला के उत्तेजक कपड़े हैं जिम्मेदार' कहने वाले जज का एक और विवादित फैसला, उसी आरोपी को दी थी राहत
आरोपी चंद्रन पर अप्रैल में एक पुस्तक प्रदर्शनी के दौरान यौन उत्पीड़न के दो मामलों में आरोप लगे थे। पहला मामला अनुसूचित जनजाति समुदाय की एक लेखिका से जुड़ा था।
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यौन उत्पीड़न अपराध के लिए महिला के उत्तेजक पोशाक को जिम्मेदार ठहराए जाने के सेशन कोर्ट का विवाद थमा भी नहीं था कि केरल में ऐसा ही एक और पुराना मामला सामने आया है। गुरुवार को उसी न्यायाधीश द्वारा एससी/एसटी एक्ट के संबंध में एक और विवादास्पद आदेश सामने आया है। सत्र न्यायाधीश ने 2 अगस्त को एक आदेश में 74 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक सिविक चंद्रन को एससी/एसटी अधिनियम के तहत एक मामले में जमानत दे दी। जज ने कहा कि इस कानून के तहत प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ मामला नहीं बनता क्योंकि वह खुद जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहा है। इसी जज ने 12 अगस्त को यौन शोषण के मामले में आरोपी सिविक चंद्रन को यह कहते हुए जमानत दे दी थी कि यौन उत्पीड़न के तहत अपराध प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता क्योंकि महिला ने उत्तेजक पोशाक पहन रखी थी।
जज ने कहा था, शिकायतकर्ता महिला ने पहने थे उत्तेजक कपड़े
कोझिकोड सत्र न्यायालय ने कहा था कि आरोपी द्वारा पेश शिकायतकर्ता की तस्वीर से यह पता चलता है कि महिला ने खुद ऐसे कपड़े पहने हुए थे जो यौन उत्तेजक थे। यह विश्वास करना असंभव है कि 74 वर्ष की आयु और शारीरिक रूप से विकलांग आदमी किसी को जबरदस्ती अपनी गोद में बैठा सकता है और गलत हरकत कर सकता है। इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष के साथ राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों से 12 अगस्त के आदेश की आलोचना जारी है। रेखा शर्मा और माकपा पोलित ब्यूरो की वरिष्ठ सदस्य वृंदा करात ने न्यायाधीश की टिप्पणी की कड़ी निंदा की है।
रेखा शर्मा ने ट्वीट किया, यौन उत्पीड़न के मामले में जमानत देते समय शिकायतकर्ता के कपड़ों के संबंध में कोझिकोड सत्र अदालत की टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और @ncwIndia इसकी कड़ी निंदा करता है। अदालत ने इस तरह के आदेश के दूरगामी परिणामों की अनदेखी की है। वहीं, वृंदा करात ने दिल्ली में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि उच्च न्यायपालिका को ऐसी टिप्पणियों पर ध्यान देना चाहिए और आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। क्या उच्च न्यायपालिका महिलाओं के विश्वास को बहाल करने के लिए कोई उपाय करेगी, जो अदालतों में यौन शोषण की शिकार हैं।
आरोपी चंद्रन पर अप्रैल में एक पुस्तक प्रदर्शनी के दौरान यौन उत्पीड़न के दो मामलों में आरोप लगे थे। पहला मामला अनुसूचित जनजाति समुदाय की एक लेखिका से जुड़ा था। दूसरा मामला एक युवा लेखिका का था, जिसने फरवरी 2020 में शहर में एक पुस्तक प्रदर्शनी के दौरान यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। कोयिलैंडी पुलिस ने चंद्रन के खिलाफ मामले दर्ज किए थे, लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई थी क्योंकि वह फरार हो चुका था। चंद्रन को पहले मामले में 2 अगस्त को अग्रिम जमानत दी गई थी।