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सरकार के हलफनामे पर चार हफ्ते में देना होगा एएमयू को जवाब

Mon, 11 Jul 2016 10:03 PM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो नई दिल्ली
अमर उजाला/ ब्यूरो नई दिल्ली Updated Mon, 11 Jul 2016 10:03 PM IST
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AMU has to answer to the government's affidavit, the four-week time

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा न करार देने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील को केंद्र सरकार द्वारा वापस लेने के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय को इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते दिया है।

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मालूम हो कि पिछले दिनों मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली पूर्व यूपीए सरकार द्वारा दाखिल की गई अपील को वापस लेना चाहती है।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीपी राव ने सोमवार को न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली पीठ केसमक्ष कहा कि उन्हें केंद्र केहलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए कुछ वक्त दिया जाए। वरिष्ठ वकील के आग्रह को स्वीकार करते हुए पीठ ने उन्हें चार हफ्ते का वक्त दे दिया। सनद रहे कि विश्वविद्यालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दे रखी है।

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1981 में संशोधन कर एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान करार दिया गया

AMU has to answer to the government's affidavit, the four-week time
एएमयू - फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो

सरकार ने हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट कर दिया है कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली यूपीए सरकार की याचिका को वापस लेगी। हलफनामे में कहा गया था कि एएमयू की स्थापना केंद्रीय कानून के तहत की गई थी। 1967 में पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अजीज बाशा मामले में फैसला दिया था कि एएमयू केंद्रीय विश्वविद्यालय है, न कि अल्पसंख्यक संस्थान।

1981 में संशोधन कर एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान करार दिया गया। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दे दिया। हलफनामे में कहा गया है कि पीठ अजीज बाशा के फैसले को नजरअंदाज नहीं कर सकती। भारत सरकार द्वारा एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया जाना अजीज बाशा के फैसले के खिलाफ है।

गत फरवरी महीने में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इस मामले में यूपीए सरकार द्वारा दाखिल की गई अपील वापस करने केनिर्णय दो महीने पहले ही ले लिया गया था। जिसकेबाद पीठ ने सरकार को आठ हफ्ते के भीतर हलफनामे के जरिए अपना पक्ष रखने के लिए कहा था।

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