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पाकिस्तान को अमित शाह की चेतावनी, आतंकवाद खत्म करे या हमारे जवाब के लिए तैयार रहे

Wed, 27 Nov 2019 06:08 PM IST
Mohit Mudgal डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Mohit Mudgal Updated Wed, 27 Nov 2019 06:08 PM IST
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Amit Shah warning to Pakistan says end terrorism otherwise be ready for our action
अमित शाह - फोटो : ANI

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह कश्मीर में आतंकवाद को बंद करे, अन्यथा हमारे जवाब के लिए तैयार रहे। पूरी दुनिया को पता है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान हमारे पूरे देश में आतंकवाद फैलाने का षड्यंत्र करता रहा है। यह भी तय है कि हम उसे सफल नहीं होंगे। अमित शाह ने कहा कि भारत की प्रतिक्रिया पाकिस्तान के क्रियाकलापों पर आधारित है। अगर वह शांति चाहता है तो अपने यहां आतंकवाद को खत्म करे। वह आतंकवाद फैलाना चाहता है तो हम आतंकवाद को खत्म करने की दिशा में माकूल जवाब देंगे। शाह ने स्पष्ट किया कि हम किसी से कोई झगड़ा नहीं चाहते, किंतु भारत की सीमाओं के अंदर किसी भी संस्था को आतंकवाद बढ़ाने की छूट नहीं दी जाएगी।

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बुधवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि धारा 370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। अब धीरे-धीरे उन्हें हटा लिया गया है। उनका कहना था कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 और आतंकवाद का चोली-दामन का रिश्ता था। पूरी दुनिया को पता है कि हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान आतंकवाद फैलाने का षड्यंत्र करता रहा है। वह देश के अन्य हिस्सों में भी आतंकवाद फैलाना चाहता है, मगर वह उसमें सफल नहीं हो पा रहा।
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कश्मीर में एक समय तक वह सफल हुआ, उसका कारण था कि वहां अनुच्छेद 370 और 35 ए के आधार पर स्थानीय लोगों को गुमराह किया गया। वहां के युवाओं के हाथ में हथियार पकड़ा दिए गए। अनुच्छेद 370 को समाप्त कर पाकिस्तान के दुष्प्रचार को खत्म करना आवश्यक था।पीएम नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को खत्म करने की अच्छी शुरुआत की है। शाह ने कहा कि आज कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में बहुत कमी आई है। 
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जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी का पहला एजेंडा था कि अनुच्छेद 370 और 35ए देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं थे। एक देश में दो संविधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं होने चाहिए।यह हमारा पहले से संकल्प था। भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता और देश के बहुत से लोगों की इच्छा थी कि अनुच्छेद 370 हटना चाहिए।

जहां असुरक्षा है, वहां देश के गृहमंत्री को गुस्सा आना स्वाभाविक है: शाह 

अमित शाह ने कहा कि संसद के अंदर सभी को चर्चा करने का अधिकार है किंतु अनुच्छेद 370 पर खुलकर समर्थन में आने का हौसला कोई नहीं रखता। विपक्ष को जनता के बीच अपना मत साफ करना चाहिए कि वह अनुच्छेद 370 के समर्थन में है या विरोध में। मेरा गुस्सा किसी पार्टी के खिलाफ या किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। देश को व्यवस्थित और सुरक्षित करना गृह मंत्रालय का काम है। जहां पर भी अव्यवस्था है, असुरक्षा है वहां पर देश के गृहमंत्री को गुस्सा आना स्वाभाविक है। विपक्ष ने जब देश की संसद की क्षमता पर प्रश्न उठाया तब मुझे गुस्सा आया। उनका कहना था कि देश के बहुत सारे लोग कश्मीर के लिए अपनी जान दे सकते हैं।

अयोध्या मसले पर बोले शाह, मंदिर बनने में अब कोई अड़चन नहीं है 

अयोध्या मसले पर उन्होंने कहा कि मंदिर बनने में अब कोई अड़चन नहीं है, तय समय सीमा में भव्य मंदिर का निर्माण होगा। उनका कहना था कि अयोध्या मसले पर सबसे बड़ी बाधा कांग्रेस पार्टी बनी हुई थी। वोट बैंक के कारण वह इस पर राजनीति कर रही थी। 100 वर्ष तक इतने संवेदनशील मुद्दे पर फैसला नहीं आया।इससे जाहिर होता है कि केवल वोट बैंक की राजनीति हो रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि जिसको राजनीति करनी है करे, सुप्रीम कोर्ट का फैसला तथ्यों पर आधारित है वह संवेदना पर आधारित नहीं है। देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले का क्रियान्वयन करना हमारा दायित्व है और इसका हम निर्वहन करेंगे। उनका यह भी कहना था कि बड़े-बड़े उलेमाओं ने और बहुत सारे मुसलमानों ने इस निर्णय का स्वागत किया है।

एनआरसी का बंगाल के साथ कोई संपर्क नहीं है... 

एनआरसी पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि एनआरसी का बंगाल के साथ कोई संपर्क नहीं है। देश का एक नागरिक रजिस्टर होना चाहिए, देश के नागरिकों की सूची बननी चाहिए जिसका अब समय आ गया है। उनका कहना था कि देश की प्रक्रिया में वही दखल दे पाएगा जिसका नाम रजिस्टर में होगा, यह बनाने में बहुत देर हो चुकी है अब समय नहीं गंवाना है और यह चुनावी घोषणा नहीं है। शाह ने कहा कि पूरे भारत के अंदर सिटीजन रजिस्टर बनना चाहिए, सिटीजन रजिस्टर बनेगा और बनकर रहेगा। उन्होने कहा कि एनआरसी में हिंदू मुस्लिम का कोई भेद नहीं होने वाला है, सभी को यह साबित करना पड़ेगा कि वह भारत के नागरिक हैं। 


सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिश्चियन शरणार्थी आए हैं उनको नागरिकता देंगे। इन लोगों पर वहां अत्याचार हो रहा था, महिलाओं को अपमानित किया जा रहा था और इन सब से बचने के लिए वह शरणार्थी बनकर भारत में शरण ले रहे हैं, वह शरणार्थी माने जाएंगे न कि घुसपैठिए। पहले भी विभिन्न देशों से आए शरणार्थियों को भारत में शरण दी गई है। रोहिंग्या कभी भारत के विभाजन का हिस्सा नहीं रहा और उनके पास कई विकल्प मौजूद हैं, वह बांग्लादेश भी जा सकते हैं। 

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