यूपी में सीएम के लिए पिछड़ी जाति वर्ग पर दांव लगा सकती है भाजपा
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उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाली भाजपा में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर माथापच्ची का दौर जारी है। इस संबंध में रविवार को पार्टी मुख्यालय में हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में 16 मार्च को यूपी में विधायक दल की बैठक बुलाने और केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू और पार्टी महासचिव भूपेंद्र यादव को बतौर पर्यवेक्षक भेजने का फैसला किया गया है। बोर्ड ने मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को दे दिया है।
हालांकि पार्टी ने संकेत दिया है कि यूपी में मुख्यमंत्री पद का चेहरा पिछड़ी जाति वर्ग से होगा, जिसने विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत की पटकथा लिखी है। इसके अलावा उत्तराखंड में पार्टी महासचिव सरोज पांडे और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पर्यवेक्षक के तौर पर भेजे जाएंगे। वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल मणिपुर में पार्टी पर्यवेक्षक होंगे।
यूपी में चेहरे के सवाल पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बोर्ड की बैठक के इतर गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ भी लंबी बैठक की। गौरतलब है कि इस पद की दौड़ में प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, पार्टी उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा और राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा का नाम लिया जा रहा है।
मोदी हमेशा की तरह चौंकाने वाला फैसला ले सकते हैं
हालांकि चेहरे के सवाल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा की तरह चौंकाने वाला फैसला ले सकते हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि संसदीय बोर्ड की करीब दो घंटे चली बैठक में महज चुनाव के नतीजों पर चर्चा हुई। बैठक में विधायक दल की बैठक बुलाने की तारीख और पर्यवेक्षक नियुक्त करने पर सहमति बनी। इस सूबे में पार्टी का चेहरा कौन होगा इस पर शाह और प्रधानमंत्री मोदी 16 मार्च से पहले अंतिम निर्णय लेंगे।
इसके बाद विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक विधायकों को नेतृत्व के फैसले की जानकारी दे देंगे। दरअसल, पार्टी की जीत में गैर-यादव पिछड़ी जातियां और अगड़ी जातियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पार्टी लंबी मशक्कत के बाद खुद को बनिया ब्राह्मण बिरादरी की पार्टी की अवधारणा से बाहर निकाल पाई है। जाहिर तौर पर आलाकमान की पहली पसंद किसी गैर-यादव ओबीसी को चेहरा बनाने और अगड़ी जातियों को मंत्रिमंडल में उचित भागीदारी देकर साधने की होगी।