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अमित शाह सुलझाएंगे कर्नाटक का विवाद, दिल्ली पहुंचे येदियूरप्पा

Sat, 29 Apr 2017 02:17 PM IST
amarujala.com- संजय मिश्र
amarujala.com- संजय मिश्र Updated Sat, 29 Apr 2017 02:17 PM IST
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Amit Shah resolve Karnataka issue, Yeddyurappa arrives at Delhi

कर्नाटक भाजपा में पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियूरप्पा और पूर्व उपमुख्यमंत्री ईश्वरप्पा के बीच जारी राजनैतिक झगडे़ को अब पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह सुलझाएंगे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार कर्नाटक भाजपा में जारी अंतर्कलह पार्टी के लिए चिंता का विषय है।

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मामले में हस्तक्षेप करते हुए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह जल्द ही दोनों धडे़ के प्रमुख नेताओं से बातचीत करेंगे। इस बीच सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियूरप्पा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष येदियूरप्पा एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।
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शनिवार को पीएम मोदी के साथ येदियूरप्पा को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होना है। बताया जा रहा है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ येदियूरप्पा की अलग से मुलाकात हो सकती है। राज्य भाजपा प्रभारी एवं राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव को भी शनिवार को दिल्ली रहना है।

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थमने के बजाय बढ़ रहा विवाद

Amit Shah resolve Karnataka issue, Yeddyurappa arrives at Delhi

भाजपा आलाकमान की चिंता इसलिए बढ़ी है कि येदियूरप्पा और ईश्वरप्पा के बीच जारी सियासी संग्राम थमने के बजाए दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। बल्कि सूबे के दो प्रमुख कददावर नेताओं के बीच की सियासी जंग में अब नया मोड़ आ गया है।

ईश्वरप्पा के साथ जारी अपनी राजनैतिक जंग में येदियूरप्पा ने राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री बीएल संतोष का नाम भी घसीट दिया है। येदियूरप्पा का कहना है कि उनके खिलाफ ताल ठोक रहे ईश्वरप्पा को परदे के पिछे से संतोष हवा दे रहे हैं। अगले वर्ष कर्नाटक विधानसभा के चुनाव होने हैं। दक्षिण में भाजपा की सत्ता का द्वार कहे जाने वाले इस प्रदेश में अमित शाह दोबारा से कमल खिलाना चाहते हैं।

यही वजह है कि तमाम नैतिक बातों को दरकिनार करते हुए शाह ने वर्ष 2016 में येदियूरप्पा को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी थी। अध्यक्ष बनाते वक्त आलाकमान की ओर से येदियूरप्पा को नसीहत दी गई थी की वे लो प्रोफाईल रहकर कार्य करें। भविष्य में पार्टी उनका कद और बढाएगी। पार्टी आलाकमान की योजना इस लिंगायत नेता को दोबारा से सूबे का मुख्यमंत्री बनाने की है। 

मगर ईश्वरप्पा के साथ गहराते उनके राजनीतिक विवाद ने उल्टे भाजपा आलाकमान की ही मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चंद दिनों पहले हुए सूबे की 2 विधानसभा सीटों पर भी भाजपा को हार का सामना करना पडा है। जबकि कांग्रेस मुक्त अभियान के तहत अमित शाह अगले वर्ष होने वाले सूबे के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनवाना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने येदियूरप्पा और ईश्वरप्पा के विवाद का संकट जल्द निकालने का निर्णय लिया है।

क्या है येदियूरप्पा—ईश्वरप्पा विवाद

Amit Shah resolve Karnataka issue, Yeddyurappa arrives at Delhi

कर्नाटक में भाजपा की जीत दिलाकर दक्षिण भारत में सत्ता के लिए भाजपा कार मार्ग प्रसस्त करने वाले येदियूरप्पा एक समय में भाजपा के सबसे बडे ताकतवर नेता थे। ​सूबे की मजबूत लिंगायत बिरादरी से जुडे येदियूरप्पा का विवादों से पुराना नाता रहा है।

उनपर कुछ खास लोगों को बढावा देने का आरोप शुरू से लगता रहा है। लेकिन मनमानियों पर लगाम कसे जाने से नाराज होकर उन्होंने भाजपा से अलग होकर नया दला बनाकर विधानसभा का चुनाव लडा था। लेकिन स्वतंत्र रूप से अपनी ताकत नहीं बना पाए।

लोकसभा चुनाव 2014 से पहले पीएम मोदी के पहल पर येदियूरप्पा ने भाजपा में घरवापसी की। इसके एवज में 2016 में उन्हें प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गई। पार्टी नेतृत्व उनमें दोबारा से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनवाने का माददा देखता है। पार्टी ने उन्हें बतौर मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने की मंशा भी बना ली है। लेकिन ईश्वरप्पा हैं कि उनके अरमानों पर को पलीता लगाने में लगे हैं।

ईश्वरप्पा को येदियूरप्पा से डर क्यों

Amit Shah resolve Karnataka issue, Yeddyurappa arrives at Delhi

येदियूरप्पा को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की कमान सौंपे जाने के बाद से ही ईश्वरप्पा उनसे नाराज चल रहे हैं। शुरू ने उन्होंने येदियूरप्पा पर अपने चहेते यश मैन लोगों को बढावा देने का आरोप लगाया। तो अब वे इन्हें तानाशाह की संज्ञा दे रहे हैं।

ईश्वरप्पा ने प्रदेश में भाजपा बचाओं अभियान चलाते हुए आलाकमान को 10 मई तक का अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि 10 मई तक विवाद नहीं थमा तो वे 20 मई को बागियों की बडी रैली करेंगे।

उनके अल्टीमेटम ने भाजपा आलाकमान की नीदं उडा दी है। यही वजह है कि जल्द ही अमित शाह इस मामले में हस्तक्षेप कर दोनों नेताओं के जंग को थामने का प्रयास करेंगे।

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