किसान आंदोलन के बीच ये तस्वीर कुछ कहती है...
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किसान एक बार फिर सड़क पर हैं। वे कर्जमाफी और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। किसान दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर रोके गये हैं, जहां उनका प्रदर्शन जारी है।
इस आंदोलन के बीच कई ऐसी तस्वीरें दिख रही हैं जो अपना अलग ही संदेश दे रही हैं। मसलन किसानों के इस आंदोलन में महिलाओं की संख्या भी कम नहीं है। शायद वे संदेश देना चाह रही हैं कि चाहे खेत की धूप हो या आंदोलन की तपिश, दोनों का सामना करने में वे पुरुषों से पीछे नहीं हैं।
कहीं दीवार की छाया में तो कहीं किसी वाहन की छाया में कुछ किसान सड़क पर ही सोये पड़े हैं। शायद वे सरकार को ये संदेश दे रहे हैं कि उनकी नींद के लिए मुलायम बिस्तर जरूरी नहीं। उनकी जरूरतें बहुत बड़ी नहीं, अगर सरकार मान जाती तो अच्छा होता।
एक अलग तस्वीर में एक किसान तिरंगा हाथ में लिए लहरा रहा है। किसानों को मजबूत किये बिना यह तिरंगा हमेशा कैसे लहराता रहेगा, यह बड़ा सवाल है। वहीं कुछ ही दूर पर एक ही वाहन की छाया में किसान और सुरक्षा बलों के जवान, दोनों आराम कर रहे हैं।
शायद जवान ये संदेश देना चाह रहे हों कि यहां उनकी भूमिका अलग-अलग भले ही हो, लेकिन उनकी रगों में भी तो ऐसे ही किसी किसान का खून है। किसान हैं तो क्या हुआ, सेल्फी लेने का हक तो हमें भी है। शायद कुछ इसी भाव में किसान फोटो भी खिंचवा रहे हैं।
कटौरी, किसान और ट्रैक्टर
दस-बीस रुपए में चटखारेदार कचौरी इस आंदोलन का स्वाद बढ़ा रही है। छाया में सुस्ता रहे किसान अखबार भी पढ़ रहे हैं। ये देखने के लिए कि इस देश के पढ़े-लिखे वर्ग को उनकी कितनी चिंता है, सरकार उनके बारे में क्या सोच रही है।
ट्रैक्टर किसान के ख़ास साथी हैं। इनके बिना उसका गुजारा नहीं चलता। सो वो ट्रैक्टर इस आंदोलन में भी अपनी भूमिका पूरी संजीदगी से निभा रहे हैं।
यहां किसानों को लाने से लेकर उनके अस्थायी आराम करने की जगह भी इन्हीं ट्रैक्टरों की ट्रालियों में है। खाना भी इन्हीं ट्रालियों में बन रहा है। किसान हों और उनका ख़ास साथी हुक्का न हो, यह कैसे हो सकता है। सो, कुछ किसान प्रदर्शन के मुख्य मंच से दूर छाया में हुक्का गुड़गुडा रहे हैं।
सफाई कर्मचारी पानी की थैलियों को एक जगह समेट रहे हैं। सबका आंदोलन अपनी जगह है, लेकिन अगर उनका स्वच्छता मिशन अधूरा रह गया तो सब किये-धरे पर पानी फिर जाएगा। उनका आंदोलन तो बापू के जमाने से देश को स्वच्छ रखने का ही है, सो वे आज भी उसे आगे बढ़ाने पर लगे हुए हैं।
आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती भी तो है। उनके जन्मदिन पर वे उनके सपने को पूरा करने की अपनी कोशिश कैसे छोड़ देते।