Amarnath Yatra: यह बम बना सुरक्षा बलों के लिए खतरा, सिग्नल पर गाड़ी खड़ी होते ही चौकन्ने हो जाते हैं जवान
सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में लगभग 140 आतंकी मौजूद हैं। इनमें विदेशी आतंकी भी शामिल हैं। इस साल अभी तक 78 आतंकी मारे गए हैं, जिनमें 26 विदेशी आतंकी हैं। इनमें 'जैश-ए-मोहम्मद' के 14 और 'लश्कर-ए-तैयबा' के 12 आतंकी शामिल हैं...
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जम्मू-कश्मीर प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल, अमरनाथ यात्रा की तैयारियों में जुटे हैं। इस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय में बैठक हो चुकी है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में भी बैठकों के दौर जारी हैं। 30 जून से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा इंतजाम कर रहे सुरक्षा बलों के अधिकारी, इस बार एक खास बम के खतरे से परेशान हैं। इस टाइमर बम को किसी भी वाहन के निचले हिस्से में चिपका दिया जाता है। एलपीजी सिलेंडर के ऊपरी हिस्से जैसा या तस्तरीनुमा इस बम का तोड़ निकालने के लिए सुरक्षा बल भी तैयारी में लगे हैं। अमरनाथ ड्यूटी पर तैनात होने वाले पुलिस व केंद्रीय बलों की गाड़ियों पर पैनी निगाह रहेगी। अगर इनकी गाड़ियां ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी होती हैं, तो भी चारों तरफ से उसकी निगरानी की जाएगी। जवान तुरंत नीचे उतर कर नजर रखेंगे कि कहीं किसी आतंकी या संदिग्ध ने गाड़ी पर कोई बम तो नहीं चिपका दिया है। स्कैनर, ड्रोन और चॉपर से भी गाड़ियों पर नजर रखी जाएगी। सुरक्षा बलों के अधिकारियों का कहना है कि अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। आतंकियों को यात्रा के निकट नहीं फटकने देंगे।
सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में लगभग 140 आतंकी मौजूद हैं। इनमें विदेशी आतंकी भी शामिल हैं। इस साल अभी तक 78 आतंकी मारे गए हैं, जिनमें 26 विदेशी आतंकी हैं। इनमें 'जैश-ए-मोहम्मद' के 14 और 'लश्कर-ए-तैयबा' के 12 आतंकी शामिल हैं। यात्रा के रूट को लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, एसएसबी व इंटेलिजेंस एजेंसियों की बैठक में पता चला है कि आतंकी इस बार सुरक्षा बलों के वाहनों पर टाइमर बम, जो चुंबक की मदद से गाड़ी के किसी भी हिस्से पर चिपकाया जा सकता है, का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सुरक्षा एजेंसियां इस बम को लेकर काफी सतर्क हैं। जिन गाड़ियों में सुरक्षा बलों का आवागमन होगा, उन्हें 24 घंटे निगरानी में रखा जाएगा। यहां तक कि अगर किसी कारण से कोई वाहन हैवी ट्रैफिक के बीच या किसी दूसरे भीड़ भरे इलाके में रुकता है तो फौरन वहां पर कुछ जवान गाड़ी से नीचे उतर जाएंगे। वे गाड़ी के चारों तरफ खड़े होंगे। उनका काम यह देखना होगा कि किसी आतंकी या ओवर ग्राउंड वर्कर ने वाहन पर कोई बम तो नहीं चिपका दिया है। मोटर ट्रांसपोर्ट शाखा से बाहर निकलने के बाद गाड़ी की विशेष चौकसी की जाएगी।
रूट क्लीयर करने की प्रक्रिया के दौरान ड्रोन की मदद ली जाएगी। कुछ जगहों पर चॉपर से भी जवान, अमरनाथ यात्रा पर नजर रखेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले दिनों 'लॉजिस्टिक अरेंजमेंट' को लेकर बैठक की थी। इस बार यात्रा में पहले के मुकाबले सुरक्षा बलों की बीस फीसदी अतिरिक्त कंपनियां लगाई जाएंगी। सीआरपीएफ की डेढ़ सौ से अधिक कंपनियां यात्रा की सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगी। इसके अलावा एसएसबी और बीएसएफ को भी यात्रा रूट की जिम्मेदारी दी जा रही है।