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चर्चित चेहरा: अगाथा के संगमा देश की सबसे कम उम्र की केंद्रीय मंत्री रहीं , मेघालय की पहली महिला सांसद
Sun, 31 Mar 2024 07:53 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sun, 31 Mar 2024 07:53 AM IST
सार
मेघालय की राजदूत, मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि व क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की अच्छी समझ के कारण अगाथा ने उत्तर पूर्व की आवाज को संसद तक पहुंचाया। खासतौर से गारो हिल्स के मुद्दों पर संसद समेत हर मंच पर मुखर रहीं
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AGATHA
- फोटो : SOCIAL MEDIA
विस्तार
मेघालय की तुरा सीट से नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) की लोकसभा सांसद अगाथा के संगमा जिस क्षेत्र में रहीं, हर जगह परचम फहराया। पुणे विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक, ब्रिटेन के नॉटिंघम विश्वविद्यालय से पर्यावरण प्रबंधन में परास्नातक कर लौटीं अगाथा ने 2008 के उपचुनाव से सियासत में जोरदार एंट्री की। हर मंच पर, अगाथा ने उत्तर पूर्व और शेष भारत के बीच की दूरी को पाटने की वकालत की।
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अपने पहले संसदीय भाषण में उन्होंने असम के गुवाहाटी में हुए आतंकी हमले पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था, जब देश के किसी अन्य हिस्से में कोई घटना होती है, तो पूरी संसद और सांसद एकजुटता दिखाते हैं, लेकिन जब उत्तर पूर्व में कुछ होता है, तो दुख की बात है कि सिर्फ उत्तर पूर्व के सांसद ही आवाज उठाते हैं। क्षेत्र चाहे कोई भी हो, सांसदों की जिम्मेदारी देश के हित से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताना और बहस करना होना चाहिए।
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राजनीति रही स्वाभाविक पसंद अगाथा के लिए राजनीति एक स्वाभाविक पसंद थी, क्योंकि वह अपने पिता को देखकर बड़ी हुईं। पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद राजनीति में शामिल होने का फैसला अगाथा के लिए हालांकि काफी आश्चर्यजनक था, लेकिन वह पार्टी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रही हैं।
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मेघालय की राजदूत, मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि व क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की अच्छी समझ के कारण अगाथा ने उत्तर पूर्व की आवाज को संसद तक पहुंचाया। खासतौर से गारो हिल्स के मुद्दों पर संसद समेत हर मंच पर मुखर रहीं। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा उन्हें संसद में मेघालय का राजदूत कहते हैं।
पिता की सीट पर रिकॉर्ड जीत
लोकसभा अध्यक्ष रहे पिता पीए संगमा (अब दिवंगत) ने राष्ट्रीय राजनीति छोड़ी, तो बेटी ने पिता की सीट पर प्रतिद्वंद्वी को रिकॉर्ड वोटों से शिकस्त दी थी। तब 27 साल की अगाथा भारत की सबसे कम उम्र की सांसद बनीं। 15वीं लोकसभा में वह भारत की सबसे कम उम्र की केंद्रीय मंत्री (राज्य मंत्री, ग्रामीण विकास) बनीं। उनका रिकॉर्ड अब तक बरकरार है। अगाथा मेघालय की पहली महिला सांसद भी हैं।
सतत तरीके से विकास की वकालत
अगाथा के लिए विकास, शिक्षा और पर्यावरण के मुद्दें अहम हैं। वह सतत तरीके से विकास की वकालत करती रही हैं। उनका मानना है कि भारत को कई चुनौतियों का सामना करना होगा और हम सभी को अपने देश व आने वाले कल को आकार देने में योगदान देना होगा। वह कहती हैं, आदिवासियों के विकास के लिए अलग सोच की जरूरत है। उनके विकास का मॉडल उनकी जरूरत और परंपरा के मुताबिक तैयार किया जाना चाहिए।