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स्मार्ट बेटियां: सब जतन किये बाल विवाह के खिलाफ तर्कों को बल देने को
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Thu, 01 Nov 2018 08:50 PM IST
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Komal Verma
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बेटियों के तर्क आसनी से माता-पिता के गले नहीं उतरते। और अगर बात बाल विवाह रोकने की हो, तब तो यह जिद और कड़ी हो जाती है। अपने माता-पिता की ऐसी की कठिन जिद से पार पाने के लिए 11वीं में पढ़ रही 15 साल की कोमल को बाल विवाह से होने वाले शारीरिक मानसिक नुकसानों की फेहरिस्त को अपने स्कूल की शिक्षा में मिली जानकारी के तौर पर घर में पेश करना पड़ा। यह तकनीक काम आई और कोमल का बाल विवाह रुक गया।
सिलाई सीखने के साथ ही 12वीं में पढ़ रही कोमल ने जब बाल विवाह के खिलाफ बातों को केवल अपने तर्क के तौर पर मां के सामने रखा तो उन्होंने उसे खास तवज्जो नहीं दी। उन्होंने माना कि नासमझ लड़की बे सिर पैर की बातें कर रही है। अपनी जिद पर अड़ी कोमल ने जब कहा कि उसके स्कूल की टीचर ने भी बार बार इन बातों को बताया है, तब जाकर घर वाले कोमल की बातों पर विचार करने को तैयार हुए। फिर भी इस गुंजाइश को पक्के निर्णय में तब्दील करने के लिए कोमल को काफी मेहनत करनी पड़ी।
कोमल के इस संकल्प की वीडियो कथा बनाई है स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी अनीता सिंह ने। अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।
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सिलाई सीखने के साथ ही 12वीं में पढ़ रही कोमल ने जब बाल विवाह के खिलाफ बातों को केवल अपने तर्क के तौर पर मां के सामने रखा तो उन्होंने उसे खास तवज्जो नहीं दी। उन्होंने माना कि नासमझ लड़की बे सिर पैर की बातें कर रही है। अपनी जिद पर अड़ी कोमल ने जब कहा कि उसके स्कूल की टीचर ने भी बार बार इन बातों को बताया है, तब जाकर घर वाले कोमल की बातों पर विचार करने को तैयार हुए। फिर भी इस गुंजाइश को पक्के निर्णय में तब्दील करने के लिए कोमल को काफी मेहनत करनी पड़ी।
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कोमल के इस संकल्प की वीडियो कथा बनाई है स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी अनीता सिंह ने। अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।
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