फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   All parties submitted written reply to Supreme Court on Ayodhya dispute

अयोध्या: सभी पक्षों का लिखित जवाब दाखिल, रामलला ने मंदिर के लिए मांगी पूरी जमीन

Sun, 20 Oct 2019 02:14 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 20 Oct 2019 02:14 AM IST
सार

  • हिंदू पक्ष ने कहा विवादित स्थल के आसपास की जमीन भी मंदिर के लिए दी जाए
  • मुस्लिम पक्ष ने संयुक्त रूप से सीलबंद लिफाफे में दाखिल किया अपना पक्ष
  • शीर्ष कोर्ट ने सुनवाई के आखिरी दिन मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर लिखित जवाब मांगा था

विज्ञापन
All parties submitted written reply to Supreme Court on Ayodhya dispute
सुप्रीम कोर्ट(फाइल फोटो)

विस्तार

अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले से जुड़े सभी पक्षों ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में मोल्डिंग ऑफ रिलीफ के तहत लिखित जवाब दाखिल कर दिया। हिंदू पक्षकारों ने 2.77 एकड़ विवादित जमीन और आसपास अधिगृहित जमीन भी मंदिर निर्माण के लिए मांगी है। वहीं, मुस्लिम पक्षकारों ने संयुक्त रूप से सीलबंद लिफाफे में जवाब दाखिल किया है।

विज्ञापन


चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई के आखिरी दिन सभी पक्षों को तीन दिन में लिखित जवाब दाखिल करने को कहा था। कोर्ट ने यह बताने को कहा था कि किसी पक्ष को पूरी तरह से अधिकार न मिलने की स्थिति में क्या गुंजाइश हो सकती है।
विज्ञापन


हिंदू पक्षकारों ने कहा हम उस जगह को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं। एएसआई रिपोर्ट से साफ है कि वहां मंदिर हुआ करता था। इसलिए वह जमीन हिंदुओं को दी जाए। इस बीच हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष की ओर से सीलबंद लिफाफे में जवाब पेश करने पर ऐतराज जताया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उनका कहना है कि यह कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। हिंदू पक्ष ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में आपत्ति भी दर्ज कराई है। दरअसल, सीलबंद लिफाफे में दिया गया जवाब दूसरे पक्ष से साझा नहीं जाता है।

किसने क्या दिया जवाब

मुस्लिम पक्ष द्वारा मस्जिद पुननिर्माण की बात न्याय विरुद्ध तथा हिंदू धर्म और इस्लामी कानून के खिलाफ है। पूर्व अटॉर्नी जनरल के. परासरन और वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन के माध्यम से दाखिल नोट में कहा गया है कि ढांचे के नीचे मिले मंदिर के प्रमाण से साफ है कि वह हिंदुओं का पवित्र स्थल है। सुप्रीम कोर्ट विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर न्याय करे। पूरी विवादित जमीन रामलला को सौंपे। निर्मोही अखाड़े या मुस्लिम पक्ष को हिस्सा न दिया जाए।

रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति
वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा की ओर से दाखिल जवाब में मांग की गई है कि विवादित स्थल पर केवल राम मंदिर बनाने का फैसला हो। मंदिर निर्माण के बाद देखरेख और प्रबंधन के लिए ट्रस्ट बने।

गोपाल सिंह विशारद
रामजन्म भूमि पर पूजा करना मेरा सांविधानिक अधिकार है। इस मामले में किसी समझौते से इनकार। भगवान राम की पूजा के अलावा अन्य किसी उद्धेश्य के लिए निर्माण की इजाजत न जाए।

हिंदू महासभा
रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण, उसके प्रबंधन और देखरेख के लिए सुप्रीम कोर्ट एक ट्रस्ट बनाए। कोर्ट इसका प्रशासक नियुक्त करे।

निर्मोही अखाड़ा
रामलला विराजमान या किसी अन्य हिंदू पक्षकार के हक में फैसला आने पर हमारा सेवायत अधिकार बना रहे। उस जगह के प्रबंधन का हक मिले।

मुस्लिम पक्ष
सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित जगह पर 5 दिसंबर, 1992 की स्थिति बहाल की जाए।

शिया वक्फ बोर्ड
मुस्लिमों को दावा छोड़कर जमीन मंदिर के लिए सौंपनी चाहिए। इस जमीन का सही स्वामी शिया वक्फ बोर्ड है। हाईकोर्ट के आदेश से जो जमीन मुस्लिम पक्ष को दी गई थी, उसे हिंदुओं को सौंपा जाए।

सुन्नी बोर्ड के दूसरे वकील ने भी पेश किया जवाब

सुन्नी बोर्ड की ओर से एक अन्य एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओरआर) शाहिद रिजवी ने बताया कि उन्होंने भी अपना पक्ष रखा है। उन्होंने विस्तृत जानकारी देने से इनकार किया लेकिन कहा, कोर्ट से अनुच्छेद-142 के तहत विशेषाधिकार का प्रयोग कर देशहित में फैसला लेने की गुहार की है। रिजवी ने ही वक्फ बोर्ड की ओर से दिए समझौता प्रस्ताव दिए जाने की पुष्टि की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed