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सीबीएसई के सभी स्कूल बनेंगे ‘क्रोध मुक्त जोन’, बोर्ड ने भेजी एडवाइजरी
Sat, 28 Dec 2019 02:58 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Sat, 28 Dec 2019 02:58 AM IST
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सभी स्कूलों को अपने ‘क्रोध मुक्त जोन’ शुरू करने को कहा है। जहां शिक्षक, अभिभावक और प्रशासनिक स्टाफ सभी अपने क्रोध पर नियंत्रण करने की कोशिश कर बच्चों के सामने उदाहरण पेश करेंगे और उन्हें ‘क्रोध से आजादी’ का महत्व समझाएंगे। बोर्ड ने कहा, यह छात्रों को मानसिक रूप से सक्रिय और भावनात्मक तौर पर स्वस्थ रहने में मदद करेगा। साथ ही वे घर ऊर्जा और प्रसन्नता के साथ वापस जाएंगे और अगले दिन स्कूल आने के लिए इच्छुक होंगे।
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सीबीएसई ने सभी स्कूलों को जारी एडवाइजरी में कहा है कि इसे ‘ज्वॉयफुल एजूकेशन एंड होलिस्टिक फिटनेस’ की पहल के तहत शुरू किया जाए। सिफारिश की गई है कि हर वक्त मोबाइल न देखें और सभी व्यायाम करें। बोर्ड ने सभी स्कूलों से अपने अनुभवों को रिकॉर्ड करने को कहा है। इस पहल की फोटो हैशटैग सीबीएसईनोएंगर का इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया पर शेयर भी करना होगा।
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सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने स्कूलों को भेजे पत्र में कहा है, ‘क्रोध मुक्त जोन’ में सभी गुस्से पर नियंत्रण का प्रयास करें, चाहे शिक्षक हो, अभिभावक हो या स्कूलकर्मी। उन्होंने कहा कि स्कूलों को ‘क्रोध मुक्त जोन’ बनाने से छात्रों में स्किल डेवलपमेंट में मदद मिलेगी। साथ ही छात्रों के डर, असम्मान, अमानवीयता और दुख आदि को भी खत्म करने में सहायता मिलेगी। बोर्ड ने स्कूलों को सलाह दी है कि वे एक जगह चुनकर वहां पर ‘यह क्रोध मुक्त जोन है’ संदेश लिखा बोर्ड लगाएं।
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बच्चों के आसपास की हर चीज में सकारात्मकता जरूरी
बोर्ड ने अपने पत्र में कहा है कि बच्चों के समग्र विकास के लिए सीखने की आदत को किसी भी तरह की नकारात्मकता से रहित होना चाहिए ताकि उनकी अपनी दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने में योगदान किया जा सके। उनके आसपास की हर चीज में सकारात्मकता का संचार कर सकें। केंद्र सरकार ने हाल ही में ‘फिट इंडिया’ कार्यक्रम शुरू किया है। शरीर की फिटनेस दिमाग की फिटनेस के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। एक फिट दिमाग एक रचनात्मक दिमाग है और समाज में योगदान देने में सक्षम है। गुस्सा फिटनेस के लिए हानिकारक है। अनियंत्रित क्रोध के दीर्घकालिक प्रभावों में चिंता, उच्च रक्तचाप और सिरदर्द शामिल हैं।