अखिलेश बोले, नहीं पता कि पिताजी अब क्या करने वाले हैं?
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीबीसी हिंदी से हुई एक खास बातचीत में कहा कि वे चाहते हैं कि पिता मुलायम सिंह उनके लिए चुनाव प्रचार करें। हालांकि अखिलेश ने ये भी कहा कि ये फैसला नेताजी यानी मुलायम सिंह ही करेंगे। अखिलेश यादव ने ये बात इस सवाल के जवाब में कही कि मुलायम ने चाचा शिवपाल यादव के चुनाव क्षेत्र में जाकर प्रचार शुरू कर दिया है।
मुलायम का फैसला
उन्होंने कहा, "मैं तो चाहता हूँ नेताजी मेरी कैम्पेन में चलें, लेकिन आखिरकार तय तो उन्हें ही करना है। नहीं पता क्या करेंगे, किन विधानसभाओं में जाएंगे, ये भी वही तय करेंगे। उनके आशीर्वाद से ही यहाँ तक पहुंचे हैं। मैं समझता हूँ उनका आशीर्वाद इस चुनाव में भी मिलेगा।"
लेकिन अखिलेश ने बार-बार इस बात को दोहराया कि 'अगर सपा सरकार दोबारा बनती है तो सबसे ज्यादा खुश नेताजी ही होंगे।' पिछले करीब दो महीने से समाजवादी पार्टी की भीतरी राजनीति ने देश भर में सुर्खियां बटोरी हैं।
पारिवारिक घमासान
जहाँ मुलायम सिंह के छोटे भाई और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री शिवपाल यादव ने अखिलेश का विरोध किया है तो रामगोपाल यादव अखिलेश के समर्थन में खुल कर सामने आए हैं। पार्टी में रामगोपाल समेत कई बड़े नेताओं के कई बार निष्कासन हुए और फिर वापस भी लिए गए। जानकारों की राय रही है कि चुनावों के ठीक पहले हुए इस पारिवारिक घमासान का नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता है।
यूपी में मतदान
खुद अखिलेश यादव ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा, "समय और भाग्य पर किसी का बस नहीं है। जो होना था शायद वो निश्चित समय पर हुआ, लेकिन अब हम लोग उन चीजों से दूर हो गए हैं।"अखिलेश यादव को ये भी लगता है कि 'शायद जनता भी इससे ऊपर उठ कर ये सुनना या जानना चाहती है कि समाजवादी पार्टी ने विकास कितना किया।'
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए कई चरणों का मतदान शुरू हो चुका है और नतीजे 11 मार्च को आएंगे।
सीएम उम्मीदवार
बीबीसी ने अखिलेश यादव से पूछा कि इन बातों में कितनी सच्चाई है कि इस गठबंधन का फायदा शायद कांग्रेस को पहुंचे?
धर्मनिरपेक्ष वोट
अखिलेश ने कहा, "सवाल ये नहीं कि किसे ज्यादा फायदा होगा और किसे कम। मुद्दे की बात ये है कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी सरकार दोबारा बनेगी और कांग्रेस के साथ गठबंधन से।" हाल ही में कई मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने मुसलमानों से बहुजन समाज पार्टी के लिए वोट करने की अपील की थी।
पूछे जाने पर कि इससे सपा को कितना नुकसान होगा, अखिलेश कहते हैं, "नुकसान बसपा को ही होगा क्योंकि वो भाजपा के साथ पहले रह चुकी है और धर्मनिरपेक्ष लोग हमारे साथ हैं।" करीब 15 मिनट तक चली बातचीत के दौरान मैंने उनसे पूछ ही लिया कि पत्नी डिंपल यादव अलग कैम्पेन कर रही हैं और वे अलग, ऐसे में शाम को खाने की मेज पर बातचीत क्या होती है?
मुस्कुराते हुए अखिलेश का जवाब था, "जाहिर है हम एक दूसरे से पूछते हैं कि तुम्हारी चुनावी सभा कैसी रही।"