{"_id":"5c03dd05bdec22419d12bdc6","slug":"ak-47-rifles-reached-to-maoists-from-army-in-this-way","type":"story","status":"publish","title_hn":"...तो इस तरह सेना से नक्सलियों तक पहुंचीं एके-47 राइफल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
...तो इस तरह सेना से नक्सलियों तक पहुंचीं एके-47 राइफल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 02 Dec 2018 06:54 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय जांच एजेंसी और बिहार पुलिस की जांच में सामने आया है कि किस तरह 125 एके-47 रायफलें नक्सलियों तक पहुंची। जांच के मुताबिक भारतीय सेना द्वारा खराब हो चुकी रायफलें, जिन्हें मध्यप्रदेश के जबलपुर के स्टोर में रखा गया था, उन्हें अलग-अलग भागों में बिहार के मुंगेरपुर पहुंचीं जहां फाउंड्रीज में इनसे हथियार तैयार किए गए।
विज्ञापन
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुंगेर से ये हथियार माओवादी और गैंग्स्टरों तक पहुंचे। जांच में मिली इस जानकारी से सवाल उठता है कि सेना खराब हो चुके हथियारों को किस तरह रखती है और इन हथियारों तक कौन पहुंच सकता है।
विज्ञापन
बता दें कि रैकेट का संदिग्ध मास्टरमाइंड पूर्व शस्त्रसाज (आर्मरर) पुरुषोत्तम रजक को सितंबर में जबलपुर से गिरफ्तार कर लिया गया था। उसने बताया था कि अगस्त में सेना के अधिकारियों ने आर्मी फैसिलिटी से एके-47 रायफल के पार्ट चुराने के शक में पकड़ा था। रजक के यह कहने पर कि उसकी गाड़ी में पाए गए रायफल के पार्ट किसी और ने रखे थे, उसे छोड़ दिया गया था।
विज्ञापन
बिहार पुलिस ने यह खुलासा अगस्त में किया था लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते इसे एनआईए के सुपुर्द कर दिया गया था। मुंगेर हथियारों के व्यापार के केंद्र के रूप में उभरा है। यहां अन्य हथियारों के साथ एके-47 रायफलों का भी व्यापार होता है जिसके पार्ट्स को सैन्य डिपो से चुराकर वहीं रायफल तैयार की जाती हैं। मुंगेर पुलस पहले ही एक ऐसे रैकेट को पकड़ चुकी है, जिसमें जबलपुर के केंद्रीय ऑर्डनेंस डिपो के अधिकारियों और स्थानीय हथियार डीलर्स के बीच संबंध मिले थे।