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पर्यावरण संरक्षण: देश के 120 शहरों के वायु प्रदूषण को कम करने के लिए समझौता

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 27 Mar 2021 01:35 AM IST

सार

  • इन शहरों में 2024 तक 30 से 40 फीसदी वायु प्रदूषण कम करने का लक्ष्य 
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शहरों के ऊपर छाई जहरीली हवा...
शहरों के ऊपर छाई जहरीली हवा... - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

देश के प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे 120 शहरों में 2024 तक वायु प्रदूषण को 30 से 40 फीसदी कम किया जाएगा। इसमें केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरों के स्थानीय निकायों और प्रतिनिधि संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर काम करेगा। मंत्रालय इस अभियान में तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा।
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की मौजूदगी में शुक्रवार को 120 शहरों के प्रतिनिधि संस्थानों के साथ राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत कार्य योजना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ।


वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में 120 शहरों के स्थानीय निकाय और जनप्रतिनिधियों के अलावा कार्यक्रम में 5 राज्यों के पर्यावरण मंत्री, शहरों के मेयर-कमिश्नर शामिल हुए। इसमें नोएडा और गाजियाबाद ने भी एमओयू पर साइन किया।

बैठक में जावड़ेकर ने कहा, देश में वायु की गुणवत्ता में सुधार के लिए ठोस प्रयासों की जरूरत है और मिशन मोड में इन्हें पूरा करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। भारत को स्वच्छ सुंदर करने का सबका दायित्व है, इसके लिए राजनीति से परे जाकर सोचना होगा। हमारे सामने इंदौर का उदाहरण है, यहां बहुत अच्छा काम किया गया है, जहां कभी कूड़े के ढेर लगते थे आज पार्क विकसित हैं।


केंद्रीय मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री ने 100 शहरों को वायु प्रदूषण में 20 फीसदी कम करने की चुनौति दी है, इसके लिए संयुक्त प्रयास से लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने दिल्ली में 3 फैक्टरियों के ढहाए गए कंस्ट्रक्शन डिपाजिट वेस्ट से नव निर्माण का उदाहरण दिया।

बीएस-6 पेट्रोल से पांच साल में 160 फीसदी प्रदूषण कम हुआ
जावड़ेकर ने कहा, देश में बीएस-6 पेट्रोल, डीजल की शुरुआत करने से पिछले 5 सालों में 160 फीसदी प्रदूषण में कमी आई है। उन्होंने राज्यों से तत्परता के साथ क्लीन एयर प्रोग्राम से जुड़ने का आह्वान किया।

जावड़ेकर ने बताया कि 62 शहरों के लिए ई बस स्वीकृत हुई, लेकिन मात्र 20 शहरों ने ही इसमें रूचि ली है। इसलिए अब केंद्र सरकार ने तय किया है कि जो शहर बसें नहीं लेंगे उनके हिस्से को दूसरे शहरों को दे दिया जाएगा, जो इसमें रुचि दिखाएंगे।

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