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CSE Report: महाराष्ट्र और गुजरात में बढ़ता प्रदूषण चिंताजनक, सीएसई ने अपनी रिपोर्ट में किया आगाह
Wed, 19 Jan 2022 10:39 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 19 Jan 2022 10:39 PM IST
सार
विश्लेषण में कहा गया है कि इस क्षेत्र में हालात और बिगड़ने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने की जरूरत है।
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air pollution
- फोटो : PTI
विस्तार
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा क्षेत्रीय वायु प्रदूषण के स्तर के एक नए विश्लेषण के अनुसार, भौगोलिक लाभ और अनुकूल मौसम विज्ञान के बावजूद पश्चिमी राज्यों महाराष्ट्र और गुजरात में वायु प्रदूषण तेजी से चिंता का विषय बनता जा रहा है। सीएसई की कार्यकारी निदेशक (अनुसंधान) अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा कि मुंबई में खराब-हवा के दिनों की संख्या 2019 और 2021 के बीच दोगुनी हो गई है, जबकि अच्छे दिनों में 20 प्रतिशत की कमी आई है। इस क्षेत्र में हालात और बिगड़ने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने की जरूरत है।
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विश्लेषण में दो राज्यों के 15 शहरों में फैले 56 निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों (सीएएक्यूएमएस) को शामिल किया गया है। महाराष्ट्र में औरंगाबाद, कल्याण, नागपुर, नासिक और सोलापुर में एक-एक स्टेशन, चंद्रपुर में दो, नवी मुंबई में चार, पुणे में आठ और मुंबई में 21 स्टेशन। गुजरात में अंकलेश्वर, नंदेसरी, वापी और वटवा में एक-एक स्टेशन, गांधीनगर में चार और अहमदाबाद में आठ स्टेशन।
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सीएसई के अर्बन डेटा एनालिटिक्स लैब के प्रोग्राम मैनेजर अविकल सोमवंशी ने बताया कि इन राज्यों के कुछ शहरों में कई रियल टाइम मॉनिटर हैं, लेकिन उनमें से कई पर डेटा अंतराल और गुणवत्ता डेटा की कमी के कारण दीर्घकालिक विश्लेषण के लिए विचार नहीं किया जा सकता है।
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इसके अलावा, कई मामलों में रियल टाइम मॉनिटर हाल ही में स्थापित किए गए हैं और इसलिए दीर्घकालिक डेटा उपलब्ध नहीं है। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस क्षेत्र के लगभग सभी शहरों में 2020 में वार्षिक औसत पीएम 2.5 के स्तर में गिरावट देखी गई थी जिस वर्ष लॉकडाउन लागू किया गया था। लेकिन अब दोबारा पुरानी स्थिति दिखाई पड़ रही है।
गुजरात में अधिक प्रदूषण
गुजरात के शहर महाराष्ट्र की तुलना में अधिक प्रदूषित हैं। वटवा और अंकलेश्वर में इस क्षेत्र में सबसे प्रदूषित हवा है जिसमें 2021 का औसत पीएम 2.5, 67 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। इसके बाद वापी और अहमदाबाद में 2021 का वार्षिक औसत क्रमश: 54 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 53 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
वहीं महाराष्ट्र के औद्योगिक शहर चंद्रपुर ने 43 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर वार्षिक मानक से मामूली ऊपर का स्तर दर्ज किया है। अन्य स्टेशनों ने वार्षिक मानक को पूरा किया है, हालांकि ये सभी 2020 में गिरावट के बाद 2021 में बढ़ता रुझान दिखा रहे हैं।