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‘पर्सनल लॉ बोर्ड के हलफनामे का कोई महत्व नहीं’ मुस्लिम महिलाओं ने की आलोचना
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
Updated Tue, 23 May 2017 06:40 AM IST
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने की तीव्र आलोचना हुई है। सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का विरोध करने वाली महिलाओं ने सोमवार को कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड ताजा हलफनामे में कुल मिलाकर महज मुस्लिम समुदाय में भ्रम पैदा कर रहा है।
भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने तलाक के लिए तीन तलाक का सहारा लेने वालों को सामाजिक बहिष्कार करने वाले बोर्ड के रुख की आलोचना करते हुए कहा ऐसी सलाह काफी नहीं है।
भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन का कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ की काजी या शौहर के लिए इस एडवाइजरी का कोई महत्व नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का विरोध करने वाली फराह फैज का कहना है कि यह महज एक रजिस्टर्ड एनजीओ है, जिसका न तो काजियों पर कोई जोर है और न ही वह इन्हें नियुक्त करता है। फैज का कहना है कि ऐसी एडवाइजरी जारी करने का एआईएमपीएलबी का कोई कानूनी या धार्मिक आधार नहीं है।
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फराह फैज का कहना है कि शरीयत कानून के मुताबिक निकाह के दौरान काजी की मौजूदगी जरूरी नहीं है। कोई मौलवी या कोई व्यक्ति आपसी रजामंदी से शादी करने वाले दो वयस्कों को निकाह पढ़वा सकता है।
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भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने तलाक के लिए तीन तलाक का सहारा लेने वालों को सामाजिक बहिष्कार करने वाले बोर्ड के रुख की आलोचना करते हुए कहा ऐसी सलाह काफी नहीं है।
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भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन का कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ की काजी या शौहर के लिए इस एडवाइजरी का कोई महत्व नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का विरोध करने वाली फराह फैज का कहना है कि यह महज एक रजिस्टर्ड एनजीओ है, जिसका न तो काजियों पर कोई जोर है और न ही वह इन्हें नियुक्त करता है। फैज का कहना है कि ऐसी एडवाइजरी जारी करने का एआईएमपीएलबी का कोई कानूनी या धार्मिक आधार नहीं है।
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फराह फैज का कहना है कि शरीयत कानून के मुताबिक निकाह के दौरान काजी की मौजूदगी जरूरी नहीं है। कोई मौलवी या कोई व्यक्ति आपसी रजामंदी से शादी करने वाले दो वयस्कों को निकाह पढ़वा सकता है।