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कोलंबिया यूनिवर्सिटी में मुझे दोबारा नौकरी मिलना असंभव- अरविंद पनगढ़िया

Wed, 02 Aug 2017 12:14 PM IST
amarujala.com, Presented by: ऋतुराज त्रिपाठी
amarujala.com, Presented by: ऋतुराज त्रिपाठी Updated Wed, 02 Aug 2017 12:14 PM IST
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again it is impossible to get job for me in Columbia University
अरविंद पनगरिया

नीति आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में पद छोड़ने के अपने फैसले की घोषणा करने के कुछ घंटों के बाद, सरकार की शीर्ष नीति के थिंक टैंक माने जाने वाले अरविंद पनगढ़िया ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि यह अचानक लिया गया फैसला नहीं है।

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उन्होंने कहा कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी में उनकी छुट्टियां खत्म हो रही थीं। इसलिए उन्होंने पीएम मोदी से बात की। पीएम ने कहा कि वो मुझे पूर्ण अवधि के लिए रखना चाहते हैं। फिर वो कोलंबिया यूनिवर्सिटी चले गए लेकिन बदकिस्मती से उन्हें विस्तार नहीं मिल सका।  
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उन्होंने कहा कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी में उनके पास जिस तरह की नौकरी है, वह उनके लिए फिर से मिलना लगभग असंभव होगा। अमेरिका में, कोई सेवानिवृत्ति की आयु नहीं है जब तक हमारा शरीर और मस्तिष्क काम करते हैं, तब तक आप काम करना जारी रख सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक मेरे लिए इस्तीफा देना बहुत मुश्किल था। यही जगह है जहां मैंने एक भारी निर्णय लिया था कि मैं कोलंबिया विश्वविद्यालय में लौटूंगा।
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भारतीय अमेरिकी मूल के अर्थशास्त्री और कोलंबिया विश्वविद्यालय में भारतीय राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर पनगढ़िया नीति आयोग के जनवरी, 2015 में पहले उपाध्यक्ष बने थे। उस समय योजना आयोग का समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया था।

वह आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के बाद दूसरे ऐसे हाई प्रोफाइल शिक्षाविद अर्थशास्त्री हैं जो भारत का प्रतिष्ठित पद छोड़कर अमेरिका में अध्यापन से जुड़ने जा रहे हैं। 64 वर्षीय पनगढ़िया कोलंबिया यूनिवर्सिटी में भारतीय राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं और सरकार के थिंक टैंक में उनका कोई निश्चित कार्यकाल नहीं है।

पनगढ़िया ने बताया, ‘यूनिवर्सिटी से अब मुझे अवकाश का और विस्तार नहीं मिल रहा है इसलिए 31 अगस्त को मुझे आयोग से इस्तीफा देना पड़ेगा। दो महीने पहले मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बारे में अपनी इच्छा बता दी थी। रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ मेरे हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं। मार्च, 2012 में पनगरिया को पद्म भूषण सम्मान मिला था। यह देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।


क्या है नीति आयोग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2014 को लालकिले से अपने संबोधन के दौरान योजना आयोग को समाप्त करके उसके स्थान पर नीति आयोग स्थापित करने की घोषणा की थी। नीति आयोग का पूरा नाम नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रान्सफॉर्मिंग इंडिया है। इस संस्था को बड़े थिंक टैंक के तौर पर माना जाता है।  इस संस्था में 8 सदस्य होते हैं। आठ सदस्यीय थिंक टैंक में एक अध्यक्ष और सात सदस्य होते हैं।

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