चीन से निपटने के लिए सीमा पर ताकत बढ़ा रही वायुसेना
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पीओके में दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दे चुकी भारतीय वायुसेना अब पूर्वी सेक्टर में चीन की कारगुजारियों को बख्शेगी नहीं। इसकी तैयारी जोरों पर है। अरुणाचल में वायुसेना ने खुद को मजबूत करना शुरू कर दिया है। ऐसा पहली बार है पूर्वी सेक्टर में वायुसेना अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर दुरुस्त कर रही है। जानकारों की मानें तो इसकी वजह चीन का दोगलापन है। इतिहास को देखते हुए चीन के रुख पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक वायुसेना के पूर्वी एयर कमांड के चीफ हरि कुमार ने बताया कि अरुणाचल में वायुसेना के सात एडवांस लैंडिंग ग्राउंड हैं, जिनमें से पांच ने काम करना शुरू कर दिया है। हरि कुमार ने बताया कि इस इलाके में वायुसेना के इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास अभी तक धीमा रहा, लेकिन अब इस काम में तेजी आ चुकी है। पूर्वी क्षेत्र में वायुसेना अपनी क्षमताओं में इजाफा कर रही है।
हरि कुमार की मानें तो अब तक पूर्वी सेक्टर में मिग-27 और हॉक स्क्वैड्रन्स विमानों की तैनाती रही है। फ्रांस से मिलने वाले राफेल लड़ाकू विमानों से इस इलाके में वायुसेना मजबूत और एयर कमांड में क्षमता बढ़ेगी।
'पूर्वी सेक्टर में नहीं पड़ेगी सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत'
हाल ही में हुए उड़ी आतंकी हमले के बाद भारत ने पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की और दर्जनों आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। हरि कुमार की मानें तो पाकिस्तान जानता है कि भारत से मुकाबला नहीं कर सकता है इसलिए वह भारत को परेशान करने के लिए आतंकियों का सहारा लेता है।
हरि कुमार की उम्मीद जताई कि पूर्वी सेक्टर में पश्चिमी सेक्टर की तरह सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पाक से चल रही तनातनी और युद्ध की संभावनाओं के सवाल पर हरि कुमार ने कहा कि युद्ध किसी भी देश के लिए अच्छा नहीं होता है। युद्ध से बचना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि हम अपने सैनिकों को यूं ही मरने देंगे। अगर पाकिस्तान फिर से कोई नापाक हरकत को अंजाम देता है तो अंजाम बहुच बुरा होगा।