MSP गारंटी कानून: चुनाव बाद एमएसपी को लेकर शुरू होगा किसानों का आंदोलन, 12 राज्यों में एक साथ होगी शुरुआत!
अमर उजाला से चर्चा में किसान हन्नान मौला ने कहा कि फिलहाल हम चुनाव खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। बैठक में किसान संगठनों के सभी लोग शामिल होंगे। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। यह आंदोलन 12 से 13 राज्यों में एक साथ शुरू किया जाएगा। सभी जगह भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया जाएगा...
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मोदी सरकार के तीनों कृषि कानून वापस लेने के बाद किसानों ने एक साल से चल रहे अपने आंदोलन को स्थगित कर दिया था। लेकिन अब वे फिर से आंदोलन करने की तैयारी करने में जुट गए हैं। किसानों का कहना है कि एमएसपी गारंटी कानून हमारे लिए अहम है। इसे लाने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के परिणाम आने के बाद नए सिरे आंदोलन शुरू किया जाएगा। ये आंदोलन देश में एक साथ, एक ही दिन, एक दर्जन राज्यों में शुरू होगा। चुनाव परिणाम के बाद संयुक्त किसान संघ की बैठक में आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा तय की जाएगी।
विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद किसान संगठन एक बार फिर से आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे हुए नजर आएंगे। इसे लेकर किसान संगठनों ने राज्यों में तैयारी शुरू कर दी है। किसान संगठनों ने राज्यों के संगठनों से कहा कि चुनाव के बाद छोटी-छोटी टीमें तैयार की जाएं। इसके बाद नए तरीके से आंदोलन को खड़ा किया जाएगा। अमर उजाला से चर्चा में किसान हन्नान मौला ने कहा कि फिलहाल हम चुनाव खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। बैठक में किसान संगठनों के सभी लोग शामिल होंगे। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। यह आंदोलन 12 से 13 राज्यों में एक साथ शुरू किया जाएगा। सभी जगह भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया जाएगा।
इन मुद्दों पर सरकार को घेरेंगे किसान
किसान नेताओं का कहना है कि फिलहाल लड़ाई अभी बाकी है। सरकार ने उत्तर प्रदेश चुनाव का दबाव, पश्चिम बंगाल चुनाव में हार और राष्ट्रव्यापी होता आंदोलन, इन तमाम कारणों को महसूस करते हुए सरकार ने इन काले कानूनों को वापस लिया है। हमारी दो ही मांगें थीं कि ये तीन कानून वापस लिए जाएं और सरकार एमएसपी पर गारंटी कानून का बिल लेकर आए। पंजाब और हरियाणा राज्य चाहते थे कि ये तीनों काले कानून वापस हो जाएं, शेष भारत के राज्यों की मांग थी कि एमएसपी गारंटी का कानून बनाए जाए। शुरू से ही ये दोनों मांगें किसान संगठनों के लिए बराबर रही हैं। अभी 50 फीसदी मामला ही तय हुआ हैं जबकि 50 फीसदी मांगें अभी भी बाकी हैं।
एमएसपी पर प्रधानमंत्री मोदी के कमेटी बनाने के फैसले पर किसान नेताओं का कहना है कि कमेटियों के परिणाम कभी अच्छे नहीं रहे हैं। आजादी के बाद किसानों की समस्या को हल करने के लिए पांच आयोग बन चुके हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने आयोगों की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। हमारा यह मानना है कि एमएसपी पर सरकार गारंटी कानून बना दें। संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही एलान कर दिया था कि जब तक हमारी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हम आंदोलन करते रहेंगे। भले ही हमें 2024 तक आंदोलन क्यों नहीं करना पड़ा।