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पेशावर: लगभग 70 साल बाद खुला गुरुद्वारा

Thu, 07 Apr 2016 02:50 PM IST
अजीजुल्लाह खान/बीबीसी, इस्लामाबाद
अजीजुल्लाह खान/बीबीसी, इस्लामाबाद Updated Thu, 07 Apr 2016 02:50 PM IST
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after 70 years gurudwara open in peshwar, pakistan
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह की राजधानी पेशावर में बंद भाई बीबा सिंह गुरुद्वारे को खोल दिया गया - फोटो : BBC

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह की राजधानी पेशावर में लगभग 70 सालों से बंद भाई बीबा सिंह गुरुद्वारे को खोल दिया गया है। यह गुरुद्वारा महाराजा रणजीत सिंह के दौर में बना था और उसके बाद इसमें नियमित तौर पर सिख पूजा करते रहे थे। लेकिन 1940 के दशक में इसे बंद कर दिया गया था। 

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पिछले कुछ सालों में कबायली इलाकों में फौजी अभियान के कारण खैबर, कुर्रम और ओरकजई एजेंसी से बड़ी संख्या में सिख विस्थापित होकर पेशावर में जाकर बस गए जिससे पेशावर में उनकी आबादी अब एक हजार परिवारों से ज्यादा हो गई है। सिखों के नेता कहते हैं कि जब पाकिस्तान बना तो बड़ी तादाद में सिख भारत चले गए और यह गुरुद्वारा बंद कर दिया गया था। स्वर्ण सिंह सिख समुदाय के नेता हैं और इस समय पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की प्रांतीय सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के सलाहकार हैं।
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उन्होंने बीबीसी को बताया कि यह गुरुद्वारा रणजीत सिंह के दौर में 1840 ईस्वी के आस-पास बनवाया गया था। स्वर्ण सिंह का कहना है कि पेशावर में अब सिख परिवारों की संख्या एक हजार से ज्यादा हो गई है। इससे पहले उनके पास केवल एक छोटा सा गुरुद्वारा था। 

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पेशावर में रहने वाला सिख मुख्य तौर पर व्यापार से जुड़ा

after 70 years gurudwara open in peshwar, pakistan
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह की राजधानी पेशावर में बंद भाई बीबा सिंह गुरुद्वारे को खोल दिया गया - फोटो : BBC

उन्होंने इस गुरुद्वारे को खोलने के फैसले पर न केवल सरकार बल्कि स्थानीय लोगों का भी शुक्रिया अदा किया। पेशावर में रहने वाला सिख मुख्य तौर पर व्यापार से जुड़ा है। पाकिस्तान की स्थापना के बाद इस इमारत में महिलाओं के लिए एक शिल्प केंद्र स्थापित किया गया था। केंद्र की पहली प्रिंसिपल शफकत आरा थीं। वो इसी गुरुद्वारे के एक हिस्से में रहती हैं। कुछ महीने पहले शफकत आरा ने बीबीसी को बताया था कि वोकेशनल सेंटर में बड़ी संख्या में महिलाओं को शिल्पकारी सिखाई गई थी।

30 मार्च को गुरुद्वारे के उद्घाटन के मौके पर पाकिस्तान की केंद्र सरकार की ओर से वक्फ संपत्ति बोर्ड के अध्यक्ष सिद्दीक अल फारूख मौजूद थे। उन्होंने कहा कि नवाज़ शरीफ की सरकार की नीति है कि अल्पसंख्यकों को उनके सभी अधिकार दिए जाएं। उन्होंने बताया कि पेशावर आने से पहले उन्होंने हसन अबदाल में सिखों और हिंदुओं के लिए 25 एकड़ का एक प्लॉट श्मशान घाट के लिए दिया है। गुरुद्वारे में मौजूद एक महिला प्रिया कौर ने बीबीसी को बताया कि वे इससे पहले अपने घर में पूजा करती थीं लेकिन संगत में इतने लोग आ जाते थे कि जगह कम पड़ जाती थी।

अब वो इस बड़े गुरुद्वारे में आसानी से पूजा करती हैं। इस गुरुद्वारे को खोलने का फैसला कुछ महीने पहले किया गया था लेकिन स्थानीय लोगों की चिंता की वजह से इसके उद्घाटन में देरी हुई। यह गुरुद्वारा पुराने पेशावर शहर के ऐतिहासिक इलाके हशतनगरी गेट के पास स्थित है और इसके करीब ही मस्जिद और मुसलमानों की बड़ी आबादी है।

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