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मुंबई ट्रेन धमाके: दोषियों की याचिकाओं पर 15 जुलाई से होगी सुनवाई, अदालत ने 18 साल बाद किया विशेष पीठ का गठन
Fri, 12 Jul 2024 10:22 PM IST
मिथिलेश नौटियाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: मिथिलेश नौटियाल
Updated Fri, 12 Jul 2024 10:22 PM IST
सार
11 जुलाई, 2006 को पश्चिम रेलवे की सात ट्रेनों में अलग-अलग स्थानों पर सात विस्फोट हुए। इसमें 180 से अधिक लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 वर्ष के बाद विशेष पीठ का गठन किया है।
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विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में सिलसिलेवार ट्रेन विस्फोट मामले के 18 वर्ष बाद दोषियों की ओर से दायर अपील के लिए एक विशेष पीठ का गठन किया है। यह विशेष पीठ दोषियों को दी गई मौत की सजा के खिलाफ दायर की गई याचिका की भी सुनवाई करेगी। आपको बता दें कि 11 जुलाई, 2006 को पश्चिम रेलवे की सात ट्रेनों में अलग-अलग स्थानों पर सात विस्फोट हुए। इसमें 180 से अधिक लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे।
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15 जुलाई से होगी सुनवाई
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की तरफ से जारी नोटिस के अनुसार, जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस श्याम चांडक की विशेष खंडपीठ 15 जुलाई से मामले की सुनवाई करेगी। पीठ का गठन मौत की सजा पाए दोषियों में से एक एहतेशाम सिद्दीकी की ओर से आवेदन दाखिल करने के तुरंत बाद आया है। आवेदन में मामले की जल्द सुनवाई की मांग की गई है।
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18 वर्ष बाद विशेष पीठ का गठन
एहतेशाम सिद्दीकी के वकील युग चौधरी ने इस महीने की शुरुआत में जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ को बताया था कि मामले के आरोपी पिछले 18 वर्षों से सलाखों के पीछे हैं और उनकी अपीलों पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई है। पीठ ने 18 वर्ष की अवधि को बहुत अधिक बताते हुए कहा था कि अपील पर सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
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क्या है मामला?
इस मामले में सितंबर 2015 में ट्रायल कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी ठहराया था। इनमें से पांच को मौत की सजा सुनाई थी और सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में मौत की सजा की पुष्टि के लिए अपील की थी। ट्रायल कोर्ट की तरफ से मौत की सजा दिए जाने पर हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक है।