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14 जनवरी के बाद बदली-बदली सी दिखेगी राहुल की कांग्रेस

Sun, 24 Dec 2017 04:15 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 24 Dec 2017 04:15 PM IST
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After 14 january congress will change rahul Gandhi taking effective decision 
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी
राजनीति के पंडितों को दिखाई देने लगा है कि कांग्रेस बदलने जा रही है। धर्म, राजनीति और भारतीयता (भाजपा के राष्ट्रवाद के जवाब में) के बीच में संतुलन बनाकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी का नया चेहरा पेश करने वाले हैं। 
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पार्टी के एक युवा रणनीतिकार का दावा है कि यह सबकुछ 14 जनवरी के बाद से अगले कुछ महीनों के बीच में होने वाला है। 14 जनवरी के बारे में पूछे जाने पर सूत्र का कहना है कि हिन्दू रीति-परंपरा के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति के बाद शुभ काम को आगे बढ़ाया जाता है।
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गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राहुल गांधी सोमनाथ मंदिर में गए। उन्होंने शिव की पूजा की। इसके बाद वह गुजरात की राजनीति में कुछ और बीज बो आए हैं। राहुल ने इसके जरिए भाजपा और गुजरात की जनता को साफ संदेश दे दिया है कि वह न तो डरते हैं और न ही आगे चुप बैठने वाले हैं।
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 इस बारे में कांग्रेस पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि राहुल के इस कदम का कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मेघालय तक भी असर जाएगा। इन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

पढ़ें- गुजरात में राहुल गांधी बोले- अगले चुनाव में जीतेंगे 135 सीट, बीजेपी हारेगी

होमवर्क कर रहे हैं कांग्रेस अध्यक्ष
जैसा गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने खुद को कहा कि उन्होंने काफी कुछ सीखा है। राहुल गांधी के करीबी कहते हैं सच में उन्होंने काफी कुछ सीखा है। राहुल गांधी के कार्यालय सूत्र का भी कहना है कि राहुल इन दिनों काफी मेहनत कर रहे हैं। वह काफी होमवर्क कर रहे हैं। 

यह होमवर्क कांग्रेस संगठन में बदलाव के लिए है। महिला कांग्रेस प्रमुख सुष्मिता देव को अपने नये पार्टी अध्यक्ष से काफी उम्मीदें हैं। राहुल का यह होमवर्क कांग्रेस के अंदरुनी ढांचे को दुरुस्त करने के लिए हो रहा है। वह आखिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में काफी बदलाव चाहते हैं। 

माना जा रहा है कि 14 जनवरी के बाद पार्टी के कोषाध्यक्ष, महासचिव, सचिव, विभागों के प्रभारियों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के पदाधिकारियों को लेकर काफी समय से लंबित मामलों में वह निर्णय लेंगे। इसके अलावा राहुल गांधी की कोशिश कांग्रेस सेवा दल से लेकर अन्य विभागों, संगठनों में जान फूंकना भी है।

क्षेत्रीय नेताओं पर जोर
कांग्रेस अध्यक्ष पिछले 25 साल से कांग्रेस के केन्द्रीय संगठन में रुकी हुई राजनीतिक प्रक्रिया को धार देंगे। कांग्रेस पार्टी की आईटी सेल से जुड़े सूत्र के अनुसार वह पार्टी को व्यवहारिक बनाने के लिए काफी सावधानी के साथ तैयारी कर रहे हैं। इसमें क्षेत्रीय नेताओं को मजबूत बनाना और नये चेहरों को अवसर देना शामिल है।

 राहुल गांधी चाहते हैं कि प्रदेश और जिला स्तर पर कांग्रेस पार्टी मजबूत हो। वह आम लोगों की आवाज बने। इसके लिए जरूरी है कि 70, 80 के दशक वाली कांग्रेस की तरह हर राज्य और क्षेत्र में पार्टी का दमदार चेहरा हो।  कांग्रेस पार्टी के एक महासचिव का भी मानना है कि चेहरा और चेहरों में तालमेल की ही पार्टी में कमी है। 

सूत्र का कहना है कि म.प्र. में पार्टी के पास नेताओं की कमी नहीं है। कद्दावर और जनाधार वाले चेहरे हैं। यही स्थिति कभी छत्तीसगढ़ में थी, लेकिन राजनीतिक चुनौती आने पर कांग्रेस के नेता एक नहीं हो पाते। यही वजह है कि म.प्र., छत्तीसगढ़ में कांग्रेस काफी समय से सत्ता से दूर है।

 

सोमनाथ और 27 मंदिर क्या है?

After 14 january congress will change rahul Gandhi taking effective decision 
rahul gandhi

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सोमनाथ बाबा का आशीर्वाद लेने समेत कुल 27 मंदिरों में दर्शन किए। राहुल गांधी के साथ सोमनाथ मंदिर गए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और गुजरात के प्रभारी अशोक गहलोत कहते हैं इसमें गलत क्या  है? अशोक गहलोत का कहना है कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं के बारे में गलत धारणा बना दी गई। दरअसल कांग्रेस को यह समझ पूर्व रक्षामंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी की रिपोर्ट के बाद आई है। 


2014 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद एंटनी कमेटी ने इसका मुख्य कारण पार्टी का अल्पसंख्यक, खासकर मुस्लिम समुदाय के प्रति जरूरत से ज्यादा झुकने का जनता के बीच में संदेश जाना बताया था। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी यूपीए सरकार के दौरान कहते रहे कि पार्टी राष्ट्रीयता संदेश देने में थोड़ा भटक रही है। जनार्दन की इस राय से अजय माकन सरीखे नेता इत्तेफाक नहीं रख रहे थे। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भाजपा के छद्म हिन्दुत्व की काट के लिए पार्टी द्वारा हुई गलती को संदेश देकर सुधारने की राह पर हैं।

अंदरखाने से खबर
कांग्रेस पार्टी के अंदरखाने से खबर है कि हिन्दू धर्म के अनुयाइयों में सही संदेश जा रहा है। इसका असर उत्तर से दक्षिण भारत तक फैल रहा है। हरियाणा के सिरसा जिले के पार्टी के नेता कहना है कि राम रहीम के अनुयाई से लेकर अन्य में सही राजनीतिक समझ आनी शुरू हो गई है।

 माना यह जा रहा है कि राहुल गांधी मंदिर में दर्शन के प्रयास को आगे जारी रखेंगे। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी का भी कहना है कि कभी पार्टी इससे अलग नहीं थी। कांग्रेस के नेता धार्मिक हैं। उनकी आस्था है, लेकिन भाजपा की तरह दिखावा नहीं करते थे। 

यह पूछे जाने पर क्या अब मंदिर जाना(सॉफ्ट हिन्दुत्व) जारी रहेगा? जनार्दन जैसे नेता इस तरह के शब्द प्रयोग पर बेहद संवेदनशील रहते हैं। उनका कहना है कि पार्टी ने गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार में जनता को जो संदेश दिया है, पार्टी उस रास्ते पर चलती रहेगी।

उम्मीदों को लग रहे हैं पंख
आनंद शर्मा की टू-जी स्पेक्ट्रम एवं लाइसेंस आवंटन घोटाले पर सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला आने के बाद की प्रतिक्रिया, कपिल सिब्बल के तर्क, रणदीप सुरजेवाला की आक्रामकता और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बयान काफी कुछ कहते हैं। अदालत का सभी आरोपियों को बरी करना, कपिल सिब्बल की जीरो लॉस की थ्यौरी का तर्क और तत्कालीन सीएजी विनोद राय की घोटाले की राशि के पूर्वानुमान(आभासी) पर सवाल उठना पार्टी के नेता अपने लिए संजीवनी मान रहे हैं।

 आनंद शर्मा कहते हैं कि इस एक टू-जी ने मनमोहन सिंह सरकार को लेकर लोगों की धारणा में नकारात्मकता भर दी थी। आनंद शर्मा कहते हैं कि पूरी जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में हुई है। सीबीआई की विशेष अदालत, जज की नियुक्ति, वकील की नियुक्ति सब उच्चतम न्यायालय की देख-रेख में हुई है। अब इसमें संदेह कहां रह गया। आदर्श सोसाइटी घोटाले में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चौव्हाण को भी बड़ी राहत मिल गई है। कांग्रेस के नेताओं को लग रहा है कि इससे भ्रष्टाचारी कांग्रेस की छवि बदलेगी।

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