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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड के अनुसार- रोजाना 381 लोग कर रहे आत्महत्या

Fri, 04 Sep 2020 02:29 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 04 Sep 2020 02:29 AM IST
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According to National Crime Records 381 people are committing suicide every day
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

देश में 2019 में हर रोज औसतन 381 लोगों ने आत्महत्या की। पूरे वर्ष कुल 1.39 लाख नागरिकों ने अपने जीवन को खुद खत्म किया। यह संख्या 2018 के मुकाबले 3.42 प्रतिशत बढ़ी है, जो दर्शाता है कि जीवन के प्रति लोगों में निराशा बढ़ रही है और उन्हें मोटिवेशन की जरूरत है।

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यह जानकारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा 2019 में भारत में हुई आत्महत्याओं पर जारी आंकड़ों में सामने आई है।


बीते चार वर्ष में सर्वाधिक आत्महत्या दर
2019 में देश में प्रति एक लाख 10.4 लोगों ने आत्महत्याएं की हैं। 2016 में यह दर 10.3 थी, 2017 में 9.9 रही और 2018 में 10.2 पर थी। यानी बीते चार साल में इस वर्ष यह दर सर्वाधिक है।
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10 हजार किसान, 32 हजार दिहाड़ी श्रमिकों ने खत्म किया अपना जीवन
देश में 10281 किसानों और खेती से जुड़े काम करने वाले लोगों ने पूरे वर्ष में आत्महत्या की। इनमें 4324 कृषि श्रमिक थे। वहीं 32563 दिहाड़ी श्रमिकों, 12725 वेतनभोगी, 10335 विद्यार्थियों, 14019 बेरोजगारों और 16098 स्वरोजगार करने वालों ने आत्महत्या की।
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उत्तर भारत में आत्महत्याएं

  • राज्य - कुल आत्महत्याएं - दर प्रतिशत लाख - 2018 के मुकाबले वृद्धि
  • उत्तर प्रदेश - 5464 - 2.4 - 12.7 प्रतिशत
  • हरियाणा - 4191 - 14.5 - 18.2 प्रतिशत
  • दिल्ली - 2526 - 12.7 - बदलाव नहीं
  • पंजाब - 2357 - 7.9 - 37.5 प्रतिशत
  • हिमाचल प्रदेश - 584 - 8 - माइनस 21.1 प्रतिशत
  • उत्तराखंड - 516 - 4.6 - 22.6 प्रतिशत
  • जम्मू-कश्मीर - 284 - 2.1 - माइनस 13.9 प्रतिशत

विश्लेषण में यह फैक्ट्स भी आए सामने
शहरों में ज्यादार शहरों में हर 1 लाख नागरिकों में 13.9 लोग खुदकुशी कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत 10.4 से कहीं ज्यादा है। दक्षिण भारत में सर्वाधिक  आत्महत्याओं की दर दक्षिण भारत में सर्वाधिक रही। तमिलनाडु में यह 16, आंध्र प्रदेश में 14 और केरल में 11 दर्ज की गई।

पारिवारिक वजहों से 32.4 प्रतिशत मामलों में आत्महत्या की वजह पारिवारिक वजहों को बताया गया। इसके बाद 17.1 प्रतिशत में रोग और 5.5 प्रतिशत में वैवाहिक समस्याएं वजह बने।

पुरुष ज्यादा कर रहे आत्महत्या करने वालों में पुरुष 70.2 प्रतिशत और महिलाएं 29.8 प्रतिशत हैं, यह दर्शाता है कि पुरुषों में आत्महत्या की प्रवृत्ति कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है।

दो-तिहाई विवाहित करीब 68 प्रतिशत आत्महत्या करने वाले पुरुष विवाहित थे। आत्महत्या करने वाले 62.5 प्रतिशत महिलाएं भी विवाहित थीं।

उच्च शिक्षित कम आत्महत्या करने वालों में 3.7 प्रतिशत ग्रेजुएट या उससे अधिक पढ़े लिखे थे, हालांकि इसकी वजह उनकी कम संख्या भी है। इसके अलावा 12.6 प्रतिशत अशिक्षित, 16.3 प्रतिशत प्राथमिक तक शिक्षित, 19.6 प्रतिशत मध्यामिक और 23.3 प्रतिशत मैट्रिक तक शिक्षित थे।

आधे से ज्यादा ने लगाई फांसी ऱ् आत्महत्या के लिए 53.6 प्रतिशत लोगों ने फांसी लगाने का दुखद रास्ता चुना। 25.8 प्रतिशत ने जहर खाया, 5.2 प्रतिशत डूबकर मरे तो वहीं 3.8 प्रतिशत ने खुद को आग लगाई।

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