फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Accidents still taking place despite SC framing guidelines in 2010 on abandoned borewells

Borewell Incidents: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की एक दशक तक उड़ती रहीं धज्जियां, बोरवेल-ट्यूबवेल पर निर्देशों का नहीं हुआ पालन

Wed, 15 Jun 2022 03:50 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 15 Jun 2022 03:50 PM IST
सार

ये निर्देश तब जारी किए गए थे जब तत्कालीन सीजेआई के जी बालकृष्णन की अगुवाई वाली एक पीठ ने 13 फरवरी, 2009 को देश में इस तरह की दुर्घटनाओं के बारे में अपने संज्ञान में लाने वाली एक पत्र याचिका पर स्वत: संज्ञान लिया था।

विज्ञापन
Accidents still taking place despite SC framing guidelines in 2010 on abandoned borewells
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एक दशक से अधिक समय के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लोगों, खासकर छोटे बच्चों के बेकार पड़े बोरवेल और ट्यूबवेल में गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में मंगलवार को 104 घंटे के ऑपरेशन के बाद 80 फीट के बोरवेल से निकाले गए 11 वर्षीय राहुल साहू को छुड़ाने के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। 

विज्ञापन


11 फरवरी 2010 को दिए थे निर्देश 
पंजाब के होशियारपुर का छह साल का ऋतिक हालांकि इतना भाग्यशाली नहीं था। 23 मई को सात घंटे के लंबे ऑपरेशन में 300 फीट बोरवेल से बचाए जाने के बाद ऋतिक को एक अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। 11 फरवरी 2010 को शीर्ष अदालत द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में निर्माण के दौरान कुएं के चारों ओर कांटेदार तार की बाड़ लगाना, कुएं के ऊपर बोल्ट के साथ तय स्टील प्लेट कवर का उपयोग करना और नीचे से जमीनी स्तर तक बोरवेल को भरना शामिल था। 
विज्ञापन


ये निर्देश तब जारी किए गए थे जब तत्कालीन सीजेआई के जी बालकृष्णन की अगुवाई वाली एक पीठ ने 13 फरवरी, 2009 को देश में इस तरह की दुर्घटनाओं के बारे में अपने संज्ञान में लाने वाली एक पत्र याचिका पर स्वत: संज्ञान लिया था। शीर्ष अदालत ने अधिकारियों से यह भी कहा था कि इस आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। उस आदेश में कहा गया था, इस अदालत के संज्ञान में लाया गया है कि कई मामलों में बच्चे बोरवेल और ट्यूबवेल या बेकार कुओं में गिर गए हैं। ये रिपोर्ट विभिन्न राज्यों से आ रही हैं। हमने स्वत: पहल की और शीर्ष अदालत ने 11 फरवरी 2010 को अपने आदेश में कहा था कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए विभिन्न राज्यों को नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने दिए थे अहम निर्देश 
अदालत ने निर्देश दिया था कि सभी ड्रिलिंग एजेंसियों, सरकारी, अर्ध-सरकारी या निजी, का पंजीकरण अनिवार्य होना चाहिए। कुएं के पास निर्माण के समय निम्नलिखित विवरण के साथ एक साइनबोर्ड का निर्माण: (ए) कुएं के निर्माण या पुनर्वास के समय ड्रिलिंग एजेंसी का पूरा पता, (बी) उपयोगकर्ता एजेंसी या मालिक का पूरा पता होना चाहिए। 


3 फरवरी, 2020 को खुले हुए बोरवेल और ट्यूबवेल में बच्चों के गिरने के मामलों के साथ शीर्ष अदालत ने अधिवक्ता जी एस मणि द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की थी, जिन्होंने इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने में विफल रहने के लिए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने अपने 2010 के आदेश के अनुपालन पर केंद्र और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत की वेबसाइट के अनुसार रिट याचिका को दो साल से अधिक के अंतराल के बाद 13 जुलाई को सूचीबद्ध किया जाना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed