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आयुष्मान भारत: सरकारी की बजाय प्राइवेट अस्पतालों को तरजीह दे रहे लोग

Thu, 01 Nov 2018 07:05 PM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली
हरेन्द्र, नई दिल्ली Updated Thu, 01 Nov 2018 07:05 PM IST
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aayushman bharat: People preferring private hospitals instead of government
Ayushman bharat
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को लागू हुए एक माह से ज्यादा का समय बीच चुका है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर लाभार्थी सरकारी अस्पतालों की बजाय प्राइवेट अस्पतालों को तरजीह दे रहे हैं। योजना के तहत अब तक दो-तिहाई सर्जरी और इलाज अकेले प्राइवेट अस्पतालों में ही किए गए।
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आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा योजना को क्रियान्वित करने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी को 22 सितंबर, 2018 से लेकर 26 अक्टूबर, 2018 तक मिले आंकड़ों के मुताबिक इस बीच 1,27,833 इलाज और सर्जरी हुईं, जिनके 33 फीसदी क्लेम सरकारी अस्पतालों और 76 फीसदी दावों का भुगतान प्राइवेट अस्पतालों के खातों में गया।
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निजी अस्पतालों को ज्यादा क्लेम दिए जाने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के सीईओ डॉ. इंदुभूषण का कहना है कि प्रधानमंत्री की यह महत्वाकांक्षी योजना बेहतरीन तरीके से काम कर रही है और वे इससे पूर्णतया संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों की दशा सुधारने के लिए सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है। इसमें भविष्य में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत सरकारी अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने जैसे प्रस्ताव भी शामिल हैं।
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आकड़े कहते हैं कि अस्पताल में भर्ती होने वाले 1,27,833 लाभार्थियों में से 58 फीसदी पुरुष और 42 फीसदी महिलाएं रहीं। जबकि सबसे ज्यादा क्लेम ओरल सर्जरी, जनरल मेडिसिन, नेत्रों से संबंधित, प्रसूति एवं स्त्री रोग और जनरल सर्जरी के दिए गए। योजना में 14 हजार 129 अस्पताल शामिल हो चुके हैं, जिनमें 6,340 सरकारी अस्पताल (45 प्रतिशत) और 7,789 निजी अस्पताल (55 प्रतिशत) शामिल हैं। वहीं लागू होने के एक माह के बाद सबसे टॉप पर आने वाले राज्यों में गुजरात, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पश्चिमी बंगाल शामिल हैं।

आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में 88 प्रतिशत, गोवा में 84 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 70 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 77 प्रतिशत और गुजरात में 77 फीसदी लाभर्थियों ने निजी अस्पतालों में इलाज कराया। केवल बिहार, दादर नगर हवेली, दमन और दीव, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा ही ऐसे राज्य रहे, जहां के 100 प्रतिशत लाभार्थियों ने सरकार अस्पतालों में ही जाना मुनासिब समझा।

दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी बीमा योजना को लागू करने से पहले दावे किए जा रहे थे कि इसके लागू होने के बाद सरकारी अस्पतालों को अतिरिक्त पैसा मिलेगा, जिससे उनके हालात सुधारने में मदद मिलेगी और साथ ही वे अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे।


10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए का हेल्थ इंश्योरेंस देने वाली आयुष्मान भारत योजना को 23 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने लांच किया था। अभी तक इस योजना में दिल्ली, तेलंगाना और उड़ीसा को छोड़ 33 राज्य शामिल हो चुके हैं, वहीं केरल ने हाल ही में योजना को लागू करने को लेकर एमओयू साइन किया है।
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