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आरे विरोधियों के खिलाफ दर्ज मामले एक महीने में होंगे वापस, मंत्री सातेज पाटिल ने किया एलान

Thu, 27 Feb 2020 07:40 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: अनवर अंसारी Updated Thu, 27 Feb 2020 07:40 PM IST
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Aarey Forest Case Satej Patil announced Cases against Aarey opponents will be back in a month
Aarey Protest - फोटो : ANI

महाराष्ट्र में आरे मेट्रो शेड को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सरकार के मंत्री सातेज पाटिल ने गुरुवार को कहा कि दर्ज मामलों को एक महीने के भीतर वापस ले लिया जाएगा। महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री ने यहां कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ मुलाकात के बाद यह बात कही। 

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पाटिल ने कहा कि मामलों को वापस लेने के लिए एक उचित प्रक्रिया है। मैंने उन लोगों से इस मुद्दे पर बातचीत की है। मैंने उन्हें आश्वस्त किया है कि महा विकास अघाड़ी की ओर से जो हमने वादा किया है उसे पूरा किया जाएगा।
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दक्षिण मुंबई स्थित विधानसभा भवन के बाहर उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि आने वाले महीनों में इन मामलों को वापस लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले साल अक्टूबर में हरित कार्यकर्ताओं समेत कुछ प्रदर्शनकारियों के विरोध करने के बाद उनके खिलाफ मुंबई पुलिस ने मामले दर्ज किए थे। ये प्रदर्शनकारी गोरेगांव के हरित क्षेत्र आरे में कार शेड के लिए पेड़ों की कटाई के विरोध में सड़कों पर उतरे थे।
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शिवसेना की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार ने पिछले साल नवंबर में सत्ता संभालने के बाद मामले वापस लिए जाने की घोषणा की थी। ये मामले तब दर्ज किए गए थे जब वहां भाजपा सत्ता में थी।

वहीं, इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी एलान किया था कि पेड़ काटने का विरोध जताने पर पर्यावरणविदों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि अधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई के लिए कहा गया है। 

सरकार में आने से पहले भी शिव सेना ने इस प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध किया था। उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे ने इस मामले पर भाजपा से अलग राय रखी थी जबकि उस समय दोनों गठबंधन में थे। 


उद्धव ठाकरे ने अपनी सरकार की दूसरी बैठक के बाद ही इस प्रोजेक्ट का काम रोकने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि मेट्रो के काम पर कोई रोक नहीं है, लेकिन सरकार के अगले आदेश तक आरे में एक भी पत्ता नहीं कटेगा। उनके इस फैसले पर पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी खुशी जताई थी।

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