फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   A study says that if one person gets infected with coronavirus does not whole family will get infected

'एक व्यक्ति के कोरोना संक्रमित होने से पूरे परिवार के बीमार होने की आशंका नहीं'

Sun, 02 Aug 2020 08:05 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, अहमदाबाद
पीटीआई, अहमदाबाद Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 02 Aug 2020 08:05 PM IST
सार

परिवार के किसी एक सदस्य के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद घर के सभी सदस्यों का उससे ग्रस्त होना तय मान लेना सही नहीं है। गांधीनगर स्थित भारतीय जनस्वास्थ्य संस्थान के अध्ययन में सामने आया है कि परिवार में किसी एक सदस्य के कोविड-19 संक्रमित होने के बावजूद घर में रहने वाले 80-90 फीसद सदस्यों को यह बीमारी नहीं होती है।

विज्ञापन
A study says that if one person gets infected with coronavirus does not whole family will get infected
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार संस्थान के निदेशक दिलीप मावलंकर ने रविवार को बताया कि इस अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि परिवार के अन्य सदस्यों में शायद इस बीमारी के प्रति किसी प्रकार की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई हो।

विज्ञापन


उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, 'यह धारणा कि सभी के कोरोना की चपेट में आने का खतरा है, सही नहीं हो सकती। कहा जाता है कि महज कुछ मिनट के लिए कोरोना वायरस के संपर्क आने से हम संक्रमित हो जाएंगे। यदि ऐसा होता तो क्यों उसी परिवार के सारे लोगों में कोविड-19 नहीं होता?'
विज्ञापन


मावलंकर ने  कहा, 'कुछ ऐसे परिवार हैं जहां सभी सदस्य संक्रमित हैं, लेकिन ऐसे परिवार बहुसंख्य नहीं हैं। ऐसे भी परिवार हैं जहां एक व्यक्ति की कोविड-19 से मौत हो गई लेकिन कोई अन्य सदस्य संक्रमित नहीं हुए।'
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि यह अध्ययन कोविड-19 के पारिवारिक संक्रमण के विषय पर वैश्विक रूप से प्रकाशित 13 शोधपत्रों की समीक्षा पर आधारित है। यह दर्शाता है कि परिवार में किसी एक सदस्य के कोविड-19 संक्रमित हो जाने के बाद उसके 80-90 फीसद सदस्यों को यह बीमारी नहीं हुई। इससे संकेत मिलता है कि परिवार के अन्य सदस्यों में शायद इस बीमारी के प्रति किसी प्रकार की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई हो।

‘घरेलू संपर्क में कोविड-19 की माध्यमिक मारक दर : व्यवस्थित समीक्षा’ नामक इस अध्ययन में समीक्षा से गुजरे 13 में से ज्यादातर शोधपत्रों से पता चलता है कि परिवार में एक सदस्य से दूसरे सदस्य में संक्रमण की दर (माध्यमिक संक्रमण दर) महज 10 से 15 फीसद है। उन्होंने कहा कि परिवार के वयस्क सदस्य से बच्चे में संक्रमण कम होता है जबकि वयस्क से बुजुर्गों में ज्यादा होता है और यह भी 15-20 फीसद है।

संस्थान के संकाय सदस्य कोमल शाह और दीपक सक्सेना के साथ मिलकर संयुक्त रूप से यह अध्ययन लिखने वाले मावलंकर ने कहा कि केवल तीन ऐसे शोधपत्र थे जो 30 फीसद या उससे अधिक की माध्यमिक संक्रमण दर दर्शाते हैं। यह अध्ययन हाल ही में ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड के त्रैमासिक जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।

मावलंकर ने कहा कि इन शोधपत्रों में शामिल भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के शोधपत्र में परिवार में एक सदस्य से करीब आठ फीसद सदस्यों में संक्रमण फैलने की बात कही गई है। उन्होंने कहा, 'कुछ अध्ययनों में पति और पत्नी के बीच संक्रमण का विस्तार से अध्ययन किया गया है जो 45 से 65 फीसद दर्शाया गया है। जिन मामलों में बिस्तर साझा किया गया, वहां भी संक्रमण शत प्रतिशत नहीं है।'


उन्होंने कहा, 'विभिन्न लोगों में इस वायरस के प्रति अलग-अलग प्रतिरोधक क्षमता होती है। परिवार में हम एक दूसरे से दूरी नहीं रखते, न ही मास्क लगाते हैं। लक्षण सामने आने से लेकर जांच तक करीब तीन से पांच दिन का अंतर होता है जिसका मतलब है कि परिवार के सभी सदस्य इस वायरस के संपर्क में आए। लेकिन तब भी सभी संक्रमित नहीं होते।'

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed