CISF: नियुक्ति के लिए चक्कर काट रहे 69 भावी सहायक कमांडेंट, बल में करियर शुरू होने से पहले ही लगा झटका
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत 'सीआईएसएफ' के 69 भावी सहायक कमांडेंट 'एसी', जिनका चयन यूपीएससी के द्वारा हुआ है, उन्हें तीसरे साल भी ज्वाइनिंग नहीं मिल सकी है। इन्हीं के साथ यूपीएससी की परीक्षा पास करने वाले युवाओं को दूसरे बलों में न केवल नियुक्ति पत्र मिल गया, बल्कि कुछ दिन बाद उनकी ट्रेनिंग भी खत्म होने वाली है। ऐसी स्थिति में दूसरे बलों के 'सहायक कमांडेंट', सीआईएसएफ के 69 'एसी' से करियर में सदैव आगे ही रहेंगे। आर्थिक फायदे के अलावा उन्हें जल्द प्रमोशन का भी लाभ मिलेगा। सीआईएसएफ में नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार कर रहे कई उम्मीदवार तो अब दूसरी नौकरी तलाशने लगे हैं। ज्यादातर उम्मीदवार तो 25 साल के पार हो गए हैं। सीआईएसएफ और केंद्रीय गृह मंत्रालय के चक्कर काट रहे इन उम्मीदवारों को कहीं से भी कोई सटीक जवाब नहीं मिल रहा।
दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला
18 अगस्त 2020 को 'एसी' भर्ती की अधिसूचना जारी हुई थी। उसके बाद 20 दिसंबर को लिखित परीक्षा आयोजित हुई। आठ फरवरी 2021 में रिजल्ट आया। इस भर्ती के लिए आईटीबीपी को नोडल एजेंसी बनाया गया था। 27 अप्रैल 2022 को इन्हें मालूम पड़ा कि ये सीआईएसएफ में सहायक कमांडेंट बनेंगे। इससे एक दिन पहले 26 अप्रैल 2022 को दिल्ली हाई कोर्ट में केस हो गया। पदोन्नति को लेकर यह केस दिवाकर पांडे व अन्य ने किया था। एसआई से सीधे 'एसी' बनने के लिए जो परीक्षा होती है, उसे भी यूपीएससी द्वारा आयोजित किया जाता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सात अक्तूबर 2022 को भर्ती प्रक्रिया पर स्टे लगा दिया। इस स्टे की जद में एलडीसीई रिक्रूटेड, सीधी भर्ती के जरिए 'एसी' और एसी/जेएओ से डीसी/ईएक्सई बनने वाले भी आ गए। हालांकि जब यह केस फाइल हुआ था, तब सीधी भर्ती से 'एसी' बनने वालों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
यह भी पढ़ें: CAPF: 1000 दिनों में अर्धसैनिक बलों के 436 जवानों ने की खुदकुशी, आखिर ये जांबाज क्यों लगा रहे हैं मौत को गले?
इस मामले की सुनवाई 30 नवंबर 2022 को हुई। 21 दिसंबर 2022 को फाइनल सुनवाई होनी थी, लेकिन संबंधित बल की ओर से कोई जवाब पेश नहीं किया गया। उम्मीदवारों का कहना था कि इस बाबत कोर्ट ने संबंधित बल पर फाइन भी लगाया था। इस बीच सीआईएसएफ ने अपनी वेबसाइट पर यह सूचना डाल दी कि दिवाकर पांडे केस के कारण 'एसी' की भर्ती प्रक्रिया लंबित है। तीन फरवरी को दोबारा से केस की सुनवाई हुई। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सभी सीएपीएफ में भर्ती पर लगी रोक हटा दी गई है। यहां पर भी एक समस्या उत्पन्न हो गई। हाई कोर्ट के फैसले की व्याख्या को लेकर मामला फंस गया। इसके चलते 21 फरवरी 2023 दोबारा सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने कहा, तीन फरवरी वाला आदेश ही माना जाएगा। भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।
आरटीआई भी हुई फेल
सीआईएसएफ में सहायक कमांडेंट के लिए चयनित उम्मीदवारों का कहना है कि वे कई बार दिल्ली के चक्कर काट चुके हैं। बल मुख्यालय द्वारा कहा जाता है कि फाइल एमएचए में है। वहां के कई अफसरों को ईमेल की गई है, मगर कोई जवाब नहीं मिला। सीआईएसएफ में भी संबंधित विभाग को लिखा गया है। आरटीआई भी लगाई है, लेकिन उसमें भी यह जानकारी देने से मना कर दिया गया। कहीं से यह भी पता नहीं चल रहा है कि 69 उम्मीदवारों को कब नियुक्ति पत्र मिलेगा और कब ट्रेनिंग शुरू होगी। इसी भर्ती में जिन उम्मीदवारों को बीएसएफ, आईटीबीपी व एसएसबी अलॉट हुई है, वहां ऑफर ऑफ अपॉइंटमेंट भी जारी हो गया और गत वर्ष उनकी ट्रेनिंग भी शुरू करा दी गई। एलडीसीई बैच '2021', जिनकी अधिसूचना बाद में आई थी, उनका रिजल्ट 31 जनवरी को घोषित किया गया था। गत वर्ष उनकी ज्वाइनिंग के बाद ट्रेनिंग भी पूरी हो गई। वे पिछले साल सितंबर में अपनी यूनिट में भी पहुंच गए हैं। अब वे सीधी भर्ती वाले 'एसी' से सीनियर हो गए हैं।
यह भी पढ़ें: CAPF: कानूनी लड़ाई के लिए मजबूर अर्धसैनिक बलों के कैडर अफसर, प्रमोशन से दूर अफसरों पर क्यों पड़ रही दोहरी मार
उम्मीदवारों ने बताया, इस बाबत कई राज्यों में जन प्रतिनिधियों से भी संपर्क किया गया है। अगस्त 2020 में भर्ती निकली थी, लेकिन ज्वाइनिंग अभी तक नहीं मिल सकी है। जो युवा तब 24 साल के थे, अब वे 27 के पार जाने वाले हैं। कुछ उम्मीदवारों ने मात्र 22 साल की आयु में परीक्षा दी थी, लेकिन अब नियुक्ति का इंतजार करते-करते वे भी 25 के पार जा रहे हैं। उम्मीदवारों का कहना हैं, जब भी पूछा जाता है तो फाइल एमएचए में होने की बात कह देते हैं। कर्नाटक, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों से केवल यह पूछने के लिए उन्हें दिल्ली आना पड़ रहा है कि उनकी ज्वाइनिंग कब होगी। ज्वाइनिंग में देरी से उनका सर्विस पीरियड कम हो रहा है। कुछ उम्मीदवारों ने अपना खर्च निकालने के लिए ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया है। कई उम्मीदवार पुलिस व अन्य संगठनों में जॉब तलाशने लगे हैं। इस बाबत सीआईएसएफ में आईजी 'पर्सनल' प्रतीक मोहंती से उनके दफ्तर में बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी।