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अमेरिका के मुकाबले 60 फीसदी कम खर्चीला है भारत से अंतरिक्ष में उपग्रह भेजना

Mon, 17 Sep 2018 01:59 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 17 Sep 2018 01:59 AM IST
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60 percent less expensive than America, sending satellite from India to space
satellite
इसरो ने रविवार रात पीएसएलवी सी-42 की मदद से दो ब्रिटिश उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे। इसके साथ किसी भारतीय उपग्रह को नहीं भेजा गया। यह इसरो की पूर्ण व्यावसायिक उड़ान है। इसी के साथ भारत उन देशों की कतार में शामिल हो गया, जो अंतरिक्ष में विदेशी उपग्रह भेजते हैं। अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने वाले देशों के मुकाबले भारत से उपग्रह भेजना कम खर्चीला है। अमेरिका के मुकाबले भारत से उपग्रह भेजना 60 फीसदी सस्ता है। 
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भारत से विदेशी उपग्रह भेजना आसान क्योंकि...

-भारत से विदेशी उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजने का खर्च कम आता है। यहां अन्य देशों के मुकाबले श्रम सस्ता है।
-अमेरिका के मुकाबले भारत से उपग्रह भेजने का खर्च 60 फीसदी तक कम है। मोटे तौर पर एक तिहाई खर्च में यहां से विदेशी उपग्रह को भेजा सकता है।
-सरकारी उपग्रह एजेंसी के रॉकेट से विदेशी व्यावसायिक उपग्रह भेजने की प्रक्रिया काफी जटिल है। इसमें नियम, समझौते और कानून जैसी कई अड़चनें हैं।

भारत की चीन से होड़

चीन भी सस्ते दर पर अंतरिक्ष में उपग्रहों को भेजने का बड़ा बाजार है। इस कारण भारत को चीन से होड़ लेनी पड़ रही है। भारत इस बाजार में चीन को तभी चुनौती दे पाएगा, जब वह बड़े-बड़े उपग्रहों को भेजेगा। बड़े उपग्रहों को भेजने से ज्यादा पैसा आता है।
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-2.5 गुना अधिक खर्च करता है चीन अंतरिक्ष अभियान पर भारत के मुकाबले
-04 गुना अधिक है भारत की तुलना में चीन की अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने की क्षमता

-8500 अरब रुपये हैं भारत का अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने का कारोबार, जो दुनिया के मुकाबले महज 7.2 फीसदी है।
-28 देशों के 237 उपग्रहों को अब तक अंतरिक्ष में भेज चुका है भारत
-59 उपग्रहों को अगले तीन साल अंतरिक्ष में भेजने की है योजना

अंतरिक्ष प्रोग्राम में भारत का निवेश

पिछले एक दशक में भारत ने अंतरिक्ष प्रोग्राम को लेकर बड़ा निवेश किया है। औसतन हर साल करीब 65 से 70 अरब रुपये अंतरिक्ष से जुड़े शोध पर खर्च किए गए हैं। अगर 2022 का अंतरिक्ष में मानवयान भेजने का भारत का मिशन सफल होता है तो उसके बाद इसरो चंद्रमा और सूर्य के मिशन पर जुट जाएगा। भारत के सोलर मिशन आदित्य-एल1 के जरिये इसरो को उम्मीद है कि सौर आंधी और ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा योगदान संभव हो सकेगा।
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ब्रिट्रिश उपग्रहों से बढ़ेगी धरती पर देखने की क्षमता

-नोवासार: एक तकनीक प्रदर्शन उपग्रह मिशन है। इसमें कम लागत वाला एस बैंड सिंथेटिक रडार भेजा जाएगा। यह वन मानचित्रण, भूमि उपयोग और बर्फ की परतों के साथ बाढ़ और आपदा की भी निगरानी करेगा।

-एस 1-4: यह भू-अवलोकन उपग्रह है। इसका उपयोग संसाधनों, पर्यावरण निगरानी और शहरी सर्वेक्षण के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक मीटर से भी छोटी वस्तु को अंतरिक्ष से देख सकता है।
 
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