फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   40 parcent of plastic garbage becoming a problem for water and land

40 फीसदी प्लास्टिक कचरा बन रहा जल-जमीन के लिये मुसीबत

Sun, 05 Aug 2018 01:36 PM IST
भाषा/ नई दिल्ली
भाषा/ नई दिल्ली Updated Sun, 05 Aug 2018 01:36 PM IST
विज्ञापन
40 parcent of plastic garbage becoming a problem for water and land
plastic
भारत में प्लास्टिक कचरे का 60 प्रतिशत हिस्सा ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से पहले रिसाइकिल कर शोधित हो पा रहा है। शेष 40 प्रतिशत हिस्सा जलाशयों और जमीन को दूषित कर रहा है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संसद में पेश प्लास्टिक कचरे के शोधन से जुड़े आंकड़ों में यह बात सामने आयी है। पर्यावरण राज्य मंत्री महेश शर्मा ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया ‘‘देश में प्लास्टिक कचरे का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है।’’ 
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि इस बाबत हाल ही में देश के उन 60 बड़े शहरों में अध्ययन कराया गया जिनसे सर्वाधिक प्लास्टिक कचरा निकलता है। इसमें पता चला है कि इन शहरों से प्रतिदिन लगभग 4,059 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। जबकि पूरे देश से प्रतिदिन निकलने वाले प्लास्टिक कचरे की मात्रा 25,940 टन प्रतिदिन है।
विज्ञापन


इसमें से 15,384 टन (60 प्रतिशत) कचरे का प्रतिदिन एकत्रण और पुनर्चक्रण हो पाता है। शेष 40 प्लास्टिक कचरे का अधिकांश हिस्सा जो एकत्र नहीं हो पाता है, वह नाले नालियों सहित अन्य माध्यम से जलाशयों तक पहुंच जाता है और जो कचरा एकत्र हो जाता है, वह गैरशोधित रूप में डंपिंग ग्राउंड में पड़े रह कर आसापास की जमीन का प्रदूषण बढ़ाता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार शत प्रतिशत निस्तारण, पुनर्चक्रण और शोधन नहीं हो पाने के कारण प्लास्टिक कचरा भविष्य में देश के लिये ‘‘विषैला टाइम बम’’ साबित हो सकता है। इस स्थिति से बचने के लिये किये जा रहे उपायों के बारे में शर्मा ने बताया कि मंत्रालय ने प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम 2016 अधिसूचित कर 50 माइक्रोन से कम आकार के प्लास्टिक कैरी बैग और अन्य उत्पादों पर प्रतिबंध कड़ाई से लागू किये हैं। इन्हें 21 राज्य और संघ शासित क्षेत्र अब तक लागू कर पाये है। 


इसके अलावा सड़क निर्माण, सीमेंट भट्टियों और भवन निर्माण में प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल की नयी तकनीकों को भी सीपीसीबी की मदद से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत शोधित प्लास्टिक कचरे से ईंट बनाकर भवन निर्माण में इस्तेमाल करने और प्लास्टिक कचरे को तरल आरडीएफ में तब्दील कर सड़क निर्माण सहित अन्य विकास योजनाओं में इसका उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed