कोरोना काल में चार आईपीएस क्यों चाहते हैं एक्सटेंशन, पीएमओ में घूम रही हैं फाइलें
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केंद्र सरकार के सूत्र बताते हैं कि इन अधिकारियों की दो माह की एक्सटेंशन फाइल पीएमओ को भेजी गई है। इनमें पहला नाम सीआईएसएफ की आईजी रितु का है। वे मूलत: उड़ीसा कॉडर की हैं। उन्हें केंद्र में सात साल हो गए हैं।
दूसरा नाम सीआरपीएफ के आईजी राजू भार्गव का है। वे गुजरात कॉडर के आईपीएस अधिकारी हैं। इनका कार्यकाल भी सीआरपीएफ में पूरा हो गया है। तीसरे आईपीएस अरूण शर्मा हैं। ये सीआरपीएफ में एडीजी मेडिकल के पद पर हैं।
खास बात, ये भी गुजरात कॉडर से आते हैं। सीआरपीएफ में आने से पहले ये सीबीआई में थे।आलोक वर्मा व राकेश अस्थाना विवाद में इन्हें सीबीआई से बाहर कर सीआरपीएफ में लगाया गया था। हालांकि इन्हें गुवाहाटी में नॉर्थ-ईस्ट जोन की कमान सौंपी गई थी, दिल्ली में कथित सुविधाएं लेने के लिए इन्हें मेडिकल विंग की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी गई।
उनसे पहले जावेद अख्तर यहां पर तैनात थे, तो उन्होंने भी एडीजी मेडिकल की पोस्ट अतिरिक्त जिम्मेदारी के तौर पर ले ली। इससे उनका भी नियमित तौर पर दिल्ली आना जाना होता रहा।
इनसे पहले दिल्ली के मौजूद सीपी एसएन श्रीवास्तव जम्मू-कश्मीर जोन में जब एडीजी थे तो उन्होंने भी एडीजी मेडिकल का कार्यभार ले लिया। इस वजह से वे दिल्ली में बैठने लगे। बताया जाता है कि इस बल में एडीजी मेडिकल का कोई पद नहीं है, लेकिन चहेते आईपीएस को फायदा पहुंचाने के लिए उन्हें इस पद पर बैठा दिया जाता है।
चौथे अफसर, एनआईए में आईजी आलोक मित्तल हैं। वे हरियाणा कॉडर के आईपीएस हैं। उनका भी डेपुटेशन पूरा हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि नियमानुसार, इन चारों आईपीएस को अब अपने मूल कॉडर में जाना था, लेकिन इन्होंने कोरोना के चलते अपनी एक्सटेंशन फाइल आगे बढ़ा दी।