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अब तक खुले 22 करोड़ जन धन खाते, लेकिन बैंकों के लिए बने मुसीबत

Thu, 26 May 2016 12:09 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 26 May 2016 12:09 PM IST
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22 crore jan dhan account opened by modi government
मोदी सरकार ने खोले 22 करोड़ जन धन अकाउंट - फोटो : Getty

मोदी सरकार ने अब तक देश में करीब 22 करोड़ जन धन बैंक अकाउंट खोले हैं। यह अकाउंट लगभग डेढ़ साल के समयकाल में खोले गए हैं। आपको बता दें कि जन धन अकाउंट खाताधारकों में अधिकतर गरीब और ग्रामीण इलाकों के लोग हैं।

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जन धन अकाउंट खोले जाने का मकसद लोगों को बैंक से जोड़ना, सेविंग के लिए प्रेरित करना, लोन की प्रक्रिया को आसान बनाना और विभिन्न प्रकार की सब्सिडी सीधे अकाउंट में ट्रांसफर करना था। अब सवाल ये उठता है कि अब मोदी सरकार के दो साल हो जाने पर इन अकाउंट्स की क्या हालत है और यह योजना कैसा काम कर रही है?
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अप्रैल 2016 तक के आंकड़ों के अनुसार देश भर में खुले 22 करोड़ जन धन खातों में कुल मिलाकर 37,617 करोड़ रुपए हैं। इस तरह हर खाते में औसतन 1700 रुपए हैं। हालांकि, यह रकम बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन गरीब लोगों की हालत के हिसाब से वह इतना ही पैसा अपने अकाउंट में रख पाए हैं।
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इंटरनेशनल फाइनेंशियल कंसल्टेंसी माइक्रोसेव के एक सर्वे में यह सामने आया है कि 33 फीसदी जन धन अकाउंट सेकेंड अकाउंट हैं। इसका मतलब है कि जन धन खाताधारकों में से 33 फीसदी लोगों को दूसरे बैंक अकाउंट भी हैं। यह कारण है कि इस समय 28 फीसदी जन धन अकाउंट ऐसे हैं, जिसमें कोई ट्रांजैक्शन नहीं होती है।

कई जगह खाते बने सिरदर्द

22 crore jan dhan account opened by modi government
28 फीसदी खातों में नहीं होती कोई ट्रांजैक्शन - फोटो : PTI

वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जन धन योजना को उनके दो साल के कार्यकाल एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘जन धन’ योजना बैंकों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दबाव में जीरो बैलेंस पर खुले इन खातों को एक्टिव रखने के लिए बैंकों की तरफ से खुद पैसे डाले जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बैंक के अधिकारियों का तो यह भी कहना है कि बाकायदा हर खाता धारक के नाम एक - एक रुपये के वाउचर काटे गए हैं। इस खर्च को रोजमर्रा के चाय-पानी के खर्च में समायोजित किया जा रहा है।

बैंक अधिकारियों का कहना है, ‘ जन धन योजना के तहत खाते तो खोले गए, लेकिन एक भी पैसा जमा नहीं हुआ। खातों को एक्टिव रखने का दबाव बैंकों पर इस कदर है कि अपनी जेब से पैसे डालकर जीरो बैलेंस का ठप्पा हटाया जा रहा है।’

दरअसल, दो लाख रुपये की बीमा और पांच हजार रुपये के ओवर ड्राफ्ट के लालच में पूरे देश में 11 करोड़ से ज्यादा जन धन खाते खुल चुके हैं। इनमें से चार करोड़ से ज्यादा खातों में एक भी पैसे नहीं हैं।

जीरो बैलेंस होने की वजह से उन खातों को न तो बीमा का लाभ मिल रहा है और न ही ओवर ड्राफ्ट का। ऐसे खातों को सक्रिय करने के लिए रिजर्व बैंक का का दबाव है। दबाव के आगे बैंक भी मजबूर हैं। एक बैंक अधिकारी के मुताबिक खाता खुलवाने के बाद खाताधारक अब तक नहीं आए हैं।

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