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चोटी कटना, ब्लू वेल, मोमो चैलेंज: डर और दहशत से भरा रहा ये साल 

Sat, 22 Dec 2018 01:32 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shilpa Thakur Updated Sat, 22 Dec 2018 01:32 PM IST
सार
  • इन घटनाओं से दहशत भरा रहा ये साल
  • ब्लू वेल और मोमो चैलेंज ने ली कई जान
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2018 is a year of fear, Braid chopping, momo challenge and blue whale 
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

विस्तार

कुछ ही दिनों में साल 2018 खत्म हो जाएगा। इस साल हुई अजीबों गरीब घटनाएं लोग शायद ही कभी भूल पाएंगे। चाहे फिर बार मोमो चैलेंज की करें या फिर ब्लू वेल गेम और चोटी कटने वाली वारदातों की। आज 2018 में हुई ऐसी ही घटनाओं के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। इन घटनाओं में कुछ मोबाइल गेम भी हैं, जिन्होंने बहुत से घरों के चिराग बुझा दिए। और परिवारों को बहुत सी चिताओं ने घेर लिया। चलिए शुरुआत करते हैं मोमो चैलेंज से-

मोमो चैलेंज

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में स्थित कुर्सेओंग में एक 18 साल के लड़के ने फंदे से लटककर अपनी जान दे दी। जिस कमरे में उसने ये सब किया वहां की दीवार पर कुछ शब्द भी लिखे मिले जैसे 'इल्लुमिनाति' (खुद को प्रबुद्ध होने का दावा करने वाला व्यक्ति), 'हैंग्ड मैन' (फांसी पर लटका आदमी) और 'डैविल्स वन आई' (शैतान की एक आंख)।



इसके बाद लड़के के माता पिता ने इस बात की शिकायत गुरुवार को पुलिस में की। पुलिस का कहना था कि वह इस बात की जांच करेंगे कि कहीं वो किसी ऑनलाइन गेम का तो शिकार नहीं हुआ। जांच करने पर पता चला कि वो मोमो चैलेंज का शिकार हुआ था। वहीं कई किशोरों ने ब्लू वेल गेम के चलते भी अपनी जान दी। लेकिन फिर भी बच्चे तक गेम का लिंक कैसे पहुंचा ये जानने में पुलिस नाकाम रही।

12वीं में पढ़ने वाला मनीष सारकी कॉमर्स का छात्र था। वह 20 अगस्त की रात अपने घर से कुछ दूरी पर बने एक लाइवस्टॉक शेड में लटका हुआ मिला। वह 20 अगस्त को ही लापता हुआ था। दीवार पर मेटल शब्द और एक लड़की का नाम भी लिखा मिला। इन सबसे ऐसा लग रहा था कि उसने खुद को ऑनलाइन गेम से मिल रहे निर्देशों के मुताबिक मारा।

कक्षा में भी कई बच्चे खेलते थे मोमो गेम

सारकी के कजिन ने बताया कि उसने फंदे पर लटके हुए एक आदमी की फोटो देखी थी जिसे सारकी ने अपने फोन के मोमो ऐप में बनाया था। वही गेम उसकी आत्महत्या का कारण है। वहीं उसके एक दोस्त ने बताया कि वह अपने फोन को जब भी इस्तेमाल करता था तो दूसरों से छिपाता था।

लड़के की अध्यापिका का कहना है कि उसी की तरह उसके कई दोस्त भी मोमो गेम खेलते थे लेकिन बाद में उन्होंने इसे खुद ही खेलना बंद कर दिया। सारकी की मां का कहना है, 'वह काफी मेहनती और सीधा-साधा लड़का था। वह ऑनलाइन गेम खेलता था। मुझे पूरा विश्वास है कि मोमो चैलेंज ने ही उसे हमसे छीना है।'

इससे पहले अजमेर में भी 31 जुलाई को 15 साल की छवि शर्मा ने अपनी जान ले ली थी। उसकी मौत के पीछे की वजह भी मोमो चैलेंज बताई गई।

'हाई, आई एम मोमो, लेट अस प्ले अ गेम'

इसके बाद पश्चिम बंगाल के कुरसेओंग से एक और मौत की खबर आई। इस गेम ने इस बार 26 साल की अदिति गोयल की जान ले ली। पश्चिम बंगाल में सारकी की मौत के बाद ये दूसरी घटना थी। इसके बाद से लोग काफी डर गए। पूरे इलाके में लोगों ने अपने बच्चों से फोन छीन लिए। स्थानीय लोगों में फोन को लेकर काफी डर बढ़ गया। जब पुलिस ने लोगों से पूछताछ की तो गेम से जुड़ी कई और बातों का पता चला। इलाके में रहने वाले करीब 20 लोगों ने ये दावा किया कि उन्हें इस गेम की जानकारी थी। किसी को दोस्त, किसी को रिश्तेदार तो किसी को अपने पड़ोसी से इस बारे में पता चला। उन्होंने कई और लोगों के बारे में भी बताया जो इस तरह के गेम खेलते हैं।

इन लोगों ने इस गेम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा गेम है जो खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए कहता है। इसकी शुरुआत छोटी चोटों से होती है और आखिर में ये खेलने वाले को आत्महत्या करने पर मजबूर कर देता है। लोगों का कहना है कि उन्हें व्हाट्सएप मैसेज, एप आदि से इस गेम के बारे में पता चला।

तो कुछ लोगों का ये भी कहना है कि उन्हें व्हाट्यएप पर एक मैसेज आया जिसमें एक तस्वीर थी। इसमें खेलने वाले को कई तरह के टास्क दिए जाते थे। और पूरा करने वाले को विजेता माना जाता था। टास्कों के बढ़ते बढ़ते खेलने वाला का खुद को नुकसान पहुंचाना भी बढ़ता जाता और आखिर में बात आत्महत्या तक आ जाती।

चोटी कटने की घटना

चोटी कटना
चोटी कटना - फोटो : amar ujala

ये डर था चोटी से जुड़ा हुआ और इसकी शुरुआत हुई थी जून के महीने में। राजस्थान में रहने वाली एक लड़की ने दावा किया कि जब वह सो रही थी तो किसी ने उसकी चोटी काट ली। इसके बाद राजस्थान की दर्जनों महिलाओं ने भी यही दावा किया कि जब वह सो रही थीं तो किसी ने उनकी चोटी काट ली। कुछ ही महीनों में ये घटना पूरे उत्तर भारत में फैल गई। जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली। नवंबर तक ऐसे करीब 200 मामले सामने आए।

कई महिलाओं ने दावा किया कि चोटी कटने से पहले जब वह होश में थीं को उन्हें तांत्रिक, चुड़ैल और बिल्ली दिखाई दी। कई महिलाओं ने जब अपनी चोटी कटी देखीं तो उन्होंने इसकी शिकायत भी की। पुलिस ने मामले की काफी जांच की लेकिन हैरानी की बात थी कि एक भी घटना में पुलिस के हाथों आरोपी नहीं लगे।  

जब इस घटना ने ली लोगों की जान

अगस्त में आगरा में भीड़ ने एक महिला की जान इसलिए ले ली क्योंकि उन्हें लगा कि वह चोटी काटने वाली है। इसके बाद अक्तूबर में अनंतनाग में भी एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान लोगों ने इसी वजह से ली। 

ब्लू वेल गेम

ब्लू व्हेल
ब्लू व्हेल - फोटो : social media

2018 में सोशल मीडिया पर वायरल हुए चैलेंज में से एक था ब्लू वेल चैलेंज। जुलाई में इस गेम ने दो स्कूली लड़कों जान ले ली। इस गेम की  शुरुआत हुई थी रूस से। इसके क्रिएटर खुद लोगों को ढूंढते हैं और खेलने के लिए बोलते हैं। इस गेम को न तो डाउनलोड किया जा सकता है और न ही इसका कोई ऐप है। इसमें ऑनलाइन एडमिनिस्ट्रेटर खेलने वाले को 50 दिनों का चैलेंज देता है। हर टास्क पूरा करने के बाद उसे साबित करने के लिए खेलने वाले को एक तस्वीर भेजनी होती है। शुरुआत में यह ज्यादा खतरनाक नहीं होता लेकिन धीरे धीरे खतरनाक होता जाता है और प्लेयर खुद को नुकसान पहुंचाने लगता है।

इसमें प्लेयर को समाज से दूर रहने के अलावा, रात को खेलना होता है, दोस्त से बातचीत बंद करनी पड़ती है, खुद का हाथ ब्लेड से काटना होता और आखिरी लेवल में सुसाइड करना होता है। इस गेम का शिकार दुनिया भर में बहुत से लोग हुए हैं। खास तौर पर बच्चे। कई लोगों ने इसे खेलने के दौरान खुद को नुकसान पहुंचाया है तो कई ने सुसाइड भी किया है। इस चैलेंज से लोगों को बचाने के लिए पुलिस ने भी काफी प्रयास किए थे।

साल 2017 तक केवल भारत से ही इस गेम के कारण खुदकुशी के 150 मामले सामने आए। ये घटनाएं दिल्ली, पश्चिम बंगाल, इंदौर, सोलापुर और देहरादून से सामने आईं। ऐसी घटनाओं के बाद इससे संबंधित कई वेबसाइट्स को ब्लॉक किया गया, निर्देश जारी किए गए और कई स्कूलों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध भी लगाया गया। 

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