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Nanded Blast: निचली अदालत ने सभी नौ आरोपियों को बरी किया, धमाके के 18 साल बाद आया फैसला
Sat, 04 Jan 2025 05:22 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 04 Jan 2025 05:22 PM IST
सार
2006 में अप्रैल के महीने में नांदेड़ शहर के एक घर में हुए बम विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में कुल 12 लोगों पर केस दर्ज किया था। अब इस मामले में 18 साल बाद फैसला आया है, जिसके तहत सभी आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले की एक अदालत ने साल 2006 में हुए बम विस्फोट के मामले में सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है, इसमें फिलहाल सिर्फ नौ लोग जिवित हैं। 2006 में अप्रैल के महीने में नांदेड़ शहर के एक घर में हुए बम विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हो गए थे। जिला और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सी वी मराठे ने शनिवार को शेष आरोपियों को बरी कर दिया। नांदेड़ शहर में कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता लक्ष्मण राजकोंडवार के घर पर 4 और 5 अप्रैल, 2006 की मध्यरात्रि को विस्फोट हुआ था।
सबूत के अभाव में सभी आरोपी किए गए बरी
नांदेड़ बम विस्फोट में पुलिस ने कुल 12 लोगों पर केस दर्ज किया था। अब इस मामले में 18 साल बाद फैसला आया है, जिसके तहत सभी आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया है। वहीं 18 साल बाद इस मामले में बरी हुए 12 आरोपियों में एक आरोपी राकेश धावड़े साल 2008 के मालेगांव विस्फोट केस में भी मुख्य संदिग्ध था। लेकिन दोनों मामलों में राकेश धावड़े की संलिप्तता के बावजूद नांदेड़ की अदालत ने फैसला सुनाते हुए आज कहा कि आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
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पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती
नांदेड़ बम विस्फोट केस में निचली अदालत के इस फैसले ने पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि राजकोंडवार के बेटे नरेश राजकोंडवार और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता हिमांशु पानसे की कथित तौर पर विस्फोटक उपकरण को इकट्ठा करते समय मौत हो गई थी। इस मामले की जांच शुरू में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने की थी और बाद में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया गया था।
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Maharashtra | A Nanded court today acquitted all 12 accused in the Nanded April 2006 blast case. The blast had occurred in a house in which 2 persons were killed.
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Rakesh Dhawade of Malegaon 2008 blasts case and others were accused in the Malegaon 2008 blast case. — ANI (@ANI) January 4, 2025
सबूत के अभाव में सभी आरोपी किए गए बरी
नांदेड़ बम विस्फोट में पुलिस ने कुल 12 लोगों पर केस दर्ज किया था। अब इस मामले में 18 साल बाद फैसला आया है, जिसके तहत सभी आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया है। वहीं 18 साल बाद इस मामले में बरी हुए 12 आरोपियों में एक आरोपी राकेश धावड़े साल 2008 के मालेगांव विस्फोट केस में भी मुख्य संदिग्ध था। लेकिन दोनों मामलों में राकेश धावड़े की संलिप्तता के बावजूद नांदेड़ की अदालत ने फैसला सुनाते हुए आज कहा कि आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
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#WATCH | Pune, Maharashtra: Neeta Dhawade, sister of one of the Accused Rakesh Dhwade says, " I felt really good after hearing this news that all got acquitted but it took so much time. The order has come after 16 years...we suffered a lot due to constant court visits..." https://t.co/NYVpKmae7N pic.twitter.com/86WdiOedvE
— ANI (@ANI) January 4, 2025
पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती
नांदेड़ बम विस्फोट केस में निचली अदालत के इस फैसले ने पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि राजकोंडवार के बेटे नरेश राजकोंडवार और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता हिमांशु पानसे की कथित तौर पर विस्फोटक उपकरण को इकट्ठा करते समय मौत हो गई थी। इस मामले की जांच शुरू में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने की थी और बाद में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया गया था।