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मणिपुर में हिंसा के चार महीने: 175 की मौत, 1100 से ज्यादा घायल; 4,786 घरों को आग के हवाले कर चुके उपद्रवी

Fri, 15 Sep 2023 10:30 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 15 Sep 2023 10:30 AM IST
सार

आईजीपी आईके मुइवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मणिपुर में फिलहाल हालात सही नहीं हैं। हालांकि, हम शांति लाने के लिए हर संभव कार्रवाई कर रहे हैं।

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175 killed, over 1,100 injured in four months of Manipur violence
मणिपुर में शांति के लिए एकजुट हुईं महिलाएं। - फोटो : social media

विस्तार

मणिपुर में चार महीनों से हिंसा जारी है। तीन मई को भड़की जातीय हिंसा में कम से कम 175 लोग मारे जा चुके हैं। वहीं, एक हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 

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हर संभव कार्रवाई कर रहे
आईजीपी (ऑपरेशन्स) आईके मुइवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मणिपुर में फिलहाल हालात सही नहीं हैं। हालांकि, हम शांति लाने के लिए हर संभव कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम राज्य के लोगों को आश्वस्त कर सकते हैं कि पुलिस, केंद्रीय बल और नागरिक प्रशासन सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए चौबीसों घंटे प्रयास कर रहे हैं।

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मुइवा ने कहा कि मई की शुरुआत में जातीय हिंसा भड़की थी। तब से लेकर अबतक कम से कम 175 लोग मारे गए, जिनमें से नौ अभी भी लापता हैं। वहीं, 1,108 घायल हुए, जबकि करीब 32 लोग लापता हैं। 

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अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि लापता हथियारों में से 1,359 आग्नेयास्त्र और 15,050 गोला-बारूद बरामद किए गए हैं। बता दें, हिंसा के दौरान कथित तौर पर दंगाइयों ने पुलिस के बड़ी संख्या में हथियार और गोला-बारूद लूट लिए थे। मुइवा ने बताया कि उपद्रवी कुल 4,786 घरों को आग के हवाले कर चुके हैं। आगजनी के कम से कम 5,172 मामले दर्ज किए गए हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि हिंसा के दौरान 254 चर्चों और 132 मंदिरों को भी तोड़ा गया।

आईजीपी ने कहा कि बिष्णुपुर जिले के फौगाचाओ इखाई से चुराचांदपुर जिले के कांगवई तक सुरक्षा बैरिकेड हटा दिए गए हैं। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि 69 शवों की पहचान हो चुकी है। शेष 96 शवों पर दावा नहीं किया गया है। रिम्स और जेएनआईएमएस में क्रमशः 28 और 26 शव रखे गए हैं, जबकि 42 चुराचांदपुर अस्पताल में हैं। 



जयंत ने कहा कि हिंसा को लेकर अबतक 9,332 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं, 325 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

यह है मामला

गौरतलब है, मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

 

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