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कल फिर खुलेंगे सबरीमाला मंदिर के द्वार, कमांडो समेत 2000 जवान तैनात, पुलिस हाईअलर्ट पर 

Sun, 04 Nov 2018 01:23 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सबरीमाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सबरीमाला Updated Sun, 04 Nov 2018 01:23 AM IST
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2000 soldiers including commandos in Sabarimala temple deployed

केरल का सबरीमाला मंदिर 5 नवंबर को मासिक पूजा के आयोजन के लिए खुलेगा। इस दौरान मंदिर के इर्द-गिर्द सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस को हाईअलर्ट पर रखा गया है। पिछले महीने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यहां हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला। लिहाजा सुरक्षा बढ़ा दी गई है।


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केरल पुलिस के अनुसार 2000 पुलिस कर्मियों के साथ कमांडो और सेना के जवानों को तैनात किया गया है। इनमें 100 महिलाएं हैं। एक 20 सदस्यीय कमांडो दस्ता को शनिधानम, निलाकाल और पंबा में तैनात किया गया है। इधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पीएस श्रीधरण पिल्लैई को मारने की धमकी मिली है। राज्य सरकार ने उनकी भी सुरक्षा बढ़ा दी है।

इसी बीच राज्य सरकार ने भी अपनी बात दोहराई कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नामंजूर नहीं कर सकती। इस फैसले में कहा गया है कि मंदिर में सभी आयु वर्ग (10-50) की महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं। जबकि इससे पहले ऐसा नहीं थी। कोर्ट के फैसले के खिलाफ अयप्पा भक्त और कुछ संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं। बड़े बड़े बयान भी दिए जा रहे हैं। इससे पहले जब मंदिर खुला था तब भी कई महिलाओं ने प्रवेश की कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहीं। किसी भी प्रदर्शनकारी ने उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया। महिलाओं को मंदिर से कुछ दूरी पर ही रोक दिया जाता था। इस मामले में पुलिस भी महिलाओं की मदद नहीं कर पा रही थी।

पथानामथिट्टा के कलेक्टर पीबी नूह का कहना है कि जिला प्रशासन के पास अभी तक किसी महिला की ओर से मंदिर में प्रवेश का आवेदन नहीं आया है। लेकिन अगर ऐसा कुछ होता है तो जरूर उनकी मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसी खबर है कि करीब दो हफ्ते पहले 5 महिला वकीलों ने हाई कोर्ट में संपर्क कर कहा कि वह मंदिर में प्रवेश के लिए सुरक्षा चाहती हैं। शायद इस बार वह प्रवेश कर पाएं लेकिन यह स्पष्ट नहीं है।

बता दें इससे पहले मासिक पूजा के लिए 17 अक्तूबर को मंदिर 5 दिनों के लिए खुला था। इस दौरान काफी हिंसा हुई। महिलाओं को अंदर नहीं जाने दिया। हिंसा से जुड़े 543 मामले दर्ज हुए। इसके अलावा शुक्रवार तक 3701 लोग गिरफ्तार हुए। हिंसा में कई पत्रकार भी घायल हुए। राज्य सरकार का भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां विरोध कर रही हैं। जिसका कारण है राज्य सरकार का सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानना।

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