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बदहाली: सिर्फ एक-एक डॉक्टर के भरोसे 15 हजार स्वास्थ्य केंद्र
Mon, 17 May 2021 05:54 AM IST
Jeet Kumar
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 17 May 2021 05:54 AM IST
सार
- छह राज्यों में गांवों की संख्या सबसे ज्यादा, वहां 20-20 से ज्यादा जिलों में संक्रमण भी 10 फीसदी से अधिक
- गांव-गांव तक पहुंचा कोरोना, दुर्गम पहाड़ी गांव भी नहीं छूटे
- ग्रामीण क्षेत्रों में फैले वायरस के वेरिएंट की अब तक पहचान नहीं
- ज्यादातर तहसीलों में आरटी-पीसीआर जांच की सुविधा नहीं, पहाड़ी इलाकों में हालात और भी गंभीर
- उत्तर प्रदेश, बिहार में सबसे ज्यादा व्यवस्था कमजोर, जांच के साथ दवाओं की किल्लत भी भारी
- गांवों में एक सरकारी डॉक्टर 11,082 लोगों की कर रहा देखभाल
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कोरोना का कहर
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
शहरों से निकल कोरोना वायरस अब देश के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच चुका है। 20-20 किलोमीटर दूर जहां डॉक्टर-नर्स नहीं पहुंच सकते वहां बुखार, उल्टी, पेट दर्द के मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। इन लोगों में न तो कोरोना संक्रमण की ठीक से पहचान हो पा रही है और न ही रोगियों को आइसोलेट किया जा रहा है। हालात इस कदर हैं कि 70 साल से कमजोर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में 15 हजार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ एक-एक डॉक्टर के भरोसे चल रहे हैं।
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इतना ही नहीं सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार एक सरकारी डॉक्टर 11,082 लोगों की देखभाल कर रहा है जोकि डब्ल्यूएचओ द्वारा तय मानक से 10 गुना अधिक है। नीति आयोग की हेल्दी स्टेट्स प्रोग्रेसिव इंडिया-2019 की रिपोर्ट ही कहती है कि भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र एक बड़े संकट से जूझ रहा है। सालों से ग्रामीण स्वास्थ्य अपर्याप्त बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन की कमी झेल रहा है।
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वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 70 करोड़ से अधिक आबादी 664,369 गांवों में रहती है। उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 97941 गांव हैं। जबकि पांच और राज्य हैं जहां 40 हजार से अधिक गांव हैं। इनमें ओड़िशा (51352), मध्य प्रदेश (55,392), महाराष्ट्र (43,772), पश्चिम बंगाल (40,783) और बिहार में 45113 गांव हैं।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन्हीं राज्यों में संक्रमण दर 10 फीसदी से अधिक बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के 28 जिलों में कोरोना की संक्रमण दर 10 फीसदी से अधिक है। जबकि ओड़िशा 28, मध्यप्रदेश 42, महाराष्ट्र 35, पश्चिम बंगाल 23 और बिहार में 24 जिलों में हर दिन 100 सैंपल की जांच में 10 से ज्यादा कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। लेकिन हालात ऐसे हैं कि यहां कोरोना वायरस का कौन सा स्ट्रेन फैला है? इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महामारी विशेषज्ञ डॉ. समीरन पांडा का कहना है कि इस वक्त देश के लिए गांवों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। अभी तक के अध्ययन से पता चलता है कि देश में यूके वेरिएंट की वजह से वायरस आक्रामक हुआ है लेकिन गांवों में वायरस की पहचान के लिए ज्यादा से ज्यादा जीनोम सिक्वेसिंग की आवश्यकता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए संकट
गर्भवती महिलाओं में भी कोरोना काफी घातक हो रहा है। शहरों में इसके कई मामले मिल चुके हैं लेकिन गांवों में इनके लिए केवल 1351 ही डॉक्टर हैं। मणिपुर में 23 प्रसूति रोग डॉक्टरों की जरूरत है, लेकिन वहां एक भी तैनात नहीं है। सिक्किम-मिजोरम में भी कोई नहीं है और हिमाचल प्रदेश में 86 में से केवल एक डॉक्टर ड्यूटी दे रहा है।
राज्यों को मिले 6815 करोड़, फिर भी कमी
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोविड पैकेज के रूप में राज्यों को 6815 करोड़ रुपये दिए गए थे ताकि इनका सही इस्तेमाल किया जा सके लेकिन अब पीएम मोदी के निर्देश पर इसका ऑडिट सोमवार से शुरू कर दिया जाएगा।
पलायन नहीं रोक सके हम
.इसमें कोई दोराय नहीं है कि गांवों तक कोरोना नहीं फैला है। पिछली बार की तरह इस बार भी पलायन को नहीं रोका जा सका। अब जरूरत राज्य सरकारों को मिलकर गांवों पर ध्यान देने की है।
- डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, दिल्ली एम्स
पिछले साल पास, अब सरकार फेल
पिछले साल सरकार ने सूझबूझ के साथ लॉकडाउन के चलते गांवों से बीमारी को दूर रखा। जुलाई 2020 में लॉकडाउन हटने के बाद गांवों में थोड़े-बहुत मरीज मिले लेकिन इस बार सिस्टम पूरी तरह से फेल रहा। गांवों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही है। -पूनम मुतरेजा, कार्यकारी निदेशक, पापुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया
न जांच, न दवाएं, क्षेत्रीय भाषा भी रोड़ा
गांवों में आरटी पीसीआर जांच साथ ही दवाएं तक उपलब्ध नहीं है। लोगों को पता ही नहीं है कि उन्हें कोरोना संक्त्रस्मण है या नहीं। कम जानकारी और क्षेत्रीय भाषाओं की वजह से समझाना भी मुश्किल है। पहाड़ी-दुर्गम इलाकों में यह और भी ज्यादा जटिल है। - डॉ. पवित्र मोहन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, राजस्थान
स्टाफ
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ डॉक्टर 17876, मेडिकल ऑफिसर 1099, रेडियोग्राफर 3266, फॉर्मासिस्ट्स 327, लैब तकनीशियन 627, नर्सिंग स्टाफ 3372 की तत्काल जरूरत है। इनके अलावा उप केंद्रों पर 58,473 एएनएम और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 1933 डॉक्टर, फॉर्मासिस्ट्स 8979, लैब टेक्नीशियन 15875, 7569 नर्सिंग कर्मचारी चाहिए।
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आईसीयू-वेंटिलेटर
अब तक 38867 वेंटिलेटर राज्यों को मिले हैं लेकिन 350 से ज्यादा जिला अस्पताल और तहसील स्तर पर भी एक वेंटिलेटर नहीं है।
प्लाज्मा या ब्लड :
देश के 63 जिलों में एक भी ब्लड बैंक नहीं है। ऐसे में अगर यहां कोरोना मरीज को प्लाज्मा देने की जरूरत पड़े तो वह संभव नहीं हो सकता, न ही प्लेटलेट्स।
ऑक्सीजन
अभी देश में प्रति दिन 9233 मीट्रिक टन ऑक्सीजन 931 टैंकर, वायु सेना और रेलवे के जरिए भेजी जा रही है। 11.90 लाख सिलेंडर शहरों में लगाए जा चुके हैं लेकिन गांवों तक इसे पहुंचाने के लिए राज्य सरकारों को और अधिक टैंकर, सिलेंडर की जरूरत होगी।
दवाएं
कोरोना के 54 फीसदी मरीजों में सांस लेने की दिक्कत मिल रही है। ऐसे में ऑक्सीमीटर की जरूरत भी पड़ेगी लेकिन गांवों में इसके साथ विटामिन, कैल्शियम, बुखार की सामान्य दवाएं भी नहीं है।
प्रति एक डॉक्टर पर इतनी आबादी
राज्य कोरोना आबादी
बिहार 637679 28,391
उत्तर प्रदेश 1609140 19,962
झारखंड 310024 18,518
मध्य प्रदेश 716708 16,996
छत्तीसगढ़ 899925 15,916
कर्नाटक 2130267 13,556
भारत 2,44,08,132 11082