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दिल्ली: आज से 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच, 21 देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे; पीएम मोदी से भी होगी मुलाकात
Mon, 26 Oct 2026 09:54 AM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 26 Oct 2026 09:54 AM IST
सार
नई दिल्ली में भारत की मेजबानी में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की शुरुआत हो रही है। 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधिमंडल इसमें भाग ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी संसद अध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उद्घाटन करेंगे।
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ब्रिक्स संसदीय मंच की आज से शुरुआत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत की मेजबानी में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में हिस्सा लेने के लिए 21 देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंच गए हैं। इनमें ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन संसद भवन परिसर में किया जा रहा है।
मंच का उद्घाटन समारोह आज सुबह 10 बजे शुरू होगा। लोकसभा अध्यक्ष और मंच के अध्यक्ष ओम बिरला उद्घाटन भाषण देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के दौरे पर आए संसद अध्यक्षों तथा प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे।
दो दिवसीय सम्मेलन का क्या है एजेंडा?
इस उच्चस्तरीय बहुपक्षीय मंच की थीम 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना' है। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक-केंद्रित विकास और विधायी संस्थाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा करना है।
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दो दिवसीय सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर उच्चस्तरीय सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर ध्यान दिया जाएगा। चर्चा में संस्थागत क्षमता निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में विधायी निगरानी की बढ़ती भूमिका, उभरती डिजिटल तकनीकों और सतत विकास लक्ष्यों जैसे विषय शामिल होंगे।
चीन को सौंपी जाएगी ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता
पूर्ण सत्रों के साथ-साथ सदस्य और साझेदार देशों की संसदीय समितियों के अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े अध्यक्षों की विशेष बैठक भी होगी। इसमें संसदीय कूटनीति, क्षमता निर्माण और विधायी कार्यों से जुड़ी बेहतर प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा की जाएगी। यह मंच प्रतिनिधिमंडलों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा, 64 देशों के साथ गठित संसदीय मैत्री समूहों की बैठकें होंगी, जिनका उद्देश्य वैश्विक संसदीय सहयोग को नई गति देना है।
इस मंच की मेजबानी से भारत को ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने, बहुपक्षीय चुनौतियों पर चर्चा करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। सम्मेलन का समापन 27 अक्तूबर को संयुक्त वक्तव्य को औपचारिक रूप से अपनाने के साथ होगा। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समापन भाषण देंगे और ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता औपचारिक रूप से चीन को सौंप दी जाएगी।
रूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से ओम बिरला की द्विपक्षीय बैठक
दो दिवसीय सम्मेलन से पहले 25 अक्टूबर को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रूसी संघ की संघीय सभा के स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने किया। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, बैठक में भारतीय और रूसी संसदीय प्रतिनिधिमंडलों ने वैश्विक मंचों पर सहयोग मजबूत करने और आतंकवाद से मुकाबले के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया।
ओम बिरला ने भारत की संसद और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से वोलोडिन तथा उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने आपसी विश्वास, सम्मान और साझा आकांक्षाओं पर आधारित भारत-रूस की विशेष और समय की कसौटी पर खरी उतरी मित्रता को रेखांकित किया।
आतंकवाद के खिलाफ भारत को रूस के समर्थन की तारीफ
बिरला ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में रूस के लगातार समर्थन की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और दृढ़ संकल्प दिखाना चाहिए तथा वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देश 2027 में राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे करेंगे। बिरला ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हुई है।
संसदीय कूटनीति के महत्व पर जोर देते हुए बिरला ने लोकसभा और रूसी स्टेट ड्यूमा के बीच लगातार संस्थागत संपर्क बनाए रखने की अपील की। लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, उन्होंने भारत-रूस अंतर-संसदीय आयोग की नियमित बैठकों और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान का सुझाव दिया। इसमें युवा और महिला सांसदों की भागीदारी पर भी जोर दिया गया।
रूस के साथ बैठक में क्या बोले ओम बिरला?
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का जिक्र करते हुए बिरला ने जन-केंद्रित दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया और ब्रिक्स संसदों के बीच सहयोग मजबूत करने में रूस की सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसी मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई। साथ ही, बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। बिरला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत भी दोहराई और परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत के पक्ष में रूस के लगातार समर्थन की सराहना की।
बैठक के दौरान उन्होंने परमाणु ऊर्जा, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क दोनों देशों के संबंधों के महत्वपूर्ण आधार हैं। भारत और रूस के लोगों के बीच गहरा स्नेह और सद्भावना सहयोग को और विस्तार देने की मजबूत नींव है।
भारत-रूस संबंधों के भविष्य पर मॉस्को को भरोसा
रूसी स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने व्यापार, उद्योग और कृषि के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने संयुक्त कारोबारी उपक्रमों को बढ़ावा देने तथा द्विपक्षीय व्यापार और निवेश की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने की जरूरत बताई। वोलोडिन ने ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों सहित भारत की संसद और रूसी स्टेट ड्यूमा के बीच नियमित संवाद को महत्वपूर्ण बताया। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, उन्होंने सांस्कृतिक और मानवीय क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने तथा दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की रूस की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
वोलोडिन ने भारत-रूस संबंधों के भविष्य पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि संसदों के बीच लगातार संवाद और विभिन्न क्षेत्रों में करीबी सहयोग से दोनों देशों की पुरानी साझेदारी और मजबूत होगी। बाद में ओम बिरला ने क्यूबा, मिस्र और बेलारूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और उपयोगी चर्चा हुई। सम्मेलन का समापन 27 अक्टूबर 2026 को होगा।
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मंच का उद्घाटन समारोह आज सुबह 10 बजे शुरू होगा। लोकसभा अध्यक्ष और मंच के अध्यक्ष ओम बिरला उद्घाटन भाषण देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के दौरे पर आए संसद अध्यक्षों तथा प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे।
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दो दिवसीय सम्मेलन का क्या है एजेंडा?
इस उच्चस्तरीय बहुपक्षीय मंच की थीम 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना' है। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक-केंद्रित विकास और विधायी संस्थाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा करना है।
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#WATCH | Delhi: Visuals from the 12th BRICS Parliamentary Forum at the Central Hall of Samvidhan Sadan in the Parliament House complex. The two-day Forum will be held on October 26 and 27 bringing together parliamentary leaders from BRICS member and partner countries. Prime Minister Narendra Modi will grace the occasion and meet the leaders of the visiting delegations.
— ANI (@ANI) October 26, 2026
दो दिवसीय सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर उच्चस्तरीय सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर ध्यान दिया जाएगा। चर्चा में संस्थागत क्षमता निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में विधायी निगरानी की बढ़ती भूमिका, उभरती डिजिटल तकनीकों और सतत विकास लक्ष्यों जैसे विषय शामिल होंगे।
चीन को सौंपी जाएगी ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता
पूर्ण सत्रों के साथ-साथ सदस्य और साझेदार देशों की संसदीय समितियों के अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े अध्यक्षों की विशेष बैठक भी होगी। इसमें संसदीय कूटनीति, क्षमता निर्माण और विधायी कार्यों से जुड़ी बेहतर प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा की जाएगी। यह मंच प्रतिनिधिमंडलों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा, 64 देशों के साथ गठित संसदीय मैत्री समूहों की बैठकें होंगी, जिनका उद्देश्य वैश्विक संसदीय सहयोग को नई गति देना है।
इस मंच की मेजबानी से भारत को ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने, बहुपक्षीय चुनौतियों पर चर्चा करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। सम्मेलन का समापन 27 अक्तूबर को संयुक्त वक्तव्य को औपचारिक रूप से अपनाने के साथ होगा। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समापन भाषण देंगे और ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता औपचारिक रूप से चीन को सौंप दी जाएगी।
रूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से ओम बिरला की द्विपक्षीय बैठक
दो दिवसीय सम्मेलन से पहले 25 अक्टूबर को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रूसी संघ की संघीय सभा के स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने किया। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, बैठक में भारतीय और रूसी संसदीय प्रतिनिधिमंडलों ने वैश्विक मंचों पर सहयोग मजबूत करने और आतंकवाद से मुकाबले के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया।
ओम बिरला ने भारत की संसद और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से वोलोडिन तथा उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने आपसी विश्वास, सम्मान और साझा आकांक्षाओं पर आधारित भारत-रूस की विशेष और समय की कसौटी पर खरी उतरी मित्रता को रेखांकित किया।
आतंकवाद के खिलाफ भारत को रूस के समर्थन की तारीफ
बिरला ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में रूस के लगातार समर्थन की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और दृढ़ संकल्प दिखाना चाहिए तथा वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देश 2027 में राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे करेंगे। बिरला ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हुई है।
संसदीय कूटनीति के महत्व पर जोर देते हुए बिरला ने लोकसभा और रूसी स्टेट ड्यूमा के बीच लगातार संस्थागत संपर्क बनाए रखने की अपील की। लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, उन्होंने भारत-रूस अंतर-संसदीय आयोग की नियमित बैठकों और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान का सुझाव दिया। इसमें युवा और महिला सांसदों की भागीदारी पर भी जोर दिया गया।
रूस के साथ बैठक में क्या बोले ओम बिरला?
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का जिक्र करते हुए बिरला ने जन-केंद्रित दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया और ब्रिक्स संसदों के बीच सहयोग मजबूत करने में रूस की सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसी मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई। साथ ही, बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। बिरला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत भी दोहराई और परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत के पक्ष में रूस के लगातार समर्थन की सराहना की।
बैठक के दौरान उन्होंने परमाणु ऊर्जा, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क दोनों देशों के संबंधों के महत्वपूर्ण आधार हैं। भारत और रूस के लोगों के बीच गहरा स्नेह और सद्भावना सहयोग को और विस्तार देने की मजबूत नींव है।
भारत-रूस संबंधों के भविष्य पर मॉस्को को भरोसा
रूसी स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने व्यापार, उद्योग और कृषि के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने संयुक्त कारोबारी उपक्रमों को बढ़ावा देने तथा द्विपक्षीय व्यापार और निवेश की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने की जरूरत बताई। वोलोडिन ने ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों सहित भारत की संसद और रूसी स्टेट ड्यूमा के बीच नियमित संवाद को महत्वपूर्ण बताया। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, उन्होंने सांस्कृतिक और मानवीय क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने तथा दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की रूस की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
वोलोडिन ने भारत-रूस संबंधों के भविष्य पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि संसदों के बीच लगातार संवाद और विभिन्न क्षेत्रों में करीबी सहयोग से दोनों देशों की पुरानी साझेदारी और मजबूत होगी। बाद में ओम बिरला ने क्यूबा, मिस्र और बेलारूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और उपयोगी चर्चा हुई। सम्मेलन का समापन 27 अक्टूबर 2026 को होगा।