फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   10 Thousand people turn Naga sadhus including engineers and management graduates

इंजीनियर से लेकर मैनेजमेंट ग्रेजुएट तक, 10 हजार बने नागा साधु

Mon, 04 Feb 2019 09:26 AM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Mon, 04 Feb 2019 09:26 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
10 Thousand people turn Naga sadhus including engineers and management graduates

प्रयागराज में इस वक्त जोरों शोरों से कुंभ का आयोजन चल रहा है। इस दौरान कई युवा नागा साधु भी बने हैं। बीते हफ्ते हुए दीक्षा समारोह में हजारों युवाओं ने अपने बाल त्यागे और अपना खुद का पिंड दान किया। रातभर चली अग्नि पूजा के बाद ये सभी प्राचीन परंपरा के अनुसार नागा साधु बने। हैरानी की बात तो ये है कि इन लोगों में बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के ग्रेजुएट भी शामिल हैं। 


loader

नागा साधु बनने आए 27 वर्षीय रजत कुमार राय का कहना है कि उन्होंने कच्छ से मरीन इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया है। इसके लिए उन्हें अच्छी खासी सैलरी मिलती लेकिन उन्होंने संसार का त्याग कर नागा साधु बनना बेहतर समझा। इसके अलावा नागा साधु बने 29 वर्षीय शंभु गिरी यूक्रेन से मैनेजमेंट ग्रेजुएट हैं। 18 वर्षीय घनश्याम गिरी उज्जैन से 12वीं बोर्ड के टॉपर हैं।

सोमवार को इन सभी ने मौनी अमावस्या के मौके पर शाही डुबकी लगाई। संतों, महामंडलेश्वरों के साथ ही नए बने नागा संन्यासियों में डुबकी लगाने को लेकर सबसे ज्यादा आतुरता रही। नागा संन्यासियों ने धूना के सामने बैठकर पूरी रात ओम नम:शिवाय का मंत्र जप करते हुए पवित्र भभूत तैयार की। साथ ही गुरुमंत्र का जप भी किया।

इस कड़े जीवन को जीने के लिए 10 हजार पुरुषों और महिलाओं ने दीक्षा ली है। अखिल भारतीय अखाड़ा परीषद (एबीएपी) के अंतर्गत ये लोग नागा साधु बने। ये परिषद भारत में हिंदू संतों एवं साधुओं का सर्वोच्च संगठन है।

जूना अखाड़ा के चीफ गवर्नर और एबीएपी के जनरल सेक्रेटरी महंत हरि गिरी का कहना है कि दीक्षा समारोह केवल कुंभ के दौरान ही होता है। और हर बार इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या हजारों में होती है। जब उनसे पूछा गया कि नागा बनने के लिए बैकग्राउंड कैसा होना चाहिए तो उन्होंने कहा कि जाति, धर्म, रंग चाहे जो हो लेकिन जो व्यक्ति वैराग्य की तीव्र इच्छा रखता है वह नागा साधु बनने के योग्य है। कई मुस्लिम, ईसाई और बाकी धर्मों के लोग भी स्वीकार किए गए हैं। इनमें वो लोग भी शामिल हैं जो पहले डॉक्टर और इंजीनियर रह चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि एक बार जब अखाड़े का हिस्सा बन जाए तो रास्ता बेहद कठिन हो जाता है। कुछ सालों तक उम्मीदवारों की जांच की जाती है कि वह अपनी इच्छा से रह रहे हैं या फिर किसी संकट से बचने के लिए यहां आए हैं। जब वह सभी परीक्षाएं पास कर लेते हैं और हमें संतुष्ट करते हैं, तभी वह नागा ठहराए जाते हैं।

घनश्याम गिरी का कहना है कि उसे बोर्ड की परीक्षाएं पास करने के बाद अपने उद्देश्य का अहसासा हुआ। उस वक्त उसकी उम्र 16 साल थी, जब वह अपने गुरु महंत जयराम गिरी के आश्रम गया। उसका कहना है कि वह अपने गुरु की कृपा के कारण दो साल बाद नागा बनने के लिए दीक्षा लेने कुंभ समारोह में आया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed