फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   seminar on mathematics subject on national mathematics day

सेमिनारः 'शून्य से कंप्यूटर साइंस तक पहुंचा गणित, विज्ञान की रानी है, मुश्किल नहीं बना रखा है'

Mon, 23 Dec 2019 01:31 PM IST
रोहतक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Mon, 23 Dec 2019 01:31 PM IST
विज्ञापन
seminar on mathematics subject on national mathematics day
फाइल फोटो
शून्य के अविष्कार से गणित कंप्यूटर साइंस तक पहुुंच गया है। कंप्यूटर साइंस से जुड़ने के कारण गणित का महत्व और बढ़ गया है। विज्ञान का छात्र हो या कला का। टेक्नोलॉजी में गणित की जरूरत होती है। इसलिए इन विषयों के शोधकर्ता विशेषतौर पर गणित का प्रशिक्षण लेते हैं। यही वजह है कि अब गणित विषय में दाखिले के लिए भी लंबी कतार लगती है।
विज्ञापन


यह कहना है एमडीयू गणित विभाग के पहले एचओडी प्रो. सरबजीत सिंह का। वे एमडीयू गणित विभाग की ओर से गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती पर मैथेमेटिकल साइंसेज एंड एप्लीकेशंस विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में पहुंच थे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने अपने गणित के सफर को साझा किया।
विज्ञापन


प्रो. सरबजीत सिंह ने कहा कि गणित विषय शुरू से ही समाज के लिए अहम रहा है। शून्य की खोज से मानव जीवन में बदलाव जारी हैं। अब गणित कंप्यूटर साइंस से भी जुड़ गया है। इससे इसका तकनीकी क्षेत्र में भी महत्व बढ़ गया है। इसलिए इस विषय पर ध्यान देने की जरूरत है। गणित को लेकर पहला इंट्रोडक्शन (पहचान) ही अहम है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शुरुआती कक्षा में गणित का अध्ययन बेहतर ढंग से होना जरूरी है। बच्चे को शुरू में ही ठीक पढ़ाया जाए तो जीवन भर सही चलता है। यहीं से बच्चे का रुझान व गणित में रुचि बनती है। इस काम में प्राथमिक शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी है। दुर्भाग्य है कि सिस्टम में खामियां हैं। बेस्ट टीचर नहीं हैं। निजी स्कूलों में वेतन नहीं है, सरकारी में नियुक्तियों में गड़बड़ी होती है।

गणित के प्रति विद्यार्थियों में डर बनाने के बजाय सिस्टम को सुधारने की जरूरत है। स्कूलों में विद्यार्थियों की सीटें ठीक हों। शिक्षक बच्चे की कमी को पकड़ें। वह एक-एक सवाल को समझाए। शिक्षक एक ही दिन में सौ से दो सौ कॉपी जांचने की स्थिति से बचें। यह काम को बेहतर बनाने के बजाय बिगाड़ता है। विद्यार्थी को एक ही दिन में 50 सवाल कराने के बजाय दस ही सवाल अच्छे ढंग से कराएं।

एक कमरे से शुरू हुए विभाग में अब आधुनिक लैब भी
मुझे वर्ष 1976 में एमडीयू के गणित विभाग का अध्यक्ष बनने का पहला अवसर मिला। यह मेरे लिए गर्व की बात है। उस समय एक कमरे में विभाग शुरू हुआ था। उसी को तीन हिस्सों में बांट कर अन्य स्टाफ के लिए भी जगह बनाई थी। अब कैंपस में विभाग के पास पूरा भवन है। यह आधुनिक सुविधा व लैब से संपन्न है। इसमें स्मार्ट क्लास, बेहतर व पर्याप्त फैकल्टी है। यह शिक्षा के लिए बेहतर माहौल है।

मुश्किल नहीं है गणित, बनाया हुआ है

एमडीयू गणित विभाग के पहले शोधार्थी चितकारा यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. अशोक कुमार चितकारा ने कहा कि गणित मुश्किल नहीं है। इसे मुश्किल बनाया हुआ है। यह सबसे आसान है। शिक्षक पूरी तरह तैयार हो तो किसी तरह की दिक्कत नहीं है। वह अपने विषय को मनोरंजक बनाए। उसे मनोरंजन के साथ पढ़ाए, ताकि विद्यार्थी बोर या परेशान न हो।

वह उसकी समस्या को समझ कर समाधान करे। गणित विषय अब जोड़, घटा, गुणा, भाग तक ही सीमित नहीं रह गया है। मैंने विवि से इस विषय में पहली पीएचडी की। इसके बाद से यह सिलसिला जारी है। हर दिन शोध में नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। शोधार्थी किताबी ज्ञान के बजाय प्रैक्टिकल काम करें। यह बेहतर कदम होगा।

विज्ञान की रानी है गणित
एमडीयू कुलसचिव एवं गणित विभाग के प्रो. गुलशन लाल तनेजा ने कहा कि गणित विज्ञान की रानी है। यह विषय को भले स्त्रिलिंग का आभास कराता हो, मगर शादीशुदा पति की तरह इसे समझने वाला ही सफल होता है। गणित की समझ रखने वालों ने देश व दुनिया को नई दिशा प्रदान की है। समाज पहले से बेहतर बना है। इसी उद्देश्य से पहली विभाग में महान गणितज्ञ श्रीनिवासा रामानुजन की 132वीं जयंती मनाई जा रही है।

यहां मैथेमेटिकल साइंसेज एंड एप्लीकेशंस विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में हरियाणा के अलावा दिल्ली, पंजाब, यूपी से भी शिक्षक पहुंचे हैं। विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, प्रो. रेणु चुघ, प्रो. जेएस नांदल, प्रो. जेएस सिक्का, प्रो. दलीप सिंह, प्रो. अर्चना मलिक, डॉ. सुमित गिल ने भी अपने विचार रखे। सेमिनार में देर शाम तक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed