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पीयू में नए दाखिले पर 5 फीसदी फीस बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर बवाल, छात्रनेता बोले- आंदोलन करेंगे
Fri, 21 Feb 2020 04:01 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Feb 2020 04:01 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
पंजाब यूनिवर्सिटी हर साल फीस में पांच फीसदी तक की बढ़ोतरी करता है। इस साल भी प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इसको लेकर वीरवार को बैठक की गई, लेकिन छात्र नेताओं ने सहमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों पर इससे अतिरिक्त भार पड़ेगा। अब पीयू प्रशासन इसका प्रस्ताव सिंडिकेट में भेजेगा। वहीं से तय होगा कि कितने फीसदी फीस बढ़ेगी।
पीयू में 16 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा पा रहे हैं। हर साल नए विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। इनकी संख्या लगभग 10 हजार के पार होती है। पिछले साल भी पीयू ने पांच फीसदी फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखा तो वह पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाया। विरोध होने के बाद यह नए विद्यार्थियों पर लागू किया गया। यानी जो विद्यार्थी दाखिला लेंगे उन्हें बढ़ी फीस देनी होगी।
बाकी विद्यार्थियों को इसमें छूट दी गई। इस बार फिर पीयू ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। नए विद्यार्थियों से पांच फीसदी फीस अधिक ली जाएगी। इसको लेकर अधिकारियों व छात्र नेताओं की बैठक बुलाई गई। वीरवार को हुई बैठक में छात्र नेताओं ने अधिकारियों के सामने कई तर्क रखे। कहा कि गरीब विद्यार्थी पहले ही फीस देने में असमर्थ हैं और यदि नए विद्यार्थियों की फीस फिर बढ़ेगी तो छात्रों को अतिरिक्त भार उठाना होगा।
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पीयू प्रशासन ने कहा कि इस पर वह एक बार और मंथन करेंगे। उसके बाद प्रस्ताव तैयार करके सिंडिकेट को भेजा जाएगा। सिंडिकेट जो तय करेगी वही मान्य होगा। छात्र नेताओं ने चेतावनी दे दी कि फीस बढ़ी तो आंदोलन होगा।
बढ़ोतरी के प्रस्ताव का मैंने विरोध किया है और लिखित में भी पीयू को दे दिया है। यदि फीस बढ़ाई गई तो हम हड़ताल करेंगे। नौबत आई तो भूख हड़ताल भी करेंगे। आंदोलन होगा, उसकी जिम्मेदारी पीयू प्रशासन की होगी।
- चेतन चौधरी, अध्यक्ष पीयूसीएससी
विद्यार्थियों की फीस नहीं बढ़नी चाहिए। गरीब विद्यार्थी यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के लिए बमुश्किल पहुंच पाते हैं। ऐसे में फीस की दीवार उनके सामने नहीं खड़ी की जानी चाहिए।
- अनुज सिंह, पदाधिकारी एनएसयूआई
शिक्षा पाना सभी का अधिकार है, लेकिन फीस इतनी नहीं बढ़नी चाहिए कि विद्यार्थी पढ़ाई ही न कर पाए। पीयू को पांच फीसदी फीस नहीं बढ़ानी चाहिए। फीस बढ़ाई गई तो एबीवीपी छात्रहित में आगे की रणनीति बनाएगी।
- हरीश गुर्जर, अध्यक्ष, एबीवीपी
एनएसयूआई हमेशा छात्र हित में खड़ी रही है। चाहे कोई भी मुद्दा हो। फीस बढ़ोत्तरी का हम हमेशा विरोध करते आ रहे हैं। आगे भी करते रहेंगे। छात्रों का अहित नहीं होने दिया जाएगा।
- मनप्रीत सिंह माहल, ज्वाइंट सेक्रेटरी पीयूसीएससी
तमाम गरीब परिवारों के विद्यार्थी पीयू में दाखिले के सपने देखते हैं ताकि भविष्य बन सके लेकिन फीस बढ़ाकर उनके सामने दीवार खड़ी की जा रही है, जो गलत है। हम इसका विरोध करेंगे।
- विजय कुमार, अध्यक्ष आइसा
हर साल पांच फीसदी फीस बढ़ोतरी होती है। इस बार भी प्रस्ताव तैयार किया है, लेकिन छात्र काउंसिल के पदाधिकारी इसके विरोध में हैं। यह प्रस्ताव सिंडिकेट के पास जाएगा। वहीं से निर्णय होगा।
- प्रो. शंकरजी झा, डीयूआई पीयू
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पीयू में 16 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा पा रहे हैं। हर साल नए विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। इनकी संख्या लगभग 10 हजार के पार होती है। पिछले साल भी पीयू ने पांच फीसदी फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखा तो वह पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाया। विरोध होने के बाद यह नए विद्यार्थियों पर लागू किया गया। यानी जो विद्यार्थी दाखिला लेंगे उन्हें बढ़ी फीस देनी होगी।
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बाकी विद्यार्थियों को इसमें छूट दी गई। इस बार फिर पीयू ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। नए विद्यार्थियों से पांच फीसदी फीस अधिक ली जाएगी। इसको लेकर अधिकारियों व छात्र नेताओं की बैठक बुलाई गई। वीरवार को हुई बैठक में छात्र नेताओं ने अधिकारियों के सामने कई तर्क रखे। कहा कि गरीब विद्यार्थी पहले ही फीस देने में असमर्थ हैं और यदि नए विद्यार्थियों की फीस फिर बढ़ेगी तो छात्रों को अतिरिक्त भार उठाना होगा।
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पीयू प्रशासन ने कहा कि इस पर वह एक बार और मंथन करेंगे। उसके बाद प्रस्ताव तैयार करके सिंडिकेट को भेजा जाएगा। सिंडिकेट जो तय करेगी वही मान्य होगा। छात्र नेताओं ने चेतावनी दे दी कि फीस बढ़ी तो आंदोलन होगा।
बढ़ोतरी के प्रस्ताव का मैंने विरोध किया है और लिखित में भी पीयू को दे दिया है। यदि फीस बढ़ाई गई तो हम हड़ताल करेंगे। नौबत आई तो भूख हड़ताल भी करेंगे। आंदोलन होगा, उसकी जिम्मेदारी पीयू प्रशासन की होगी।
- चेतन चौधरी, अध्यक्ष पीयूसीएससी
विद्यार्थियों की फीस नहीं बढ़नी चाहिए। गरीब विद्यार्थी यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के लिए बमुश्किल पहुंच पाते हैं। ऐसे में फीस की दीवार उनके सामने नहीं खड़ी की जानी चाहिए।
- अनुज सिंह, पदाधिकारी एनएसयूआई
शिक्षा पाना सभी का अधिकार है, लेकिन फीस इतनी नहीं बढ़नी चाहिए कि विद्यार्थी पढ़ाई ही न कर पाए। पीयू को पांच फीसदी फीस नहीं बढ़ानी चाहिए। फीस बढ़ाई गई तो एबीवीपी छात्रहित में आगे की रणनीति बनाएगी।
- हरीश गुर्जर, अध्यक्ष, एबीवीपी
एनएसयूआई हमेशा छात्र हित में खड़ी रही है। चाहे कोई भी मुद्दा हो। फीस बढ़ोत्तरी का हम हमेशा विरोध करते आ रहे हैं। आगे भी करते रहेंगे। छात्रों का अहित नहीं होने दिया जाएगा।
- मनप्रीत सिंह माहल, ज्वाइंट सेक्रेटरी पीयूसीएससी
तमाम गरीब परिवारों के विद्यार्थी पीयू में दाखिले के सपने देखते हैं ताकि भविष्य बन सके लेकिन फीस बढ़ाकर उनके सामने दीवार खड़ी की जा रही है, जो गलत है। हम इसका विरोध करेंगे।
- विजय कुमार, अध्यक्ष आइसा
हर साल पांच फीसदी फीस बढ़ोतरी होती है। इस बार भी प्रस्ताव तैयार किया है, लेकिन छात्र काउंसिल के पदाधिकारी इसके विरोध में हैं। यह प्रस्ताव सिंडिकेट के पास जाएगा। वहीं से निर्णय होगा।
- प्रो. शंकरजी झा, डीयूआई पीयू