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चंडीगढ़ः फीस जमा कराने के फैसले पर पूर्व पार्षद सतिंदर ने शुरू किया ‘सवाल पूछो’ अभियान

Tue, 26 May 2020 02:20 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 26 May 2020 02:20 PM IST
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Former councilor Satinder Singh started a 'ask question' campaign on the decision to deposit fees
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
31 मई तक दो महीने की फीस जमा कराने के यूटी प्रशासन के आदेश की चौतरफा आलोचना हो रही है। इस बीच पूर्व पार्षद व वकील सतिंदर सिंह ने शिक्षा सचिव अरुण कुमार गुप्ता से सवाल पूछने को लेकर ‘सवाल पूछो’ अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वह फीस जमा कराने से संबंधित शिक्षा सचिव से सवाल पूछें।
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इसी कड़ी में भाजपा के वरिष्ठ नेता हरिशंकर मिश्रा ने शिक्षा सचिव से पांच सवाल किए हैं। सतिंदर सिंह ने शिक्षा सचिव के आदेशों को लेकर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को शिकायत भी की है। उन्होंने कहा कि अधिकारी प्रशासक बदनौर को गुमराह करने में जुटे हैं और उन्हें सच्चाई से कोसों दूर रखा जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि शिक्षा सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने अपने 19 मई के आदेश में कहीं भी यह जिक्र नहीं किया है कि स्कूलों की वित्तीय हालत क्या है। इस आदेश में अरुण कुमार गुप्ता की कार्यशैली पर ही सवाल खड़ा हो रहा है। सतिंदर सिंह ने अरुण कुमार गुप्ता से यह भी पूछा है कि वह बताएं कि स्कूल प्रबंधन के साथ हैं या फिर अभिभावकों के साथ। उन्होंने पूछा है कि शिक्षा सचिव के 19 मई के आदेश को पास करने के पीछे क्या मंशा व मजबूरी रही है।
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उधर, भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष हरिशंकर मिश्रा ने कहा है कि शिक्षा सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने शहर के करीब डेढ़ लाख माता-पिता का जीना मुश्किल कर दिया है। जब मार्च से पूरा देश बंद था। कोई काम नहीं चल रहा था तो परिजन 31 मई तक दो महीने की फीस और फिर अगले 15 दिन में जून महीने की फीस कैसे जमा कराएंगे। जिनके दो-तीन बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, वह कैसे हजारों की फीस जमा कराएंगे। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वह भी शिक्षा सचिव से सवाल पूछें कि उन्होंने यह एकतरफा फैसला क्यों लिया।

हरिशंकर मिश्रा की तरफ से पूछे गए सवाल

1. शिक्षा सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने अपने आदेश में पड़ोसी राज्यों पंजाब-हरियाणा का जिक्र किया है, लेकिन हरियाणा सरकार ने यह आदेश दिए हैं कि अगर कोई अभिभावक अप्रैल व मई 2020 माह की ट्यूशन फीस स्थगित करने का अनुरोध करता है तो स्कूल प्रबंधक इस अनुरोध को स्वीकार करेगा। फिर चंडीगढ़ में यह आदेश क्यों नहीं जारी किए गए?

2. पंजाब सरकार ने आदेश दिया है कि जिन स्कूलों ने तालाबंदी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा प्रदान की है या प्रदान कर रहे हैं, वहीं ट्यूशन फीस ले सकते हैं। चंडीगढ़ में सभी प्राइवेट स्कूलों ने ऑनलाइन शिक्षा नहीं प्रदान की है, फिर वह किस हक से फीस मांग रहे हैं। शिक्षा सचिव अरुण कुमार गुप्ता इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?

3. पंजाब सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को 2020-2021 की फीस में वृद्धि न किए जाने की सलाह दी है, जबकि चंडीगढ़ के प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस भी 8 से 10 फीसदी बढ़ाकर ले रहे हैं। शिक्षा सचिव अरुण कुमार गुप्ता इस पर रोक क्यों नहीं लगा रहे हैं?

4. शिक्षा सचिव ने अपने आदेश में साफ कहा है कि अप्रैल और मई की फीस 31 मई तक देनी होगी और फिर इसके 15 दिन के अंदर ही अगले महीने यानी जून महीने की फीस देनी होगी। परिजन तीन महीने की फीस कैसे जमा कराएंगे। अरुण कुमार गुप्ता इतने संवेदनहीन कैसे हो सकते हैं?

5. शिक्षा सचिव ने शहर के प्रमुख 20 बड़े प्राइवेट स्कूलों के बारे में सोचा, जो करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और उनके कई और बिजनेस भी हैं लेकिन शहर के डेढ़ लाख पैरेंट्स के बारे में क्यों नहीं सोचा। इनमें से ज्यादातर के आय का स्त्रोत एक ही है, जो लॉकडाउन की वजह से बंद हो गया। क्या वह जनता की परेशानी नहीं समझते हैं?
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