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पंजाब यूनिवर्सिटी में लगेगी 7 राज्यों के प्रोफेसर्स की क्लास, सीखेंगे शोध और रचनात्मकता के गुर
Wed, 20 Nov 2019 01:35 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2019 01:35 PM IST
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रिफ्रेशर कोर्स
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में मंगलवार से भाषाओं के अध्यापकों के लिए रिफ्रेशर कोर्स शुरू किया गया। इसका उद्घाटन पंजाब यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. राजकुमार की ओर से किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम यूजीसी की गाइडलाइन के तहत आयोजित करवाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अध्यापकों काज्ञान बढ़ाना है, जिससे वे विद्यार्थियों के साथ मिलकर नए शोध और रचनात्मकता में प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
पीयू में हिंदी विभाग की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम दो सप्ताह तक चलेगा। इस दौरान सेमिनार और लेक्चर करवाए जाएंगे। कार्यक्रम में संस्कृत, हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा के 27 अध्यापक हिस्सा ले रहे हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र व अन्य राज्यों के प्रतिभागी भी शामिल हैं।
डॉ. गुरमीत सिंह ने बताया कि यह कोर्स अध्यापकों को उनके प्रमोशन में भी मदद करेगा। इसमें अध्यापकों की दो हफ्ते तक रोज कक्षाएं लगेंगी। इस दौरान उनके दिन में डेढ़-डेढ़ घंटे के तीन लेक्चर लगाएं जाएंगे। इसके साथ ही उन्हें प्रोजेक्ट पर भी काम करना होगा।
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पीयू के वीसी प्रो. राजकुमार ने कहा कि हिंदी विभाग विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से पीयू में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा है। उन्होंने ‘अर्न व्हाइल लर्न’ को सफलतापूर्वक चलाने के लिए विभाग की प्रशंसा की। कहा कि इस योजना का लाभ सभी विद्यार्थियों तक पहुंचाना चाहिए।
यूजीसी-एचआरडीसी की उपनिदेशक डॉ. जयंती दत्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में सीनेटर डॉ. परवीन गोयल और जगदीश मेहता, भाषा संकाय के डीन प्रो. गुरपाल सिंह संधु, प्रो. नीरजा सूद, प्रो. सत्यपाल सहगल, प्रो. बैजनाथ प्रसाद और प्रो. अशोक कुमार उपस्थित रहे।
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पीयू में हिंदी विभाग की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम दो सप्ताह तक चलेगा। इस दौरान सेमिनार और लेक्चर करवाए जाएंगे। कार्यक्रम में संस्कृत, हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा के 27 अध्यापक हिस्सा ले रहे हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र व अन्य राज्यों के प्रतिभागी भी शामिल हैं।
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डॉ. गुरमीत सिंह ने बताया कि यह कोर्स अध्यापकों को उनके प्रमोशन में भी मदद करेगा। इसमें अध्यापकों की दो हफ्ते तक रोज कक्षाएं लगेंगी। इस दौरान उनके दिन में डेढ़-डेढ़ घंटे के तीन लेक्चर लगाएं जाएंगे। इसके साथ ही उन्हें प्रोजेक्ट पर भी काम करना होगा।
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पीयू के वीसी प्रो. राजकुमार ने कहा कि हिंदी विभाग विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से पीयू में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा है। उन्होंने ‘अर्न व्हाइल लर्न’ को सफलतापूर्वक चलाने के लिए विभाग की प्रशंसा की। कहा कि इस योजना का लाभ सभी विद्यार्थियों तक पहुंचाना चाहिए।
यूजीसी-एचआरडीसी की उपनिदेशक डॉ. जयंती दत्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में सीनेटर डॉ. परवीन गोयल और जगदीश मेहता, भाषा संकाय के डीन प्रो. गुरपाल सिंह संधु, प्रो. नीरजा सूद, प्रो. सत्यपाल सहगल, प्रो. बैजनाथ प्रसाद और प्रो. अशोक कुमार उपस्थित रहे।
रिफ्रेशर कोर्स का विषय भी महत्वपूर्ण
रिफ्रेशर कोर्स का विषय ‘साहित्य में लोक की पुनर्स्थापना’ रखा गया है। तकनीकी जमाने में लोग साहित्य से दूर होते जा रहे हैं। साहित्य समाज के स्वस्थ विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही साहित्य समाज का दर्पण भी है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग दो सप्ताह का कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
युवा पीढ़ी को साहित्य के साथ कैसे जोड़ा जाए। इसी मुद्दे को लेकर हिंदी विभाग में सेमिनार, व्याख्यान और चर्चाएं की जाएंगी, जिससे नवीनतम तरीकों के साथ लोगों को साहित्य के साथ जोड़ा जा सके और इस दिशा में महत्वपूर्ण शोध किए जा सकें।
विद्यार्थियों ने बनवाई हजारी प्रसाद द्विवेदी की स्मृति पट्टिका
रिफ्रेशर कोर्स की शुरुआत के साथ ही वीसी प्रो. राज कुमार ने साहित्यकार और चिंतक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की स्मृति पट्टिका का अनावरण किया। यह स्मृति पट्टिका हिंदी विभाग केविद्यार्थियों और शोधार्थियों ने मिलकर बनवाई है। उल्लेखनीय है कि आचार्य द्विवेदी सन् 1960 से 1967 तक पीयू हिंदी विभाग के अध्यक्ष और पंजाब विश्वविद्यालय के डीयूआई भी रहे हैं।
वे भाषा विभाग से बने यूनिवर्सिटी के पहले डीयूआई थे। आचार्य द्विवेदी को तत्कालीन कुलपति एसी जोशी बनारस से लेकर आए थे। उनके आने के बाद हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. इंद्रनाथ मदान ने उनके सम्मान में अपना पद छोड़ दिया था। आचार्य द्विवेदी ने पीयू में परिशोध नाम से पत्रिका भी शुरू की थी। ‘परिशोध’ यूजीसी की पत्रिकाओं की सूची में भी शामिल है।
युवा पीढ़ी को साहित्य के साथ कैसे जोड़ा जाए। इसी मुद्दे को लेकर हिंदी विभाग में सेमिनार, व्याख्यान और चर्चाएं की जाएंगी, जिससे नवीनतम तरीकों के साथ लोगों को साहित्य के साथ जोड़ा जा सके और इस दिशा में महत्वपूर्ण शोध किए जा सकें।
विद्यार्थियों ने बनवाई हजारी प्रसाद द्विवेदी की स्मृति पट्टिका
रिफ्रेशर कोर्स की शुरुआत के साथ ही वीसी प्रो. राज कुमार ने साहित्यकार और चिंतक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की स्मृति पट्टिका का अनावरण किया। यह स्मृति पट्टिका हिंदी विभाग केविद्यार्थियों और शोधार्थियों ने मिलकर बनवाई है। उल्लेखनीय है कि आचार्य द्विवेदी सन् 1960 से 1967 तक पीयू हिंदी विभाग के अध्यक्ष और पंजाब विश्वविद्यालय के डीयूआई भी रहे हैं।
वे भाषा विभाग से बने यूनिवर्सिटी के पहले डीयूआई थे। आचार्य द्विवेदी को तत्कालीन कुलपति एसी जोशी बनारस से लेकर आए थे। उनके आने के बाद हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. इंद्रनाथ मदान ने उनके सम्मान में अपना पद छोड़ दिया था। आचार्य द्विवेदी ने पीयू में परिशोध नाम से पत्रिका भी शुरू की थी। ‘परिशोध’ यूजीसी की पत्रिकाओं की सूची में भी शामिल है।