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सरकारी धान पर ले लिया साढ़े पांच करोड़ का लोन

Tue, 15 Mar 2016 01:10 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला Updated Tue, 15 Mar 2016 01:10 AM IST
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government rice, loan, 5 crore, fraud, karnal
रुपये - फोटो : file

सरकारी धान को अपना दिखाकर निसिंग के राइस मिलर द्वारा पांच करोड़ 80 लाख रुपये का लोन लेने का मामला प्रकाश में आया है। आरोपियों ने पूरे प्लानिंग के साथ काम किया और बैंक के अधिकारियों ने भी वेरिफिकेशन में लापरवाही बरतते हुए लोन पास कर दिया। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की तरफ से जांच पड़ताल करने के बाद खुलासा हुआ है कि राइस मिलर ने धान सीजन में सरकार को चावल उपलब्ध करवाने की शर्त पर लगाये गये धान पर ही लोन लिया है।

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विभाग की तरफ से की गई शिकायत के आधार पर निसिंग थाना पुलिस ने निसिंग के भगवती राइस मिल के संचालक अजय सिंगला, विजय सिंगला सहित एक अन्य के खिलाफ धारा 420, 406, 120बी के तहत केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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निसिंग के भगवती राइस मिल के संचालक अजय सिंगला, विजय सिंगला व अन्य ने धान सीजन में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की तरफ से करीब 23 हजार क्विंटल धान लगवाई। शर्त के मुताबिक राइस मिलर को तय समय पर कुल धान का 67 प्रतिशत चावल उपलब्ध कराना था, लेकिन चावल न मिलने पर अधिकारियों को मिल की कार्यप्रणाली पर संदेह हुआ। डीएफएससी निशांत राठी के नेतृत्व में हुई जांच पड़ताल में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने बैंक से सरकारी 1509 वैरायटी की करीब 23 हजार क्विंटल धान पर पांच करोड़ 80 लाख रुपये का लोन ले लिया, जबकि इस धान की कीमत साढ़े तीन करोड़ रुपये बनती है। जांच पूरी होते ही अधिकारियों ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
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धान लेने को डीएफएससी ने मांगी फोर्स
अधिकारियों ने बताया कि राइस मिलर ने लोन पर फर्जीवाड़ा पूरी प्लानिंग से किया। राइस मिल को जिस धान का सरकार को चावल देना था उसी धान को उसने अपनी निजी धान दिखाई। अब बैंक लोन दे चुका है और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग धान पर अपना कब्जा करने में लगा है। अब डीएफएससी ने धान की रिकवरी करने के लिए पुलिस से फोर्स की मांग की है। दूसरी तरफ डीसी को पत्र लिखकर उसकी जमीन को नीलाम करने की मांग की गई है। वहीं, बैंक उस धान को अपना बता रहा है, ऐसे में बैंक और प्रशासन धान लेने को लेकर आमने सामने हैं।

राइस मिलरों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में
जिले में राइस मिलरों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है। पहले सरकारी धान की जगह दूसरी धान दिखाकर फर्जीवाड़ा करने का मामला उजागर हुआ। सरकार ने जांच पड़ताल करवाई तो कई पर कार्रवाई भी हुई। अब सवाल यह है कि मिलर क्यों नहीं समय पर सरकार को धान उपलब्ध कराते। सूत्रों का कहना है कि अन्य राइस मिलों की जांच की जाए और भी गड़बड़ी सामने आ सकती है।


वर्जन
निसिंग के भगवती राइस मिल के संचालक अजय सिंगला, विजय सिंगला व एक अन्य के खिलाफ एफआईआर करवा दी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए थाने में बातचीत की है। मिल से धान उठवाने के लिए एसपी से पुलिस फोर्स की मांग की है। आरोपियों ने पांच करोड़ 80 लाख रुपये का लोन लिया हुआ है। बैंक ने वेरिफिकेशन पूरी प्रक्रिया से नहीं किया, इसलिए आरोपी लोन ले चुके हैं। धान हमारा है, इसलिए हम उसे लेकर रहेंगे।
- निशांत राठी, डीएफएससी करनाल।

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