{"_id":"5f6efa1f38eae650d25e563b","slug":"haryana-government-pilot-project-to-make-exam-procedure-student-centric","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा में पायलट प्रोजक्ट... चार विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी जब मन करेगा, तब दे सकेंगे परीक्षा","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
हरियाणा में पायलट प्रोजक्ट... चार विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी जब मन करेगा, तब दे सकेंगे परीक्षा
Sat, 26 Sep 2020 01:51 PM IST
खुशबू गोयल
संदीप बिश्नोई, हिसार
संदीप बिश्नोई, हिसार
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 26 Sep 2020 01:51 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश सरकार द्वारा परीक्षा प्रक्रिया को विद्यार्थी केंद्रित बनाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके तहत अब अंतिम वर्ष के विद्यार्थी अपनी मर्जी से जब चाहें, तब अपनी बैकलॉग परीक्षा दे सकेंगे। इससे री-अपीयर वाले विद्यार्थियों को फायदा होगा और उन्हें सेमेस्टर की परीक्षाओं का इंतजार नहीं करना होगा। वे चाहें तो एक-दो माह में ही तैयारी करके परीक्षा दे सकेंगे।
हालांकि इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होना बाकी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के परीक्षा संबंधी सुधारों के तहत विद्यार्थी की मांग के अनुसार परीक्षा करवाने की योजना बनाई गई है। पायलट प्रोजेक्ट में हिसार का गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, भिवानी का चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, जींद का चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय और श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय शामिल किया गया हैं।
विवि बनाएंगे प्रश्न कोष, हर विद्यार्थी का होगा अलग प्रश्न पत्र
इस प्रोजेक्ट के तहत विवि अपना एक प्रश्न कोष बनाएंगे। परीक्षा के समय विद्यार्थी को कंप्यूटर से बेतरतीब माध्यम से (रेंडमली) प्रश्न पत्र मिलेगा। एक ही समय पर एक से अधिक विद्यार्थी परीक्षा देंगे तो सबके प्रश्न अलग-अलग होंगे। विवि द्वारा बनाए गए प्रश्न कोष (क्वेश्चन बैंक) से कंप्यूटर स्वत: ही प्रत्येक विद्यार्थी के लिए अलग-अलग प्रश्न पत्र निकालेगा और विद्यार्थियों को वह परीक्षा देनी होगी।
विज्ञापन
विद्यार्थियों की मांग पर परीक्षा होगी। यह अभी अंतिम सेमेस्टर के लिए विद्यार्थियों व पासआउट विद्यार्थियों के लिए शुरू होगा। वे री-अपीयर की परीक्षा दे सकेंगे। हालांकि इसे मूर्त रूप देने में तीन-चार माह लगेंगे। हम विस्तृत प्रश्न कोष तैयार कर रहे हैं। इस तरह से परीक्षा लेने से एक साथ परीक्षा लेने का भार भी कम होगा।
- प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, गुजवि
विज्ञापन
हालांकि इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होना बाकी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के परीक्षा संबंधी सुधारों के तहत विद्यार्थी की मांग के अनुसार परीक्षा करवाने की योजना बनाई गई है। पायलट प्रोजेक्ट में हिसार का गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, भिवानी का चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, जींद का चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय और श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय शामिल किया गया हैं।
विज्ञापन
विवि बनाएंगे प्रश्न कोष, हर विद्यार्थी का होगा अलग प्रश्न पत्र
इस प्रोजेक्ट के तहत विवि अपना एक प्रश्न कोष बनाएंगे। परीक्षा के समय विद्यार्थी को कंप्यूटर से बेतरतीब माध्यम से (रेंडमली) प्रश्न पत्र मिलेगा। एक ही समय पर एक से अधिक विद्यार्थी परीक्षा देंगे तो सबके प्रश्न अलग-अलग होंगे। विवि द्वारा बनाए गए प्रश्न कोष (क्वेश्चन बैंक) से कंप्यूटर स्वत: ही प्रत्येक विद्यार्थी के लिए अलग-अलग प्रश्न पत्र निकालेगा और विद्यार्थियों को वह परीक्षा देनी होगी।
विज्ञापन
विद्यार्थियों की मांग पर परीक्षा होगी। यह अभी अंतिम सेमेस्टर के लिए विद्यार्थियों व पासआउट विद्यार्थियों के लिए शुरू होगा। वे री-अपीयर की परीक्षा दे सकेंगे। हालांकि इसे मूर्त रूप देने में तीन-चार माह लगेंगे। हम विस्तृत प्रश्न कोष तैयार कर रहे हैं। इस तरह से परीक्षा लेने से एक साथ परीक्षा लेने का भार भी कम होगा।
- प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, गुजवि