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जर्जर भवन में तो कहीं धर्मशाला में लगती हैं क्लास
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sat, 09 Jul 2016 12:11 AM IST
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जर्जर हाल में स्कूल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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केंद्र और प्रदेश सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बेशक डिजिटल इंडिया या फिर सर्व शिक्षा अभियान को अमलीजामा पहनाने में लगी हो। परंतु हकीकत में पढ़ने आने वाले बच्चों के लिए स्कूलों में बैठने की व्यवस्था तक नहीं है। कहीं जर्जर हालात वाले भवनों में बच्चे पढ़ने के लिए आ रहे हैं, तो कहीं धर्मशाला में शिक्षा दी जा रही है। आज भी बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं।
जिले के हजारों की संख्या में प्राथमिक पाठशाला के विद्यार्थियों को एक ही कमरे या फिर बरामदे में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। हैरान करने वाली बात को लेकर है कि वो कमरे व बरामदों भी बिल्कुल जर्जर हालात में हैं। वर्षों से मरम्मत, रंग-पुताई की बाट जोह रहे हैं। कहीं सप्लाई से पानी मुहैया हो रहा हैं, तो कहीं पर बच्चे हैंडपंप से अपनी प्यास बुझाते हैं। शहर के प्राइमरी स्कूलों की बदइंतजामी व बदहाली के दृश्य दावे और हकीकत के बीच फासले को बयां करते हैं :
सताती है अनहोनी की चिंता
राजकीय प्राथमिक पाठशाला मॉडल, बर्तन बाजार में चारदीवारी नहीं है। लोहे के पोल खड़े करके काम चलाया जा रहा है। हेड इंचार्ज ऑफिस से लेकर कक्षा लगने वाले कमरों में लंबी दरारें, ईंटें साफ दिखाई पड़ती है। बारिश के मौसम में छत गिरने का डर रहता है। पूरी तरह जर्जर कमरों वाली पाठशाला में 78 नौनिहाल पढ़ने आ रहे हैं। हेड इंचार्ज शमशेर सिंह ने बताया कि स्कूल भवन जर्जर हो गया है। स्कूल के सभी छह कमरे बिल्कुल जर्जर हैं। विभाग को कई बार समस्या से अवगत कराया जा चुका हैं। लेकिन उसके बाद भी उनकी समस्या का हल नहीं हुआ है। स्कूल की चारदीवारी की जगह लोहे के पाइपों से ही काम चल रहा है।
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जगह का टोटा, मरम्मत की दरकार
पतराम गेट स्थित पाठशाला में कक्षा पहली से पांचवी तक के 131 बच्चे पढ़ने आते हैं। पांच शिक्षकों व तीन जेबीटी इंटर्नशिप विद्यार्थियों का स्टॉफ जर्जर भवन में स्कूल चला रहे हैं। व्यवस्था के नाम पर एक कमरा ऑफिस तो दो कमरे व एक बरामदे में कक्षाएं लगती है। लेकिन दोनों ही खस्ताहाल। ग्राउंड या फिर मिड डे मिल बनाने को रसोई की कोई व्यवस्था नहीं। पाठशाला इंचार्ज उमेद शर्मा ने बताया कि दो साल पहले स्कूल की मरम्मत खातिर कमेटी को सूचित किया गया था। लेकिन अभी भी स्कूल खस्ताहाल हालातों में चल रहा है।
यहां मंदिर में लगता है स्कूल
शहर के दादरी गेट से ढाणा रोड पर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला के पास अपना भवन ही नहीं है। मंदिर की धर्मशाला में आठ शिक्षक 180 बच्चों को शिक्षित करने में लगे हुए हैं। धर्मशाला के दो हॉल में ही सभी बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। रसोई, किताब, अन्य सामान रखने के लिए एक कमरे का प्रयोग स्टोर के तौर पर होता है। परंतु आसपास में शादी-विवाह होने पर बारात ठहराने की खातिर धर्मशाला बुक कराई जाती है। ऐसे में दोनों हॉल में रखे बैंच व सामान को एक कोने में या फिर कमरे के अंदर ही रखना पड़ता है। सड़क मार्ग से सटा होने पर दिनभर वाहनों के आवागमन के शोर व बच्चों की सुरक्षा की चिंता परेशान का सबब बनी हुई है।
23 में से आठ कमरे कंडम
गांव पालुवास के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कंडम आठ कमरे जानलेवा साबित हो सकती है। इन कमरों की हालत ऐसी है कि कभी भी गिर सकते हैं। वैसे तो इन पर ताले लगा रखे है मगर बच्चे अक्सर इनके आसपास खेलते रहते है और आते-जाते रहते है। कमरों की कमी और जानलेवा आठ कंडम कमरों को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने स्कूल दो शिफ्टों में चलाया जा रहा है। कुल 23 कमरों में से केवल 15 कमरों में ही कक्षाएं लग रही है।
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जिले के हजारों की संख्या में प्राथमिक पाठशाला के विद्यार्थियों को एक ही कमरे या फिर बरामदे में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। हैरान करने वाली बात को लेकर है कि वो कमरे व बरामदों भी बिल्कुल जर्जर हालात में हैं। वर्षों से मरम्मत, रंग-पुताई की बाट जोह रहे हैं। कहीं सप्लाई से पानी मुहैया हो रहा हैं, तो कहीं पर बच्चे हैंडपंप से अपनी प्यास बुझाते हैं। शहर के प्राइमरी स्कूलों की बदइंतजामी व बदहाली के दृश्य दावे और हकीकत के बीच फासले को बयां करते हैं :
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सताती है अनहोनी की चिंता
राजकीय प्राथमिक पाठशाला मॉडल, बर्तन बाजार में चारदीवारी नहीं है। लोहे के पोल खड़े करके काम चलाया जा रहा है। हेड इंचार्ज ऑफिस से लेकर कक्षा लगने वाले कमरों में लंबी दरारें, ईंटें साफ दिखाई पड़ती है। बारिश के मौसम में छत गिरने का डर रहता है। पूरी तरह जर्जर कमरों वाली पाठशाला में 78 नौनिहाल पढ़ने आ रहे हैं। हेड इंचार्ज शमशेर सिंह ने बताया कि स्कूल भवन जर्जर हो गया है। स्कूल के सभी छह कमरे बिल्कुल जर्जर हैं। विभाग को कई बार समस्या से अवगत कराया जा चुका हैं। लेकिन उसके बाद भी उनकी समस्या का हल नहीं हुआ है। स्कूल की चारदीवारी की जगह लोहे के पाइपों से ही काम चल रहा है।
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जगह का टोटा, मरम्मत की दरकार
पतराम गेट स्थित पाठशाला में कक्षा पहली से पांचवी तक के 131 बच्चे पढ़ने आते हैं। पांच शिक्षकों व तीन जेबीटी इंटर्नशिप विद्यार्थियों का स्टॉफ जर्जर भवन में स्कूल चला रहे हैं। व्यवस्था के नाम पर एक कमरा ऑफिस तो दो कमरे व एक बरामदे में कक्षाएं लगती है। लेकिन दोनों ही खस्ताहाल। ग्राउंड या फिर मिड डे मिल बनाने को रसोई की कोई व्यवस्था नहीं। पाठशाला इंचार्ज उमेद शर्मा ने बताया कि दो साल पहले स्कूल की मरम्मत खातिर कमेटी को सूचित किया गया था। लेकिन अभी भी स्कूल खस्ताहाल हालातों में चल रहा है।
यहां मंदिर में लगता है स्कूल
शहर के दादरी गेट से ढाणा रोड पर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला के पास अपना भवन ही नहीं है। मंदिर की धर्मशाला में आठ शिक्षक 180 बच्चों को शिक्षित करने में लगे हुए हैं। धर्मशाला के दो हॉल में ही सभी बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। रसोई, किताब, अन्य सामान रखने के लिए एक कमरे का प्रयोग स्टोर के तौर पर होता है। परंतु आसपास में शादी-विवाह होने पर बारात ठहराने की खातिर धर्मशाला बुक कराई जाती है। ऐसे में दोनों हॉल में रखे बैंच व सामान को एक कोने में या फिर कमरे के अंदर ही रखना पड़ता है। सड़क मार्ग से सटा होने पर दिनभर वाहनों के आवागमन के शोर व बच्चों की सुरक्षा की चिंता परेशान का सबब बनी हुई है।
23 में से आठ कमरे कंडम
गांव पालुवास के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कंडम आठ कमरे जानलेवा साबित हो सकती है। इन कमरों की हालत ऐसी है कि कभी भी गिर सकते हैं। वैसे तो इन पर ताले लगा रखे है मगर बच्चे अक्सर इनके आसपास खेलते रहते है और आते-जाते रहते है। कमरों की कमी और जानलेवा आठ कंडम कमरों को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने स्कूल दो शिफ्टों में चलाया जा रहा है। कुल 23 कमरों में से केवल 15 कमरों में ही कक्षाएं लग रही है।