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पाबंदी के बावजूद गुजरात में शराब पीने वाली महिलाओं की संख्या दोगुनी हुई

Tue, 12 Jan 2021 12:14 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Tue, 12 Jan 2021 12:14 PM IST
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No dry days: Alcohol gains popularity among Gujarat women as number doubles in 5 years
women purchasing alcohol

गुजरात से शराब को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। गुजरात में शराबबंदी होने के बावजूद पिछले पांच वर्षों में शराब पीने वाली महिलाओं की संख्या में दोगुनी से अधिक हो गई है। जबकि शराब पीने वाले पुरुषों की संख्या घटकर आधी हो गई है। हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस), 2019-20 की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। गुजरात में वर्ष 1960 में शराब पर पाबंदी लगा दी गई थी।

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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-पांच) में गुजरात की कुल 33,343 महिलाओं और 5351 पुरुषों को शामिल किया गया। सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाली करीब 200 महिलाओं (0.6 प्रतिशत) ने दावा किया कि वह शराब पीती हैं। वहीं 2015 के एनएफएचएस सर्वे में 68 महिलाओं (0.3%) और 668 पुरुषों (11.1%) ने शराब पीने की बात मानी थी। 2015 में 6,018 पुरुषों और 22,932 महिलाओं का सर्वेक्षण किया गया था।
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गुजरात में एनएफएचएस-चार में 22,932 महिलाओं और 5574 पुरुषों को शामिल किया गया था। हालांकि, दोनों सर्वेक्षणों की तुलना करने पर दिखता है कि पुरुषों में शराब उपभोग की दर आधी रह गई। वर्ष 2015-16 के सर्वेक्षण में 618 पुरुषों (5574 का 11.1 प्रतिशत) ने कहा था कि वे शराब पीते हैं जबकि हालिया सर्वेक्षण में 310 लोगों ने बताया कि वे मदिरा का सेवन करते हैं।
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दोनों आंकड़ों की तुलना करने से पता चलता है कि 2015 में सिर्फ 0.1 फीसदी शहरी महिलाओं ने कहा कि वह शराब पीती हैं। वहीं 2020 के सर्वेक्षण में पाया गया कि 0.3 फीसदी महिलाओं ने शराब का सेवन किया। 2015 में शराब पीने वाले पुरुषों के मामले 10.6 फीसदी थे, जबकि 2020 में यह घटकर 4.6 फीसदी हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में शराब का सेवन करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 2015 में 0.4 फीसदी से बढ़कर 2020 में 0.8 फीसदी हो गया। शराब पीने वाले पुरुषों की संख्या 2015 में 11.4 फीसदी से घटकर 2020 में 6.8 फीसदी हो गई है।


इसलिए बढ़ रही शराब पीने वाली महिलाओं की संख्या 
समाज विज्ञानी गौरांग जानी मद्यपान करने वाली महिलाओं की संख्या में वृद्धि का कारण ‘पार्टी संस्कृति’ को बढ़ावा और समाज में शराब उपभोग को मिल रही स्वीकार्यता को मानते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग और उच्च मध्यवर्ग ने हालिया समय में पार्टी संस्कृति को बढ़ावा दिया है। इस कारण से परिवारों में महिलाएं भी शराब पीने लगी हैं। पहले पुरुष ही शराब पीते थे। अब परिवार की पार्टी में शराब पीने का चलन बढ़ा है।

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